मध्य पूर्व: तेल व खाद्य वस्तुओं की बढ़ती क़ीमतें, लेबनान में 7 लाख लोग विस्थापित
मध्य पूर्व में भड़के युद्ध के 10वें दिन पूरे क्षेत्र में स्थिति नाज़ुक बनी हुई है. संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के अनुसार, हवाई हमलों और बमबारी के बीच ईरान, इसराइल समेत खाड़ी देशों में लोग हताहत हो रहे हैं, लेबनान में विशाल स्तर पर लोग विस्थापित हुए हैं. वहीं, खाद्य सामग्री व ईंधन की क़ीमतों में उछाल आया है, जिससे निर्बल समुदायों के लिए भरपेट भोजन न मिल पाने और पीड़ा गहराने की आशंका है.
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने बताया कि लेबनान में 2 लाख बच्चों समेत 7 लाख लोग बेघर होने के लिए मजबूर हुए हैं. कुछ समय पहले हुए हिंसक टकरावों की वजह से पहले से ही हज़ारों लोग विस्थापित थे.
बीते सप्ताहांत, इसराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के विरुद्ध अपने हवाई हमले तेज़ किए हैं, जिसके जवाब में ईरान ने इसराइल, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत समेत अनेक खाड़ी देशों पर हमले किए हैं.
वहीं, इसराइल ने लेबनान में हिज़बुल्लाह संगठन को निशाना बनाकर हमले किए हैं.
यूएन मानवतावादी कार्यालय (OCHA) ने बताया है कि युद्ध के आरम्भिक 8 दिनों के दौरान, लेबनान में अब तक 294 लोगों की जान जा चुकी है और 1 हज़ार से अधिक लोग घायल हुए हैं.
शनिवार, 7 मार्च को, पूर्वी लेबनान के नबी शीत नामक एक इलाक़े में इसराइली सैन्य बलों की कार्रवाई में कम से कम 41 लोग मारे गए और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं.
यूएन कार्यालय के अनुसार, लेबनान के विभिन्न इलाक़ों में हवाई हमलों में तेज़ी आ रही है, स्थानीय लोगों को अपने घर, इमारतें छोड़कर चले जाने के आदेश जारी किए गए हैं.
हताहतों का बढ़ता आँकड़ा
ईरान प्रशासन ने कहा है कि शनिवार, 28 फ़रवरी को हिंसक टकराव शुरू होने के बाद से अब तक, इसराइली-अमेरिकी हमलों में 1,330 आम नागरिकों की जान गई है और हज़ारों अन्य घायल हुए हैं.
वहीं इसराइल में भी कई लोगों के मारे जाने और लगभग 2 हज़ार लोगों के घायल होने की जानकारी है. सोमवार को मध्य इसराइल में हुए एक मिसाइल हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई है.
उधर, बहरीन प्रशासन ने बताया है कि सोमवार को ईरान द्वारा किए गए ड्रोन हमले में कम से कम 30 लोग घायल हुए हैं. क़तर के अधिकारियों ने सऊदी अरब में दो आम नागरिकों के मारे जाने की निन्दा की है.
बढ़ती आवश्यकताएँ
आपात राहत मामलों के लिए यूएन समन्वयक टॉम फ़्लैचर ने मध्य पूर्व क्षेत्र में उपजे संकट से आम नागरिकों पर बढ़ते असर के प्रति गहरी चिन्ता व्यक्त की है.
उन्होंने इसके व्यापक स्तर के नतीजों की चेतावनी दी, जिसकी चपेट में अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान भी आ सकते हैं, जिनमें पहले से ही सैन्य झड़पें हो रही हैं और बड़े पैमाने पर मानवीय आवश्यकताएँ हैं.
वहीं, सूडान, दक्षिण सूडान और यूक्रेन में हालात संकटपूर्ण है लेकिन अब वे प्राथमिकताओं की सूची में नीचे खिसक सकते हैं. उन्होंने क्षोभ जताया कि अन्तराष्ट्रीय क़ानून और संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठनों के प्रति खुले तौर पर बेपरवाही बरती जा रही है, जिन्हें हिंसक टकराव रोकने के उद्देश्य से ही स्थापित किया गया था.
'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' में चिन्ताजनक स्थिति
मध्य पूर्व में युद्ध के कारण उपजी अनिश्चितताओं के बीच, तेल की क़ीमतों में तेज़ उछाल आया है और वे लगातार बढ़ रही हैं.
संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक सप्लाई चेन में आए व्यवधान के प्रति सचेत किया है, जिससे समुद्री जहाज़ परिवहन, ऊर्जा और उर्वरक बाज़ार विशेष रूप से प्रभावित हुए हैं.
‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ जलक्षेत्र में व्यापारिक जहाज़ों की आवाजाही लगभग पूरी तरह से थम गई है. इस संकरे जलमार्ग से होकर, वैश्विक तेल की क़रीब 20 प्रतिशत आपूर्ति और बड़े स्तर पर कमर्शियल सामान की आवाजाही होती है.
गत शुक्रवार को, इस क्षेत्र में एक जहाज़ पर हुए हमले में कम से कम 4 नाविक मारे गए थे और 3 अन्य घायल हुए थे. वहीं ओमान के बन्दरगाहों पर ड्रोन हमलों से चिन्ता व्याप्त है, जिसका असर परिवहन पर हो सकता है.
अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन ने चेतावनी दी है कि फ़ारस की खाड़ी में लगभग 20 हज़ार नाविक फँसे हुए हैं. विश्व खाद्य कार्यक्रम के अनुसार, हिंसक टकराव का मध्य पूर्व में खाद्य सुरक्षा पर असर हो रहा है. स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से होकर ही उवर्रक की आपूर्ति की जाती है.
इस सप्लाई में व्यवधान आने से उपलब्धता घटेगी, फ़सलों की पैदावार कम होगी, जिससे खाद्य वस्तुओं की क़ीमतों में उछाल आने की आशंका पनपेगी.