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क्यूबा संकट: ईंधन आपूर्ति में अवरोधों से गहराता असर, विशाल मानवीय आवश्यकताएँ

तूफान मेलिसा के कारण व्यापक विनाश के बाद गुआमामा, सैंटियागो डी क्यूबा में मलबे और मलबे के बीच एक छोटा लड़का हरी साइकिल पर बैठा है। निकासी में कोई जान नहीं गई।
© UNICEF/Claudio Pelaez
चक्रवाती तूफ़ान मेलिसा की वजह से अक्टूबर 2025 में क्यूबा में जान-माल की भारी हानि हुई थी.

क्यूबा संकट: ईंधन आपूर्ति में अवरोधों से गहराता असर, विशाल मानवीय आवश्यकताएँ

मानवीय सहायता

संयुक्त राष्ट्र ने गहरे मानवीय संकट से जूझ रहे क्यूबा के लिए अन्तरराष्ट्रीय समर्थन की पुकार लगाई है, जहाँ ईंधन आपूर्ति की लम्बे समय से नाकेबन्दी जारी रहने और पिछले वर्ष चक्रवाती तूफ़ान मेलिसा से हुई बर्बादी के कारण स्थिति निरन्तर बिगड़ती जा रही है.

इस वर्ष जनवरी में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने क्यूबा में तेल की आपूर्ति को पहुँचने से रोकने के लिए कड़े क़दम उठाए थे, जिसके बाद से कैरीबियाई क्षेत्र में स्थित इस देश में गहरा संकट उपजा है.

हालांकि, हाल के दिनों में क्यूबा में सीमित मात्रा में ईंधन की आपूर्ति होने की जानकारी है और पिछले सप्ताह रूस द्वारा तेल से लदे एक जहाज़ को अमेरिका ने नाकेबन्दी के बावजूद वहाँ आने की अनुमति दे दी थी. मगर, इसके बावजूद देश में विशाल आवश्यकताएँ बरक़रार हैं. 

क्यूबा में संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष मानवीय सहायता अधिकारी ने सोमवार को बताया कि मार्च महीने के अन्तिम दिनों से ईंधन की क़िल्लत का असर गहराता जा रहा है.

रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर फ़्राँसिस्को पिशोन ने वीडियो लिन्क के ज़रिए न्यूयॉर्क में पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान, एक कार्रवाई योजना को भी पेश किया है, जोकि क्यूबा के 8 प्रान्तों में 20 लाख लोगों तक सहायता पहुँचाने पर लक्षित है.

इस योजना को, चक्रवाती तूफ़ान मेलिसा से हुई बर्बादी से उबरने के लिए उठाए गए क़दमों के आधार पर तैयार किया गया है, जिसमें देश के बिजली ग्रिड पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित किया गया है, जोकि दरकने के कगार पर है. 

दैनिक जीवन पर असर

क्यूबा में ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में ईंधन नहीं होने की वजह से पिछले तीन महीनों के दौरान, मानवीय स्थिति बुरी तरह से बिगड़ी है.

संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा इस वर्ष जनवरी में, एक सैन्य कार्रवाई में वेनेज़ुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मदुरो को हिरासत में लेकर अमेरिका लाने से पहले, क्यूबा को वेनेज़ुएला द्वारा तेल की आपूर्ति की जा रही थी.

पिछले महीने यह संकट और बिगड़ा, जब राष्ट्रीय बिजली प्रणाली में तीन बार व्यवधान दर्ज किया गया, और देश एक गहरे अंधकार में डूब गया.

ऊर्जा की गहरी कमी से अति-आवश्यक सेवाओं पर बुरा असर पड़ा है. स्वास्थ्य सेवाओं पर भीषण दबाव है, जहाँ 96 हज़ार से अधिक सर्जरी लम्बित हैं, इनमें 11 हज़ार बच्चे हैं. 

वहीं, हज़ारों बच्चों को राष्ट्रीय प्रतिरक्षण कार्यक्रम के तहत, ज़रूरी टीके नहीं मिल पा रहे हैं. 10 लाख से अधिक लोग अब भी जल आपूर्ति के लिए ट्रकों से मिलने वाले पानी पर निर्भर हैं, लेकिन डीज़ल की क़िल्लत की वजह से यह भी दबाव में है.

निर्बल आबादी पर ध्यान

रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर पिशोन ने बताया कि हर किसी पर इस संकट का समान असर नहीं हो रहा है, और पहले से ही सम्वेदनशील स्थिति में रह रहे लोग विशेष रूप से पीड़ित हैं.

क्यूबा में वृद्धजन की एक बड़ी आबादी है और इसलिए, संयुक्त राष्ट्र ने अकेले जीवन गुज़ार रहे 3 लाख बुज़ुर्गों तक सहायता पहुँचाने के लिए प्रयास शुरू किए हैं. उनके अलावा, 1 लाख विकलांगजन और 32 हज़ार गर्भवती महिलाओं को भी मदद मुहैया कराई गई है.

संयुक्त राष्ट्र ने अपनी योजना में मौजूदा ऊर्जा संकट से निपटने के लिए क्यूबा में सतत ऊर्जा विकल्पों को अपनाने पर बल दिया है, जिसमें सिंचाई प्रणाली, अस्पतालों, स्कूलों के लिए सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित की जाएगी.

यूएन ने इस योजना को लागू करने के लिए 2.6 करोड़ डॉलर की लामबन्दी की है, लेकिन अब भी 6.8 करोड़ डॉलर की कमी बताई गई है.