न्यूयॉर्क सिटी और यूएन का नाता: एक शहर, जिसने दुनिया के लिए अपने दरवाज़े खोले
द्वितीय विश्व युद्ध की तबाही के बाद, एक अधिक शान्तिपूर्ण और न्यायपूर्ण दुनिया के सपने ने, वर्ष 1945 में देशों को एक नई सोच के तहत एकजुट किया. इसी सोच और आशा की बुनियाद पर संयुक्त राष्ट्र का जन्म हुआ. इसके पीछे भी बहुत दिलचस्प कहानी है कि इस विश्व संगठन को आख़िरकार न्यूयॉर्क सिटी की मेज़बानी किस तरह मिली.
आठ दशक बाद भी शान्ति, गरिमा और समानता की आकांक्षा उतनी ही प्रासंगिक बनी हुई है. संयुक्त राष्ट्र न्यूयॉर्क सिटी में अपने 80 वर्ष पूरे कर रहा है. आज यह शहर संगठन की वैश्विक पहचान का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है, हालाँकि शुरुआत में यह तय नहीं था कि यही उसका स्थाई घर बनेगा.
न्यूयॉर्क के Bronx क्षेत्र में स्थित हंटर कॉलेज को अब तो लेहमन कॉलेज के नाम से जाना जाता है. यही कॉलेज, संयुक्त राष्ट्र के शुरुआती अस्थाई मुख्यालयों में से एक था. यही वह स्थान था, जहाँ 25 मार्च 1946 को अमेरिकी धरती पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की पहली बैठक आयोजित हुई थी.
मौजूदा इमारत के अलावा सुरक्षा परिषद की बैठकें और कहाँ हुईं?
हंटर कॉलेज के बास्केटबॉल जिम को केवल तीन सप्ताह में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद कक्ष में बदल दिया गया था. पत्रकारों की मौजूदगी के लिए एक स्विमिंग पूल को बदलकर अस्थाई व्यवस्था की गई थी. सुरक्षा परिषद ने जिन शुरुआती मुद्दों पर चर्चा की, उनमें ईरान भी शामिल था.
लेकिन संयुक्त राष्ट्र के कामकाज के लिए ज़रूरी कर्मचारियों और उस समय के 51 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को समायोजित करने के लिए हंटर कॉलेज में पर्याप्त जगह नहीं थी. इसलिए लाँग आइलैंड (Long Island) के लेक सक्सैस (Lake Success) इलाक़े में, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान गोला-बारूद बनाने वाली एक फ़ैक्टरी में नया अस्थाई मुख्यालय स्थापित किया गया.
वर्ष 1946 में भी, आज की ही तरह, संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारी बहुसांस्कृतिक और अन्तरराष्ट्रीय पृष्ठभूमि से आते थे. उस समय अख़बारों में यह देखकर आश्चर्य जताया गया था कि वहाँ साड़ी पहने महिलाएँ और पारम्परिक थॉब पहने पुरुष दिखाई देते थे.
लेक सक्सैस में बैठकों की रिकॉर्डिंग की जाती थी और उनका प्रसारण दुनिया भर में किया जाता था. यह वैश्विक प्रसारण इतिहास में एक अभूतपूर्व क्षण था.
संयुक्त राष्ट्र रेडियो की स्थापना वर्ष 1946 में हुई थी. इसके शुरुआती साक्षात्कारों में से एक साक्षात्कार, अमेरिका की प्रतिनिधि और पूर्व प्रथम महिला एलेनॉर रूज़वेल्ट का भी था, जिन्होंने मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई.
हर वर्ष 13 फ़रवरी को विश्व रेडियो दिवस मनाया जाता है. यही वह दिन है, जब 80 साल पहले संयुक्त राष्ट्र रेडियो से पहली बार प्रसारण किया गया था.
जल्द ही संयुक्त राष्ट्र को और अधिक जगह की ज़रूरत पड़ी. इसके बाद महासभा की बैठकें आयोजित करने के लिए, न्यूयॉर्क के क्वींस इलाक़े में फ़्लशिंग मैडोज़ स्थित, एक पूर्व विश्व मेला स्थल को चुना गया. इस बीच, सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र की अन्य गतिविधियाँ लेक सक्सैस में ही जारी रहीं.
फ़्लशिंग मैडोज़ में काफ़ी ठंड और तेज़ हवाएँ चलती थीं, और इसका असर साफ़ दिखाई देता था. प्रतिनिधि अक्सर इमारत के भीतर भी कोट पहने रहते थे. एक परिचारक गद्देदार मैंडरिन कोट में दिखाई दिया, जबकि भारतीय प्रतिनिधियों ने अपनी साड़ियों के ऊपर ऊनी शॉल ओढ़ रखे थे.
(यहाँ संयुक्त राष्ट्र का एक कर्मचारी फ़्लशिंग मैडोज़ में आयोजित महासभा की एक बैठक में भाग लेने वाले देशों के लिए नाम-पट्टिका तैयार कर रहा है.)
सर्दी - ज़ुकाम के कई मामलों के उपचार के लिए संयुक्त राष्ट्र की एक नर्स भी तैनात रहती थीं. इससे पता चलता है कि वैश्विक कूटनीति को भी न्यूयॉर्क की ठंड का सामना करना पड़ता था.
इस ठंड के बावजूद, महासचिव ट्रिग्वे ली ने इस इमारत और उसके आसपास के पार्क को संयुक्त राष्ट्र और उसके मेज़बान शहर के बीच दोस्ती की गर्मजोशी का एक सशक्त प्रतीक बताया.
एक स्केटिंग एरीना स्थल को महासभा कक्ष में तब्दील कर दिया गया था, और वहाँ वर्ष 1950 तक बैठकें होती रहीं. तब तक संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों की संख्या बढ़कर 60 हो चुकी थी. (आज यह संख्या 193 है).
इतने बड़े पैमाने पर अन्तरराष्ट्रीय बैठकों का आयोजन पहले कभी नहीं देखा गया था. इसकी ज़िम्मेदारी संयुक्त राष्ट्र सचिवालय के कर्मचारियों पर थी. यही संगठन का प्रशासनिक और कार्यकारी निकाय है, जो उसके कामकाज को सुचारू रूप से चलाता है.
पर्दे के पीछे, संचार और जनसम्पर्क से जुड़े सैकड़ों अधिकारी यह सुनिश्चित करने में सक्रिय रहते थे कि महासभा और सुरक्षा परिषद में जिन मुद्दों पर बहस हो रही है, वे ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचें.
बैठकों की शब्दशः रिपोर्टें प्रैस अधिकारियों द्वारा अंग्रेज़ी और फ़्रेंच भाषाओं में तैयार की जाती थीं
इसी दौरान, फ़्लशिंग मैडोज़ से काम जारी रखते हुए संयुक्त राष्ट्र के स्थाई मुख्यालय के लिए जगह तलाश करने की कोशिशें भी तेज़ कर दी गईं.
(यहाँ, उस समय के संयुक्त राष्ट्र महासचिव ट्रिग्वे ली (बीच में), जॉन डी रॉकफ़ेलर (दाएँ) जूनियर से यह अनुदान स्वीकार करते हुए दिखाई दे रहे हैं. इस अवसर पर न्यूयॉर्क सिटी के मेयर विलियम ओ’ड्वायर भी मौजूद थे.)
इस दौड़ में न्यूयॉर्क सिटी को बोस्टन, फ़िलाडेल्फ़िया, सैन फ़्रांसिस्को, कनैक्टिकट प्रान्तों की फ़ेयरफ़ील्ड काउंटी और न्यूयॉर्क प्रान्त की वेस्टचेस्टर काउंटी से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही थी.
अमेरिकी उद्योगपति और उस समय दुनिया के सम्भवतः सबसे धनी व्यक्ति जॉन डी रॉकफ़ेलर की ओर से दिए गए 85 लाख डॉलर के अनुदान से, मैनहैटन में ईस्ट रिवर के किनारे स्थित 17 एकड़ का वह भूखंड ख़रीदा गया, जहाँ आज संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय की भव्य इमारत स्थित है.
उस स्थल को साफ़ करने का काम शुरू हुआ, जो करीब 300 वर्ष पहले तम्बाकू का खेत हुआ करता था, लेकिन बाद के वर्षों में वहाँ मांस प्रसंस्करण के गोदाम बन गए थे.
संयुक्त राष्ट्र रेडियो के एक संवाददाता ने वहाँ जाकर एक राहगीर से बात की.
उन्होंने पूछा, “यहाँ आपको सबसे दिलचस्प क्या लग रहा है?”
राहगीर ने जवाब दिया, “नीचे ये लोग जो गड्ढा खोद रहे हैं, वही मुझे सबसे दिलचस्प लग रहा है.”
संवाददाता ने फिर पूछा, “एक न्यूयॉर्क वासी, एक अमेरिकी, और संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों में से एक से जुड़े व्यक्ति के रूप में, इस पूरी प्रक्रिया को लेकर आपकी सच्ची भावना क्या है?”
राहगीर ने कहा, “मुझे लगता है, यह बहुत शानदार है. अगर संयुक्त राष्ट्र सफल होता है, तो यह हमारे साथ हुई सबसे अदभुत बात होगी.”
संवाददाता ने कहा, “मैंने देखा कि आपने अपनी बात में एक शर्त भी जोड़ी. आपको क्या लगता है, ऐसी कौन-सी बात है जो इसे सफल होने से रोक सकती है?”
राहगीर ने उत्तर दिया, “सिर्फ़ हम, सिर्फ़ लोग.”
संवाददाता ने कहा, “यह अब तक का सबसे अच्छा जवाब है, जो मुझे मिला है.”
मैनहैटन में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के निर्माण में लगभग तीन वर्ष लगे. इस परियोजना का नेतृत्व विश्व प्रसिद्ध वास्तुकारों की एक अन्तरराष्ट्रीय टीम ने किया था, जिसमें ले कोर्बुज़िए और ऑस्कर निमेयर शामिल थे.
वर्ष 1951 में इस इमारत में कर्मचारियों का आना शुरू हुआ, और 1952 में निर्माण पूरा होने तक वहाँ लगभग 3,000 लोगों के लिए दफ़्तर की जगह उपलब्ध हो चुकी थी.
न्यूयॉर्क सिटी के साथ संयुक्त राष्ट्र का रिश्ता अब 80 वर्षों का हो चुका है. इतिहासकार क्रिस मैकनिक्ल का कहना है कि उन्हें “इसमें कोई सन्देह नहीं है कि संयुक्त राष्ट्र वहीं स्थित है, जहाँ उसे होना चाहिए.”
उन्होंने कहा, “न्यूयॉर्क सिटी दुनिया का महान आप्रवासी शहर है. यह इस शहर का एक सन्देश है कि जीवन के हर क्षेत्र से, दुनिया के हर हिस्से से, हर नस्ल, हर रंग, हर आस्था और हर धर्म के लोग यहाँ साथ मिलकर काम कर सकते हैं और साथ रह सकते हैं. और मुझे लगता है कि यह बात आज भी उतनी ही सच है.”
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संयुक्त राज्य अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र का एक संस्थापक सदस्य होने के साथ-साथ, इस संगठन की परिकल्पना और उसे वास्तविक रूप देने की प्रक्रिया में भी एक प्रमुख प्रेरक शक्ति था.
संयुक्त राष्ट्र परिसर के विकास के लिए ज़िम्मेदार समिति के अध्यक्ष और अमेरिका के राजदूत वॉरेन आर ऑस्टिन ने कहा था, “संयुक्त राष्ट्र उन सिद्धान्तों पर आधारित है, जो किसी भी इमारत के इस्पात और पत्थर से कहीं अधिक समय तक टिके रहेंगे. संयुक्त राष्ट्र, ईश्वर के विधान के अधीन, समस्याओं के समाधान और दुनिया के लोगों को एकजुट करने के लिए मनुष्य द्वारा बनाया गया सबसे प्रमुख साधन है.”
यह फ़ीचर किस तरह तैयार किया गया?
यूएन न्यूज़ ने न्यूयॉर्क सिटी और उसके आसपास उन स्थानों का दौरा किया, जहाँ मैनहैटन में स्थाई मुख्यालय बनने से पहले संयुक्त राष्ट्र ने काम किया था.
यह दौरा संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक टूर गाइडों के करियर विकास कार्यक्रम के तहत, एक यूएन अभिलेखागार विशेषज्ञ के सहयोग से आयोजित किया गया था.
इस फ़ीचर को तैयार करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के समृद्ध ऑडियो-विज़ुअल अभिलेखागार को खंगाला गया, जिसमें संगठन की स्थापना के पहले दिन से जुड़े ऐतिहासिक रिकॉर्ड सुरक्षित हैं.
शुरुआती बैठकों की रिकॉर्डिंग, यूएन रेडियो संवाददाताओं की रिपोर्ट और यूएन फ़ोटो द्वारा उपलब्ध कराई गई तस्वीरों का भी उपयोग किया गया.