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सुरक्षा परिषद में पारित हुआ बहरीन का प्रस्ताव, ईरान द्वारा किए गए हमलों की निन्दा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक औपचारिक राजनयिक बैठक, जिसमें प्रतिनिधि एक बड़े अंडाकार मेज के चारों ओर बैठे हैं और दर्शकों में पर्यवेक्षक हैं।
UN Photo/Eskinder Debebe मध्य पूर्व की स्थिति पर सुरक्षा परिषद की बैठक. (फ़ाइल)

सुरक्षा परिषद में पारित हुआ बहरीन का प्रस्ताव, ईरान द्वारा किए गए हमलों की निन्दा

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बुधवार को मध्य पूर्व में व्याप्त संकट के विषय में बहरीन द्वारा पेश किए गए एक प्रस्ताव को पारित किया है, जिसमें इस क्षेत्र में स्थित देशों पर, ईरान के हमलों की निन्दा की गई है और उन्हें तुरन्त रोके जाने की मांग की गई है.

28 फ़रवरी को ईरान पर इसराइली व अमेरिकी हवाई हमलों और उसके बाद ईरान की पड़ोसी देशों पर जवाबी कार्रवाई से भड़के भीषण टकराव ने मध्य पूर्व क्षेत्र के अनेक देशों को अपनी चपेट में ले लिया है.

बुधवार को 15 सदस्य देशों वाली सुरक्षा परिषद में 13 देशों ने बहरीन के प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि चीन और रूस ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया. 

वहीं, बुधवार को मध्य पूर्व संकट पर रूस की ओर से एक दूसरा प्रस्ताव पेश किया गया, मगर पर्याप्त वोट नहीं मिल पाने की वजह से वह पारित हो पाने में विफल रहा. इसके पक्ष में 4 वोट डाले गए, विरोध में 2 मत थे, जबकि 9 सदस्य देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया.

सुरक्षा परिषद में किसी प्रस्ताव के पारित होने के लिए उसके पक्ष में कम से कम 9 वोट मिलना ज़रूरी हैं, और साथ ही 5 स्थाई सदस्यों में से किसी के भी द्वारा वीटो अधिकार का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए.

मध्य पूर्व में गहराते संकट पर बुधवार को सुरक्षा परिषद की दूसरी बैठक में पारित हुए और बहरीन द्वारा लाए गए प्रस्ताव के मसौदे में: 

  • ईरान द्वारा बहरीन, कुवैत, ओमान, क़तर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन में किए गए “जघन्य हमलों की कठोरतम शब्दों” में निन्दा की गई है.
     
  • इन देशों की क्षेत्रीय अखंडता, सम्प्रभुता और राजनैतिक स्वतंत्रता के लिए समर्थन किया गया है.
     
  • रिहायशी इलाक़ों पर हमलों और नागरिक प्रतिष्ठानों को हमला किए जाने की निन्दा की गई है और ऐसे कृत्यों को अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का हनन व अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा के लिए एक गम्भीर ख़तरा बताया गया है.  
     
  • ईरान द्वारा इन सभी देशों पर किए गए हमलों पर तुरन्त, बिना किसी शर्त के तुरन्त रोके जाने का आग्रह किया गया है.
     
  • ईरान से अन्तरराष्ट्रीय क़ानून व मानवतावादी क़ानून के तहत तयशुदा दायित्वों को पूर्ण रूप से निभाने का आग्रह किया गया है, विशेष रूप से युद्धक टकराव के दौरान आम नागरिकों व नागरिक प्रतिष्ठानों की रक्षा के लिए.
     
  • महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर व्यापारिक व कमर्शियल जहाज़ों की आवाजाही के अधिकारों व स्वतंत्रता को भी सुनिश्चित किए जाने पर बल दिया गया है. साथ ही, ध्यान दिलाया गया है कि अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत, सदस्य देशों के पास अपने जहाज़ों को हमलों व उकसावेपूर्ण कार्रवाई से बचाने का अधिकार है.

इस प्रस्ताव के मसौदे को खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्यों – बहरीन, कुवैत, ओमान, क़तर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात – के साथ-साथ जॉर्डन की ओर से बहरीन ने सुरक्षा परिषद में रखा. 

संयुक्त राष्ट्र के 130 सदस्य देशों ने इसे सह-प्रायोजित किया था.