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डब्ल्यूएचओ की टीम 9 मार्च, 2026 को लेबनान के बेरूत में डेकवानह तकनीकी संस्थान में कैरिटास लेबनान द्वारा संचालित नीले तम्बू और अंदर के लोगों के साथ अस्थायी आश्रय का निरीक्षण करती है।

मध्य पूर्व में सहायता अभियान दबाव में, खाद्य सहायता के लिए 20 करोड़ डॉलर की ज़रूरत

© WHO
लेबनान की राजधानी बेरूत के एक कॉलेज परिसर में लगाए गए तम्बू, संघर्ष के कारण विस्थापित लोगों को अस्थाई आश्रय दे रहे हैं.

मध्य पूर्व में सहायता अभियान दबाव में, खाद्य सहायता के लिए 20 करोड़ डॉलर की ज़रूरत

मानवीय सहायता

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने चेतावनी दी है कि खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में उछालबढ़ते विस्थापन और सहायता आपूर्ति मार्गों में रुकावटों की वजह से, मध्य पूर्व क्षेत्र में लाखों लोगों पर भूख की चपेट में आने का जोखिम गहरा रहा है. यूएन एजेंसी का कहना है कि बढ़ती ज़रूरतों के बीच मानवीय राहत व्यवस्था पर भारी दबाव है.

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के मध्य पूर्व, उत्तर अफ़्रीका और पूर्वी योरोप क्षेत्र के निदेशक सामेर अब्देलजबेर ने यूएन न्यूज़ को बताया कि संयुक्त राष्ट्र एजेंसी अफ़ग़ानिस्तान के अलावा, इस क्षेत्र के लगभग 10 देशों में खाद्य सहायता अभियान जारी रखने के लिए काम कर रही है.

प्रारम्भिक आकलन के अनुसार, अगले तीन महीनों में मानवीय राहत अभियानों को जारी रखने के लिए लगभग 20 करोड़ डॉलर की ज़रूरत होगी.

सामेर अब्देलजबेर ने कहा, “इस संकट से पहले भी मध्य पूर्व में खाद्य सुरक्षा की स्थिति कठिन थी, और हाल के घटनाक्रमों ने इसे और बदतर बना दिया है.”

जटिल चुनौतियाँ

यह क्षेत्र आर्थिक कमज़ोरी, संघर्ष और आपूर्ति में रुकावट जैसी कई गम्भीर चुनौतियों से जूझ रहा है, जिनका सीधा असर खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और क़ीमतों पर पड़ रहा है. भू-राजनैतिक तनाव और ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ तथा लाल सागर जैसे अहम समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिमों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृँखलाओं पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है. ये दोनों मार्ग ऊर्जा, उर्वरक और समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं.

सामेर अब्देलजबेर ने कहा कि इन मार्गों में किसी भी रुकावट का असर वैश्विक बाज़ारों तक पहुँचता है. “इस अहम मार्ग में किसी भी रुकावट से आपूर्ति घटती है, कृषि उत्पादन कम होता है और दुनिया भर में खाद्य पदार्थों की क़ीमतें बढ़ जाती हैं.” 

उन्होंने कहा कि तेल की बढ़ती क़ीमतें पहले ही दुनिया भर में परिवहन और ईंधन की लागत बढ़ा रही हैं.

ग़ाज़ा में आटे की क़ीमत 270 % बढ़ी

मध्य पूर्व में उपजे संकट का असर पहले से ही चुनौतियों से जूझ रहे इलाक़ों में दिखाई दे रहा है.

ग़ाज़ा पट्टी में विश्व खाद्य कार्यक्रम हर महीने लगभग 16 लाख लोगों तक खाद्य सहायता पहुँचाने की कोशिश कर रहा है. लेकिन 28 फ़रवरी को हालात बिगड़ने के बाद सीमा पार मार्ग बन्द होने से स्थानीय बाज़ार में खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में तेज़ बढ़ोतरी हुई.

सामेर अब्देलजबेर ने कहा, “ग़ाज़ा के स्थानीय बाज़ार में आटे की क़ीमत 270 प्रतिशत बढ़ गई है... जब सीमा पार मार्ग कुछ दिनों के लिए भी बन्द हो जाते हैं, तो हमें लोगों को दी जाने वाली खाद्य सहायता घटानी पड़ती है.”

पिछले वर्ष, अक्टूबर में इसराइल और हमास के बीच युद्धविराम के बाद, विश्व खाद्य कार्यक्रम ज़रूरतमन्द लोगों को उनकी पूरी खाद्य ज़रूरत के बराबर सहायता दे पा रहा था. लेकिन मौजूदा हालात में एजेंसी को इस मदद में भारी कटौती करनी पड़ सकती है.

उन्होंने कहा, “अब हमें यह सोचने पर मजबूर होना पड़ रहा है कि इस सहायता को घटाकर किसी व्यक्ति की ज़रूरत का केवल लगभग 25 प्रतिशत ही दिया जाए.” क्षेत्र के दूसरे हिस्सों में भी बड़े पैमाने पर हुआ विस्थापन, मानवीय राहत अभियानों पर दबाव बढ़ा रहा है.

नारंगी सुरक्षा जैकेट पहने एक गोदाम कार्यकर्ता प्लास्टिक में लिपटे आपातकालीन आपूर्ति से भरा एक पैलेट जैक खींचता है। बक्से यूरोपीय संघ के झंडे को चित्रित करते हैं। पृष्ठभूमि में आपूर्ति और एक फोर्कलिफ्ट के ढेर से भरा एक बड़ा गोदाम दिखाया गया है।
© UNICEF/Charles Asamoah
डेनमार्क में यूनीसेफ़ के गोदाम में एक सहायताकर्मी, लेबनान भेजी जाने वाली राहत सामग्री तैयार कर रहा है.

लेबनान और सीरिया

लेबनान में 8 लाख 15 हज़ार से अधिक लोग देश के भीतर ही विस्थापित हुए हैं. इनमें से कई लोग दक्षिणी इलाक़ों या बेरूत के दक्षिणी उपनगरों से निकलकर दूसरे क्षेत्रों या अस्थाई आश्रयों में पहुँचे हैं. 

देश भर में लगभग 580 आश्रय स्थल बनाए गए हैं, जिनमें से 215 को विश्व खाद्य कार्यक्रम का समर्थन मिल रहा है.

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इन आश्रय स्थलों में लगभग 52 हज़ार लोगों को हर दिन खाद्य सहायता दी जा रही है, जबकि 1 लाख 80 हज़ार लोगों को अपनी बुनियादी ज़रूरतें पूरी करने के लिए नक़द सहायता मिल रही है.

इस क्षेत्रीय संकट के कारण सीमापार आवाजाही भी बढ़ी है. लेबनान से लगभग 84 हज़ार सीरियाई शरणार्थी सीरिया लौट गए हैं, जबकि लगभग 9 हज़ार लेबनानी नागरिक सुरक्षा और सहायता की तलाश में सीरिया पहुँचे हैं.

सामेर अब्देलजबेर ने कहा, “इन लोगों को सीरिया के भीतर भी सहायता की ज़रूरत है.”

अधिक धनराशि की ज़रूरत

बढ़ती ज़रूरतों के बावजूद, मानवीय सहायता एजेंसियाँ धन की गम्भीर कमी से जूझ रही हैं, जिसके कारण उन्हें कठिन फ़ैसले लेने पड़ रहे हैं.

रमदान के दौरान, विश्व खाद्य कार्यक्रम ने घोषणा की कि धन की कमी के कारण उसे जॉर्डन में लगभग 1 लाख 35 हज़ार सीरियाई शरणार्थियों के लिए सहायता रोकनी पड़ी. 

मिस्र में भी 2 लाख 50 हज़ार सूडानी शरणार्थियों के लिए सहायता बन्द करनी पड़ी है.

सामेर अब्देलजबेर ने कहा, “इसीलिए हमें अधिक धनराशि की आवश्यकता है, ताकि उन ज़रूरतों को पूरा किया जा सके जो इस संकट से पहले भी मौजूद थीं और इसके शुरू होने के बाद कई गुना बढ़ गई हैं.”

ईरान में यह कार्यक्रम इस समय शिविरों में रह रहे लगभग 33 हज़ार अफ़ग़ान शरणार्थियों की मदद कर रहा है. लेकिन विश्व खाद्य कार्यक्रम के अनुसार मेज़बान समुदायों में रह रहे कुछ अफ़ग़ान अब इन शिविरों में आने लगे हैं, जिससे मानवीय सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है.

कमज़ोर समुदायों पर असर

सीधी सहायता के अलावा, बढ़ती वैश्विक क़ीमतें कमज़ोर समुदायों की ख़रीद क्षमता भी घटा रही हैं.

“किसी भी देश में जब ईंधन की क़ीमत बढ़ती है, तो रोटी की क़ीमत तुरन्त बढ़ जाती है और परिवहन का ख़र्च भी बढ़ जाता है... ऐसे में जब हम लोगों को नक़द सहायता देते हैं, तो वह धन ऐसे बाज़ारों में ख़र्च होता है, जहाँ क़ीमतें पहले ही बढ़ चुकी होती हैं. इससे उनकी ख़रीद क्षमता घट जाती है.”

विश्व खाद्य कार्यक्रम ने तेज़ी से बढ़ती मानवीय ज़रूरतों के बीच, सरकारों, दानदाताओं और निजी क्षेत्र से सहायता बढ़ाने की अपील की है.

सामेर अब्देलजबेर ने कहा, “हम मानते हैं कि आशावादी बने रहना और सक्रिय रूप से काम करना ज़रूरी है.” 

“हम सदस्य देशों, दानदाताओं और निजी क्षेत्र के साथ काम कर रहे हैं, इस उम्मीद में कि इस कठिन स्थिति में लोगों की मदद के लिए ज़रूरी धनराशि जुटाई जा सकेगी.”

चुनौतियों के बावजूद, पूरे क्षेत्र में विश्व खाद्य कार्यक्रम के कर्मचारी कठिन परिस्थितियों में अपना काम जारी रखे हुए हैं.