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नस्लीय भेदभाव को उखाड़ फेंकने के लिए, एकजुटता व राजनैतिक इच्छाशक्ति का आहवान

प्रदर्शनकारियों ने एक रैली में नारे लिए हैं, जिनमें एक प्रमुख नारे पर नीले और लाल अक्षरों में 'HATRED IS VIRUS' लिखा है।
© Unsplash/Jason Leung नस्लीय भेदभाव के विरोध में आयोजित रैली के लिए जुटे लोग.

नस्लीय भेदभाव को उखाड़ फेंकने के लिए, एकजुटता व राजनैतिक इच्छाशक्ति का आहवान

मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारियों ने 'नस्लीय भेदभाव के उन्मूलन के लिए अन्तरराष्ट्रीय दिवस' के सिलसिले में, सोमवार को न्यूयॉर्क मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में न्याय व समानता के लिए निरन्तर प्रयास करने का अपना संकल्प दोहराया है.

यह दिवस, हर वर्ष 21 मार्च को मनाया जाता है. लगभग 7 दशक पहले, दक्षिण अफ़्रीका के ‘शार्पविल’ इलाक़े में रंगभेदी क़ानूनों का विरोध करने के लिए शान्तिपूर्ण प्रदर्शनकारी एकत्र हुए थे, मगर स्थानीय पुलिस ने उन पर गोलीबारी की जिनमें 69 लोग मारे गए.

यूएन महासभा की प्रमुख ऐनालेना बेयरबॉक ने अपने सम्बोधन में कहा कि 21 मार्च 1960 को शार्पविल पुलिस स्टेशन के बाहर एकत्र होने वाली भीड़ के पास हथियार नहीं, बल्कि संकल्प था.

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“समाज को विभाजित करने के लिए नहीं, बल्कि उसमें अपनी गरिमा को हासिल करने का.”

महासभा अध्यक्ष ने जनरल असेम्बली हॉल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहा कि इस अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर यह वार्षिक स्मरण समारोह, केवल उसी कुख्यात घटना तक सीमित नहीं है, चूँकि दुनिया के हर कोने में नस्लवाद अब भी स्पष्टता से मौजूद है.

“अक्सर यह खुले तौर पर है और अश्लील है, कभी दूसरे पर भद्दे तंज़ कसे जाते हैं या फिर दीवार पर चित्र बना दिए जाते हैं. अक्सर यह शान्ति व छिपा हुआ है, लालफ़ीताशाही और साधारण से माहौल में छिपा हुआ.”

“मगर, चाहे ये ऊँची आवाज़ में हो या फिर ख़ामोश, यह हानिकारक है, क्षति पहुँचाने वाला है और इसके नतीजे व्यक्तियों से कहीं दूर तक जाते हैं.”

नीतियों पर लड़खड़ाती सरकारें

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अपने सम्बोधन में सचेत किया कि नस्लवाद, हर किसी को नुक़सान पहुँचाता है.

यह दासता, औपनिवेशवाद और उत्पीड़न के भयावह नतीजों में अब भी मौजूद है. नस्लवाद, आज भी आर्थिक व राजनैतिक असमानताओं , भेदभावपूर्ण नीतियों व प्रथाओं समेत उन समस्याओं को बढ़ावा देता है, जोकि हमारे सामने मौजूद हैं.

यूएन प्रमुख ने आगाह किया कि इनसे निपटने के लिए जिन समाधानों को तैयार किया गया है, उन्हें कुछ सरकारें नस्लवाद विरोधी नीतियों को तार-तार करके कमज़ोर बना रही हैं और उनके नेता इतिहास को फिर से गढ़ने में लगे हैं. 

उन्होंने चिन्ता जताई कि नस्लवाद और विदेशियों के प्रति नापसन्दगी व भय को डिजिटल प्लैटफ़ॉर्म और राजनैतिक चर्चाओं में जगह मिल रही है.

“हमें पता है कि यह सड़क कहाँ ले जाती है: अन्याय, हिंसा और उससे भी बदतरीन स्थिति को आगे बढ़ाने के लिए.”

न्याय, मानवाधिकार व साहस

इसके मद्देनज़र, यूएन प्रमुख ने एकजुटता को एक अहम समाधान क़रार देते हुए कहा कि सरकारों, संस्थाओं, व्यवसायों और समुदायों को एक साथ मिलकर प्रयास करने होंगे, ताकि हर एक व्यक्ति के लिए गरिमा, न्याय, समानता व अधिकारों को सुनिश्चित किया जा सके.

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने राजनैतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए कहा कि ऐसे क़ानूनों के ज़रिए भेदभाव से लड़ना होगा, जिन्हें मज़बूती से लागू किया जाए और जिनमें सभी प्रकार के नस्लीय भेदभाव व घृणा के सभी रूपों की जवाबदेही तय की जा सके.

उन्होंने सचेत किया कि नस्लवादी-विरोधी होने का अर्थ, किसी एक समूह के साथ खड़े होने या दूसरे के विरोध में खड़ा होना नहीं है. इसका अर्थ है, मानवाधिकारों और न्याय के पक्ष में खड़ा होना, सभी के लिए.