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मध्य पूर्व युद्ध: एशियाई देशों पर गहराता असर, बढ़ती महंगाई और ईंधन की क़िल्लत

श्रीलंका में घर-परिवार खाना पकाने के लिये ईंधन और बुनियादी वस्तुओं की भीषण क़िल्लत से जूझ रहे हैं. (फ़ाइल फ़ोटो)
© WFP/Josh Estey श्रीलंका में घर-परिवार खाना पकाने के लिये ईंधन और बुनियादी वस्तुओं की भीषण क़िल्लत से जूझ रहे हैं. (फ़ाइल फ़ोटो)

मध्य पूर्व युद्ध: एशियाई देशों पर गहराता असर, बढ़ती महंगाई और ईंधन की क़िल्लत

शान्ति और सुरक्षा

मध्य पूर्व में जारी भीषण हिंसक युद्ध की वजह से ईंधन और अन्य आवश्यक सामान की आपूर्ति में बड़े पैमाने पर बाधाएँ दर्ज की गई हैं, जिससे एशिया-प्रशान्त क्षेत्र में स्थित देशों पर मानवीय और आर्थिक प्रभाव तेज़ी से गहराता जा रहा है. Strait of Hormuz - होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर गुज़रने वाले व्यापारिक जहाज़ों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है. तेल, गैस, उर्वरक की क़िल्लत महसूस की जा रही है, उनकी क़ीमतों में तेज़ वृद्धि हो रही है, जिसका सीधा असर आयात पर निर्भर देशों पर पड़ रहा है.

28 फ़रवरी को इसराइल व संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरान पर हवाई बमबारी शुरू किए जाने और उसके बाद ईरान के जवाबी ड्रोन व मिसाइल हमलों से शुरू हुआ यह युद्ध, अब दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है. इस टकराव की चपेट में खाड़ी क्षेत्र में स्थित देश भी आए हैं. 

युद्ध भड़कने से पहले, फ़ारस की खाड़ी (Persian Gulf) को अरब सागर से जोड़ने वाले संकरे जलमार्ग होर्मुज़ जलडमरूमध्य के ज़रिए, हर दिन वैश्विक तेल, गैस, उर्वरक और कमर्शियल सामान का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता था. 

मगर, इस जलमार्ग पर व्याप्त असुरक्षा की वजह से जहाज़ों की आवाजाही थम गई है, जिससे दुनिया के अनेक हिस्सों में तेल, गैस व अन्य सामान की क़ीमतों में वृद्धि और महँगाई बढ़ी है. वहीं वैश्विक व्यापार और आर्थिक वृद्धि के अनुमानों में गिरावट आई है.

महँगाई की मार

एशियाई देशों में, ब्रैंट क्रूड (Brent Crude) कच्चे तेल की क़ीमत, सोमवार को सुबह के कारोबार के दौरान बढ़कर लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई, हालाँकि बाद में इसमें हल्की गिरावट दर्ज की गई.

पाकिस्तान, श्रीलंका, बाँग्लादेश और फ़िलीपींस जैसे देशों में परिवहन, बिजली और कृषि लागत में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे महँगाई और आर्थिक दबाव और बढ़ गया है.

वहीं, समुद्री परिवहन में बाधाओं के साथ, युद्ध के दौरान जोखिम की वजह से बीमा की बढ़ती लागत, आपूर्ति श्रृंखला पर अतिरिक्त दबाव डाल रही हैं. जबकि, उर्वरकों की कमी से खाद्य उत्पादन को लेकर चिन्ता बढ़ गई है, जिससे आगामी समय में खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.

मौजूदा संकट का असर, मानवीय सहायता अभियानों पर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है. ईंधन और परिवहन लागत में वृद्धि के कारण मानवीय राहत कार्यों की क़ीमत लगातार बढ़ रही है, जिससे सहायता पहुँचाना और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है.

यूएन एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि यदि यह संकट लम्बा खिंचता है, तो क्षेत्र में अतिरिक्त 90 लाख लोग गम्भीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर सकते हैं, जिससे मानवीय स्थिति और गम्भीर हो सकती है.

एक अपतटीय तेल रिग नीले समुद्र में एक स्पष्ट आकाश के नीचे खड़ी है, दूर से पहाड़ों को देखा जा सकता है।
© Unsplash/Zach Theo एक तोल शोधक संयंत्र (जहाज़) समुद्र तट के बाहर नज़र आ रहा है. मध्य पूर्व युद्ध ने, पूरी दुनिया में तेल व खाद्य सामान की आपूर्ति का संकट उत्पन्न कर दिया है.

आपात उपायों में तेज़ी

मध्य पूर्व में जारी संकट के कारण ईंधन और खाद्य क़ीमतों में वृद्धि के बाद, देशों की सरकारें आपात उपाय लागू कर रही हैं.

भारत ने आपात क़दम उठाते हुए एलपीजी गैस की आपूर्ति को औद्योगिक उपभोक्ताओं से हटाकर घरेलू उपभोक्ताओं की ओर मोड़ने का आदेश दिया है, ताकि आम लोगों को रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके.

उधर, नेपाल में ईंधन की क़ीमतों में फिर तेज़ उछाल आया है, जहाँ पैट्रोल 200 रुपए प्रति लीटर के पार पहुँच गया है, जो अब तक का सबसे उच्च स्तर है.

नेपाल में विमानन ईंधन की क़ीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं, जिससे महँगाई का दबाव और बढ़ गया है. सरकारी नियंत्रण वाली ईंधन कम्पनी ने, पिछले महीने से आंशिक रूप से भरे रसोई गैस सिलेंडरों की बिक्री शुरू की है, ताकि जमाखोरी और घबराहट में की जाने वाली ख़रीदारी को हतोत्साहित किया जा सके.

यह भूमिबद्ध देश अपनी लगभग पूरी ईंधन आपूर्ति के लिए भारत से आयात पर निर्भर है, जिससे मौजूदा संकट का असर और अधिक गहरा हो गया है.

बिजली कटौती की नौबत

करीना तामांग अपनी बहन मनिता को गोद में लिए रसोई गैस सिलेंडर पर बैठी हैं, जबकि उनकी माँ सीता पास ही एक अन्य सिलेंडर पर बैठी हैं, जो बालाजू, काठमांडू के पास गैस सिलेंडर के लिए कतार में हैं।
© UNICEF/Prakash Mathema नेपाल की राजधानी काठमांडू में लोग रसोई गैस सिलेंडरों के साथ लाइन में खड़े हैं.

बाँग्लादेश में, ईंधन की बिक्री पर सीमाएँ तय की गई हैं और बिजली कटौती लागू कर दी गई है. वहीं, श्रीलंका और म्याँमार में नियंत्रित आपूर्ति और आवाजाही पर प्रतिबन्धों ने, आम जनजीवन और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है.

उधर, पाकिस्तान में क़ीमतों में तेज़ उछाल देखा जा रहा है. पैट्रोल की क़ीमतों में 24 प्रतिशत और गेहूँ के आटे में 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे महँगाई का दबाव और बढ़ गया है.

अफ़ग़ानिस्तान में खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में वृद्धि, विस्थापित लोगों की बड़ी संख्या और सीमित संसाधनों पर दबाव से स्थिति और गम्भीर हो रही है. यहाँ पहले से ही कमज़ोर सेवाओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है, जिससे मानवीय संकट गहराने की आशंका है.

वियतनाम ने पैट्रोलियम उत्पादों पर आयात शुल्क में कटौती की है और जेट ईंधन की सम्भावित कमी को लेकर चेतावनी दी है. थाईलैंड ने ऊर्जा खपत कम करने के लिए सरकारी एजेंसियों को घर से ही काम करने के निर्देश दिए हैं और गै़र-ज़रूरी विदेशी यात्राओं को स्थगित कर दिया है. 

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फ़िलीपींस ने, सरकारी दफ़्तरों के लिए अस्थाई रूप से चार-दिवसीय कार्य सप्ताह लागू किया है. इससे पहले, देश में 25 मार्च को आपातकाल की घोषणा की जा चुकी है. 

जबकि, कम्बोडिया ने वितरण केन्द्रों पर ईंधन स्टॉक की वास्तविक समय में उपलब्धता की जानकारी अनिवार्य कर दी है.

लाओ लोकतांत्रिक गणतंत्र ने जमाखोरी रोकने के लिए 5 लीटर से अधिक के कंटेनर में ईंधन की बिक्री पर प्रतिबन्ध लगा दिया है.

तत्काल युद्धविराम की अपील

बीते सप्ताहान्त के दौरान, लेबनान में दक्षिणी क्षेत्रों और राजधानी बेरूत को निशाना बनाकर किए गए इसराइली हमलों में अनेक लोगों के हताहत होने की ख़बर है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने मौजूदा संकट को “व्यापक युद्ध के कगार पर” बताते हुए तत्काल युद्धविराम की अपील की है.

उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के सम्मान पर बल देते हुए होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी ध्यान केन्द्रित किया है.

उधर, अन्तरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने ईरान के बुशेहर परमाणु संयंत्र के पास एक और घटना की जानकारी दी है, जिसमें संयंत्र के बुनियादी ढाँचे को नुक़सान पहुँचा है. हालाँकि, विकिरण स्तर में कोई वृद्धि दर्ज नहीं की गई है. 

एजेंसी ने चेतावनी दी है कि परमाणु स्थलों के आसपास हमले के गम्भीर सुरक्षा नतीजे हो सकते हैं और इन्हें किसी भी हाल में रोकना होगा.

यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने मध्य पूर्व क्षेत्र में नागरिक स्वतंत्रताओं पर बढ़ती पाबन्दियों, गिरफ़्तारियों और सख़्ती पर चिन्ता जताई है. यूएन कार्यालय ने कहा कि ऐसी घटनाओं से आम लोगों में डर और अनिश्चितता का माहौल गहरा रहा है.