ईरान में पुलों, बिजली संयंत्रों, बुनियादी ढाँचों को ध्वस्त करने की धमकी पर चिन्ता
संयुक्त राष्ट्र ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के उस बयान पर गहरी चिन्ता जताई है, जिसमें उन्होंने ईरान द्वारा समझौते नहीं किए जाने की स्थिति में देश के ऊर्जा संयंत्रों, पुलों और अन्य नागरिक प्रतिष्ठानों पर हमले करने और उन्हें ध्वस्त करने की धमकी दी है.
28 फ़रवरी को इसराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान पर हवाई बमबारी शुरू की थी, जिसके बाद ईरान ने इसराइल और खाड़ी क्षेत्र में स्थित देशों को ड्रोन व मिसाइल हमलों में निशाना बनाया है.
मध्य पूर्व में भड़के संकट की वजह से, तेल, गैस, उर्वरक समेत अन्य सामान की आपूर्ति के लिए अहम जलमार्ग, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाज़ों की आवाजाही भी ठप हो गई है जिससे विश्व के अनेक हिस्सों में ईंधन की क़िल्लत महसूस की जा रही है.
समाचार माध्यमों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर अपने सन्देश में ईरान से मंगलवार तक इस जलमार्ग को खोलने की मांग की है, हालांकि ईरान ने इसे ख़ारिज किया है.
सोमवार को न्यूयॉर्क में यूएन मुख्यालय में एक पत्रकार ने यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक से अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के उस वक्तव्य पर प्रतिक्रिया जाननी चाही, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य के न खुलने की स्थिति में ईरान में बिजली संयंत्रों, पुलों और अन्य बुनियादी ढाँचों को ध्वस्त कर देने की धमकी दी है.
यूएन प्रवक्ता ने इसके जवाब में कहा कि महासचिव, सोशल मीडिया में ऐसी बयानबाज़ी से चिन्तित हैं, जिसमें "ईरान द्वारा समझौते के लिए सहमत न होने की स्थिति में," पावर प्लांट, पुलों और अन्य प्रतिष्ठानों पर अमेरिकी हमलों की धमकी दी गई है.
तयशुदा दायित्व निभाने का आग्रह
स्तेफ़ान दुजैरिक ने बताया कि अन्तरराष्ट्रीय क़ानून से जुड़े मुद्दों पर महासचिव का बहुत स्पष्ट मत रहा है, और उन्होंने युद्धरत पक्षों से फिर आग्रह किया है कि इस टकराव के दौरान तयशुदा दायित्वों को निभाया जाना होगा.
साथ ही, उन्होंने ध्यान दिलाया है कि ऊर्जा सम्बन्धी बुनियादी ढाँचों समेत नागरिक प्रतिष्ठानों पर हमले नहीं किए जा सकते हैं, तब भी यदि विशिष्ट नागरिक प्रतिष्ठानों को सैन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा हो.
यूएन प्रवक्ता के अनुसार, अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून के तहत इन प्रतिष्ठानों पर हमले तब भी निषिद्ध हैं, यदि उसके परिणामस्वरूप आम नागरिकों के लिए बड़े पैमाने पर नुक़सान होता हो.
अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन
“एक बार फिर, महासचिव ने ज़ोर देकर कहा है कि यह समय, सभी पक्षों द्वारा इस टकराव पर विराम लगाने का है, चूँकि अन्तरराष्ट्रीय विवादों के शान्तिपूर्ण ढंग से निपटान का कोई अन्य व्यवहारिक विकल्प नहीं है.”
एक अन्य पत्रकार ने इसी विषय पर पूछा कि महासचिव की राय में क्या ऐसे हमलों को युद्ध अपराध की श्रेणी में रखा जा सकता है.
यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने इसके जवाब में कहा कि ऐसी घटनाएँ अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन होंगी.
“मेरे विचार में, यह एक अपराध है या नहीं, यह किसी अदालत के द्वारा ही तय किया जाएगा, मगर नागरिक प्रतिष्ठानों पर किया गया कोई भी हमला, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का एक उल्लंघन है और यह बिलकुल स्पष्ट है.”