लेबनान: हिंसक टकराव के बीच विस्थापन जारी, स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ता दबाव
मध्य पूर्व क्षेत्र में भड़के युद्ध के बीच, लेबनान में हिज़बुल्लाह के रॉकेट हमलों और उनके जवाब में इसराइली सैन्य कार्रवाई से अब तक लगभग 3 लाख बच्चों समेत 10 लाख लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं, जिन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भीड़भाड़ वाले आश्रय स्थलों पर शरण ली है. स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों व बुनियादी ढाँचों पर हमलों के बीच, यूएन सहायता एजेंसियाँ ज़रूरतमन्द आबादी तक मानवीय राहत पहुँचाने में जुटी हैं.
यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय के अनुसार, 2 मार्च के बाद से अब तक, लेबनान में हिज़बुल्लाह द्वारा इसराइल पर किए गए रॉकेट हमलों के जवाब में, इसराइली सैन्य बलों ने देश के विभिन्न हिस्सों में कार्रवाई की है, जिनमें 111 बच्चों समेत कम से कम 886 लोग मारे गए हैं.
लेबनान में संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष मानवीय सहायता अधिकारी इमरान रिज़ा ने बताया कि देश में 1,500 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र, इसराइल द्वारा स्थान छोड़कर जाने के आदेशों से प्रभावित हुआ है. ये निर्देश दक्षिणी लेबनान, राजधानी बेरूत के दक्षिण में स्थित बाहरी इलाक़ों और बेका के कुछ हिस्सों के लिए जारी किए गए हैं.
यूएन मानवतावादाी कार्यालय ने बताया है कि लड़ाई के कारण अब तक 10 लाख लोग बेघर हो चुके हैं. इनमें लगभग 2.9 लाख बच्चे हैं. बड़ी संख्या में लोग भीड़भाड़ और असुरक्षित परिस्थितियों में रहने व सोने के लिए मजबूर हैं.
स्वास्थ्य सेवाएँ भारी दबाव में हैं, जबकि स्कूलों के आश्रय स्थलों में तब्दील होने की वजह से बच्चों की शिक्षा ठप हो गई है.
इसराइली हवाई हमलों के बीच, अनेक परिवार कुछ ही मिनटों के भीतर उस समय पहने हुए अपने कपड़ों में ही घर से भागने के लिए मजबूर हुए थे.
मगर, सड़कों पर गाड़ियों व लोगों की क़तार थीं, और यातायात ठप होने की वजह से उन्हें बाहर ही कई घंटे बिताने पड़े, जबकि उनके इर्दगिर्द विस्फोट हो रहे थे.
इसराइली हमलों में सैकड़ों घरों और बुनियादी प्रतिष्ठानों को गहरी क्षति पहुँची है, जिनमें स्वास्थ्य देखभाल केन्द्र भी हैं.
वहीं, हिज़बुल्लाह लड़ाकों ने इसराइल पर ताबड़तोड़ रॉकेट हमले किए हैं, जिनमें आम इसराइली नागरिक घायल हुए हैं और रिहायशी इमारतों, नागरिक प्रतिष्ठानों को क्षति पहुँची है.
स्वास्थ्य प्रणाली पर बोझ
दक्षिणी लेबनान, बेरूत का दक्षिणी बाहरी इलाक़े, और बेका क्षेत्र में हवाई हमले और बमबारी जारी है, जिसकी वजह से बड़ी संख्या में लोग हताहत और विस्थापित हुए हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2 मार्च के बाद से अब तक 3 हज़ार से अधिक लोग हताहत हुए हैं: 850 मौतें हुई हैं और 2,100 घायल हुए हैं, जिनमें क़रीब 15 प्रतिशत बच्चे हैं.
अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा दबाव है, 5 अस्पतालों और कई अन्य प्राथमिक देखभाल केन्द्रों को बन्द कर दिया गया है.
हमलों की वजह से अहम बुनियादी ढाँचे को भी क्षति पहुँची है, जिनमें सड़क व पुल हैं, जिससे अति-आवश्यक सेवाओं तक पहुँच और मानवीय सहायता की आपूर्ति के प्रति चिन्ताएँ भी उपजी हैं.
बच्चों पर भीषण असर
लेबनान में यूनीसेफ़ में पैरोकारी व संचार मामलों के प्रमुख क्रिस्टोफ़ बुलिऐरक ने बताया कि पिछले कई वर्षों से जारी संकटों की वजह से अनेक युवाओं व बच्चों में गम्भीर बेचैनी के लक्षण दिखाई दे रहे हैं.
2-9 मार्च की अवधि में, हिंसक टकराव के पहले सप्ताह के दौरान, इसराइल ने हिज़बुल्लाह के रॉकेट हमलों के जवाब में हवाई हमले शुरू किए, जिनमें हर दिन औसतन 10 बच्चों की जान जा रही थी और 36 घायल हो रहे थे.
अभी तक 107 युवाओं की जान गई है और 331 घायल हुए हैं, जिनमें कुछ की स्थिति बहुत गम्भीर है. देश भर के बच्चों में भय और घबराहट व्याप्त है.
सहायता प्रयासों में तेज़ी
विस्थापितों की बढ़ती संख्या के बीच, लेबनान में मानवीय सहायता एजेंसियाँ अपने मानवतावादी प्रयासों का दायरा बढ़ा रही हैं.
यूएन ने अपने साझेदार संगठनों के साथ मिलकर 11 लाख गर्म आहार, खाने के लिए तैयार 38 हज़ार खाद्य किट के साथ-साथ, जान बचाकर भागने वाले परिवारों के लिए आश्रय, स्वच्छता सामग्री और लाखों लीटर स्वच्छ जल की व्यवस्था की है.
यूएन एजेंसियों ने स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों पर हमलों पर चिन्ता व्यक्त करते हुए मेडिकल कर्मचारियों समेत आम नागरिकों की रक्षा किए जाने का आग्रह किया है. हाल ही में हुए एक हमले में एक चिकित्सा सहायकर्मी की मौत हो गई थी.
‘ब्लू लाइन’ पर तनाव
लेबनान में यूएन अन्तरिम बल (UNIFIL) के अनुसार, उत्तरी इसराइल और दक्षिणी लेबनान को अलग करने वाली रेखा, ‘ब्लू लाइन’ के इर्दगिर्द रॉकेट, मिसाइल हमले, गोलाबारी और हवाई हमले जारी हैं.
यूएन शान्तिरक्षा मिशन के अनुसार, ब्लू लाइन के उत्तर में इसराइली सैन्य बलों का जमाव हो रहा है. बड़ी संख्या में सैन्य वाहन, बख़्तरबन्द गाड़ियाँ और टैंक जमा हो रहे हैं.