अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर यूएन मुख्यालय में विशेष कार्यक्रम, मुख्य झलकियाँ
अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर न्यूयॉर्क में यूएन मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में नेताओं, महिलाधिकार पैरोकारों और युवा कार्यकर्ताओं ने विश्व भर में महिलाओं व लड़कियों के लिए न्याय व समान अधिकारों के पक्ष में आवाज़ बुलन्द की है. यूएन महासभा में हुए इस कार्यक्रम में हॉलीवुड अभिनेत्री ऐन हैथवे, नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला युसूफ़ज़ई और गायिका मिशेल विलियम्स समेत अन्य हस्तियों ने शिरकत की.
8 मार्च को मनाए जाने वाले अन्तरराष्ट्रीय दिवस की थीम में, इस वर्ष 'अधिकार, न्याय व कार्रवाई' पर ध्यान केन्द्रित किया गया है.
इस कार्यक्रम के दौरान, ग्रैमी पुरस्कार विजेता गायिका और ब्रॉडवे कलाकार मिशेल विलियम्स ने मंच पर प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को यादगार बना दिया. उन्होंने अपने प्रसिद्ध गाने, 'हम निडर हैं' (We Are Fearless) को गाकर, दुनिया भर में महिलाओं व लड़कियों की शक्ति, संकल्प व सहनसक्षमता को श्रृद्धांजलि अर्पित की.
पूर्वाग्रह अब भी मौजूद
यूएन महासभा अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज भी महिला नेताओं को अनेक प्रकार की रूढ़ियों और पूर्वाग्रहों का सामना करना पड़ता है. अक्सर महिला नेताओं को “बहुत भावुक” या “अत्यधिक महत्वाकाँक्षी” जैसे विशेषणों से देखा जाता है. इसके साथ ही उनके नेतृत्व के तरीके़ और पहनावे तक पर अनावश्यक टिप्पणियाँ की जाती हैं.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि उपलब्ध तथ्य स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि जब महिलाओं और लड़कियों को सशक्त बनाया जाता है, तो समाज को व्यापक लाभ मिलता है.
"जब लड़कियाँ शिक्षा प्राप्त करती हैं तो अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ती है, जब महिलाएँ कार्यबल में शामिल होती हैं तो उत्पादकता बढ़ती है, और जब शान्ति वार्ताओं में महिलाएँ शामिल होती हैं तो शान्ति समझौते अधिक समय तक टिकाऊ साबित होते हैं.”
उन्होंने महिलाओं से समाज में फैली धारणाओं को बदलने का आह्वान करते हुए कहा, “महिलाओं, अब समय आ गया है कि हम इस सोच को बदलें. आज हम ‘एक महिला की तरह’ होने के अर्थ को साहस और गर्व के साथ फिर से परिभाषित कर रहे हैं.”
भारतीय राजनयिक हंसा मेहता का योगदान
उन्होंने, भारतीय राजनयिक हंसा मेहता की ऐतिहासिक भूमिका को याद करते हुए कहा कि मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा के मसौदे को तैयार करते समय, उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि उसमें “सभी मनुष्य” शब्दों का प्रयोग हो, न कि केवल “पुरुष”, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सभी मानव समान गरिमा और अधिकारों के साथ जन्म लेते हैं.
ऐनालेना बेयरबॉक ने कहा, “महिलाओं के अधिकार कोई नई अवधारणा नहीं हैं. ये संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के मूल सिद्धान्तों में शामिल हैं.”
उन्होंने तब तक प्रयास जारी रखने पर बल दिया, जब तक अफ़ग़ानिस्तान समेत दुनिया भर में सभी महिलाओं और लड़कियों को समान अधिकार, समान प्रतिनिधित्व और हिंसा से सुरक्षा प्राप्त नहीं हो जाती.
उन्होंने कहा कि महिलाओं की समान भागीदारी केवल राजनीति तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि समाचार कक्षों, कॉरपोरेट बोर्डरूम, सरकारों और स्वयं संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष नेतृत्व में भी सुनिश्चित की जानी चाहिए.
कार्रवाई का आग्रह
यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के शैफ़ द कैबिने कोर्टनी रैट्रे ने उनकी ओर से इस कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए ध्यान दिलाया कि लैंगिक समानता पर प्रगति, महिलाओं की उन अनेक पीढ़ियों की देन है, जिन्होंने अपने सामने मौजूद अवरोधों को स्वीकार करने से मना कर दिया.
महासचिव ने आगाह किया है कि न्याय की सुलभता अब भी असमान है, और यह गहराई तक व्याप्त है. पुरुषों की तुलना में महिलाओं व लड़कियों को आंशिक अधिकार ही हासिल हैं.
“यह क्षण, कार्रवाई की मांग करने का है.” इस क्रम में, उन्होंने भेदभावपूर्ण क़ानूनों को ख़त्म करने, न्याय प्रणालियों को सुदृढ़ बनाने, जवाबदेही तय किए जाने और नेतृत्व व निर्णय-निर्धारण में महिलाओं की पूर्ण भागेदारी सुनिश्चित करने पर बल दिया.
“लैंगिक समता, केवल एक नैतिक अनिवार्यता नहीं है. यह एक अधिक न्यायसंगत, शान्तिपूर्ण व सतत भविष्य को आकार देने के लिए अति-आवश्यक है.”
न्याय, लैंगिक समानता की आधारशिला
महिला सशक्तिकरण के लिए यूएन संस्था (UN Women) की कार्यकारी निदेशक सीमा बहाउस ने कहा कि यह दिवस, उन पीढ़ियों की महिलाओं को सम्मान देने का अवसर है, जिनके साहस और दृढ़ संकल्प ने दुनिया भर में लैंगिक समानता को आगे बढ़ाया है.
उन्होंने महिलाओं और लड़कियों के नेतृत्व, साहस और संघर्ष की सराहना करते हुए चेतावनी दी कि हाल के समय में महिलाओं के अधिकारों से जुड़ी उपलब्धियों को अनेक स्थानों पर फिर से चुनौती दी जा रही है.
कार्यकारी निदेशक सीमा बहाउस ने कहा, “ऐसी परिस्थितियों में हम पीछे नहीं हटते हैं. हम अपने प्रयासों को और मज़बूत करते हैं, और …और भी ऊँचा उठते हैं.” दुनिया भर में महिलाओं के आन्दोलनों ने, समुदायों और संस्थाओं के स्तर पर जो उपलब्धियाँ हासिल की हैं, उनकी रक्षा और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक संकल्प आवश्यक है.
UN Women की कार्यकारी निदेशक के अनुसार, लैंगिक समानता की वास्तविक स्थापना के लिए न्याय को उसकी मूल आधारशिला बनाना आवश्यक है. आज भी दुनिया भर में अनेक महिलाओं और लड़कियों को क़ानूनी संरक्षण प्राप्त करने में, अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ता है.
सीमा बहाउस ने इस बात पर बल दिया कि भुक्तभोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और समान अधिकारों को लागू करने के लिए न्याय प्रणाली को अधिक मज़बूत बनाना होगा. इसके लिए पर्याप्त वित्तपोषण वाली न्यायिक संस्थाओं और महिला संगठनों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है.
उन्होंने कहा, “समानता हमारी पहुँच में है.”
एक “अजीब और चुनौतीपूर्ण दौर”...
हॉलीवुड अभिनेत्री और यूएन वीमैन की सदभावना दूत ऐन हैथवे ने अपने सम्बोधन में कहा कि आज दुनिया एक “अजीब और चुनौतीपूर्ण दौर” से गुज़र रही है, जहाँ लैंगिक समानता का वादा अब भी अनेक महिलाओं और लड़कियों के लिए वास्तविकता से बहुत दूर है.
“...समानता के वादे और उसके वास्तविक अनुभव के बीच की दूरी आज भी बहुत-सी महिलाओं और लड़कियों के लिए इतनी अधिक है.”
ऐन हैथवे ने कहा, “हम उन महिलाओं के साहस और शक्ति का सम्मान करते हैं जिन्होंने उस दुनिया में कार्रवाई का रास्ता चुना, जहाँ उनसे अक्सर चुप रहने की अपेक्षा की जाती है.”
ऐन हैथवे ने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस को मनाने का अर्थ यह नहीं है कि अन्याय को नकार दिया जाए, बल्कि यह परिवर्तन के लिए फिर से संकल्प व्यक्त करने का अवसर है.
उन्होंने लिंग-आधारित हिंसा का अन्त करने, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास जारी रखने और उन आवाज़ों को मज़बूती देने की पुरज़ोर अपील की, जिन्हें अक्सर अनसुना कर दिया जाता है.
बच्चों के विरूद्ध बढ़ती हिंसा पर चिन्ता
नोबेल शान्ति पुरस्कार विजेता मलाला युसूफ़ज़ई ने अपने सम्बोधन में बच्चों के विरूद्ध बढ़ती हिंसा पर गहरी चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि विश्व के विभिन्न हिस्सों में जारी युद्धों और हिंसा से प्रभावित परिवारों की पीड़ा ने उन्हें बेहद व्यथित कर दिया है.
“आज, मैं यहाँ बेहद दुखी मन से खड़ी हूँ.” उन्होंने, ईरान और ग़ाज़ा समेत अनेक क्षेत्रों में हिंसा से जूझ रहे बच्चों और परिवारों की स्थिति पर क्षोभ जताते हुए कहा कि न्याय को किसी एक स्थान तक सीमित नहीं किया जा सकता.
“सच्चा न्याय वह नहीं हो सकता, जो एक जगह बच्चों की मानवता की रक्षा करे और दूसरी जगह उसे नज़रअन्दाज़ कर दे.” उनके अनुसार, अगर न्याय को मनमुताबिक़ ढंग से लागू किया गया, तो वह न्याय की मूल भावना के विरुद्ध होगा.
मलाला युसूफ़ज़ई ने, अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों पर थोपे गए कठोर प्रतिबन्धों की कड़ी आलोचना की, और ध्यान दिलाया कि वर्ष 2021 में, तालेबान के सत्ता में लौटने के बाद से, अफ़ग़ानिस्तान में लड़कियों के माध्यमिक विद्यालय और विश्वविद्यालय में पढ़ने पर पाबन्दी लगा दी गई है.
इसके साथ ही महिलाओं के काम करने, उनकी स्वतंत्र रूप से आवाजाही और सार्वजनिक जीवन में भागेदारी पर भी व्यापक पाबन्दियाँ लगाई गई हैं. “यह संस्कृति नहीं है, यह धर्म नहीं है. यह अलगाव और प्रभुत्व की एक व्यवस्था है.”
उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं की स्थिति को “लैंगिक रंगभेद (Gender Apartheid)” के रूप में मान्यता देने और इस अन्याय के विरूद्ध ठोस क़दम उठाने की अपील की.
मलाला युसूफ़ज़ई ने, देशों की सरकारों से केवल बयान देने के बजाय ठोस कार्रवाई करने का आह्वान किया और कहा कि महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों की रक्षा केवल भाषणों से नहीं हो सकती. “भाषण लड़कियों की रक्षा नहीं करते, लेकिन क़ानून, जवाबदेही और राजनैतिक साहस ऐसा कर सकते हैं.”
अफ़ग़ान छात्रा और संगीतकार की भावुक अपील
अफ़ग़ान छात्रा और संगीतकार सुनबुल रेहा ने अपने सम्बोधन में महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों को मज़बूती देने की एक भावुक अपील जारी की.
उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं पर थोपी गई पाबन्दियों के प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि “संगीत मेरा जीवन है और एक समय यह अफ़ग़ानिस्तान में फल-फूल रहा था.”
"मुझे पता है कि जब लड़कियों की आवाज़ दबा दी जाती है और अवसर छीन लिए जाते हैं, तो इसका क्या अर्थ होता है.
"मैं इसे स्वयं जी चुकी हूँ."
सुनबुल रेहा ने दुनिया भर की महिलाओं और लड़कियों के सामने शिक्षा तक पहुँच की बाधाओं से लेकर हिंसा और उत्पीड़न जैसी चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया.
उन्होंने चेतावनी दी कि पिछली अनेक पीढ़ियों में हासिल किए गए अधिकार अब कुछ स्थानों पर ख़तरे में हैं.
सुनबुल ने देशों की सरकारों से ठोस क़दम उठाने, लड़कियों की शिक्षा तक पहुँच सुनिश्चित करने, महिलाओं की आवाज़ की रक्षा करने और लैंगिक समानता की दिशा में पहले से हासिल की गई प्रगति को बचाने की अपील की.
उन्होंने कहा, “आज मेरे साथ लाखों लड़कियाँ ज़ज़्बे के साथ यहाँ खड़ी हैं. वे हम सभी पर भरोसा कर रही हैं, और वे आप सभी पर भरोरा कर रही हैं.”