भूमध्यसागर में नहीं थम रही नौका दुर्घटनाएँ, 2026 में लगभग 1 हज़ार लोगों ने गँवाई जान
भूमध्यसागर जलक्षेत्र में लीबियाई तट से आ रही नौकाएँ हाल के दिनों में दुर्घटना का शिकार हुई हैं, जिनमें कम से कम 180 लोगों के मारे जाने या लापता होने की आशंका है. अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने आगाह किया है कि इस वर्ष अब तक, इन जोखिम भरी समुद्री यात्राओं में अपनी जान गँवाने वाले लोगों की संख्या 1 हज़ार के नज़दीक पहुँच रही है.
यूएन प्रवासन एजेंसी के अनुसार, केन्द्रीय भूमध्यसागर में पिछले वर्ष इसी अवधि में 460 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी, जोकि 150 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है.
सम्पूर्ण भूमध्यसागर जलक्षेत्र में इस वर्ष, अब तक कम से कम 990 लोगों के मारे जाने की जानकारी जुटाई गई है, जोकि वर्ष 2014 के बाद से किसी साल की सबसे घातक शुरुआत में से है.
IOM की महानिदेशक ऐमी पोप ने बताया कि ये त्रासदियाँ फिर से दर्शाती हैं कि बड़ी संख्या में लोग अब भी इन ख़तरनाक मार्गों पर अपने जीवन को जोखिम में डाल रहे हैं.
“ज़िन्दगियों की सबसे पहले रक्षा की जानी होगी. मगर, हमें उसके साथ ही, मानव तस्करों और तस्करी करने वाले लोगों को निर्बलों का शोषण करने से रोकने के लिए एकजुट, मज़बूत प्रयासों की आवश्यकता है.”
“…और सुरक्षित व नियमित मार्गों का विस्तार करने के लिए भी, ताकि कोई भी इन जानलेवा यात्राओं को करने के लिए मजबूर न हो.”
अभी तक मिली जानकारी के अनुसार, 5 अप्रैल को लीबिया के तजोरा से, 120 प्रवासी एक नाव पर सवार हुए थे, लेकिन केन्द्रीय भूमध्यसागर में हुए हादसे में 80 से अधिक लोग लापता हो गए. बताया गया है कि ख़राब मौसम में नौका पलट गई.
एक व्यापारिक जहाज़ की मदद से 32 लोगों को जीवित बचा लिया गया है, जिन्हें बाद में इटली के तटरक्षक दल द्वारा लैम्पेडूसा द्वीप लाया गया. दो शवों को फ़िलहाल बरामद किया गया है.
यूएन प्रवासन एजेंसी, इस हादसे में जीवित बचे व्यक्तियों को सहायता प्रदान करने में जुटी है.
इससे पहले, 1 अप्रैल को इटली के लैम्पेडूसा के नज़दीक हुई एक अन्य नौका दुर्घटना में 19 लोगों की मौत हो गई थी. जीवित बचे लोगों ने बताया कि उन्होंने 28-29 मार्च को लीबिया के ज़ुआरा से अपनी यात्रा की शुरुआत की थी, जिनमें महिलाएँ व बच्चे भी थे.
58 लोगों को बचाने में सफलता मिली लेकिन अनेक घायलों की स्थिति गम्भीर बताई गई है.
इंजन ख़राब हो जाने के बाद यह नौका तीन दिनों तक समुद्री मार्ग में फँसी हुई थी, ईंधन और खाद्य सामग्री की क़िल्लत थी और मौसम ख़राब हो गया था.
निरन्तर दुर्घटनाएँ
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बचाव अभियान शुरू होने से पहले ही अनेक लोग, सम्भवत: अत्यधिक ठंड लगने के कारण (हाइपोथर्मिया) अपनी जान गँवा चुके थे. हालांकि, इस मामले में विस्तृत जानकारी जुटी जा रही है और पीड़ितों को लैम्पेडूसा के केन्द्र में लाया गया है.
इसी दिन, तुर्कीये के तट के नज़दीक ग्रीस जा रही एक नौका के डूबने से कम से कम 19 प्रवासियों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य को बचा लिया गया था.
भूमध्यसागर जलमार्ग पर ऐसी कई अन्य घटनाएँ हुई हैं, जो इन यात्राओं में निहित जोखिमों को दर्शाती हैं.
28 मार्च को, लीबिया से आ रही एक नौका ग्रीस के क्रीट के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई जिसमें कम से कम 22 लोग मारे गए. वहीं, 30 मार्च को ट्यूनीशिया के पास हुए एक हादसे में कम से कम 19 लोगों की मौत हुई और 20 लापता हैं.
इन जोखिम भरी समुद्री यात्राओं को करने वाले लोगों की संख्या में कमी के बावजूद, मृतकों का आँकड़ा बढ़ रहा है. इटली के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक वहाँ 6,200 लोग पहुँचे हैं, जबकि 2025 में यह आँकड़ा 9,400 था.
यूएन प्रवासन एजेंसी ने चेतावनी दी है कि तलाश एवं बचाव प्रयासों के लिए पर्याप्त क्षमता का अभाव है, और इसके मद्देनज़र, समुद्री रास्तों पर ज़िन्दगियों को बचाने के लिए ठोस समन्वय व्यवस्था की जानी होगी.
साथ ही, ख़तरनाक यात्राओं पर निर्भरता घटाने के लिए यह ज़रूरी है कि प्रवासन के क़ानूनी, नियमित उपायों का विस्तार किया जाए.