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न्यायसखी-स्वाति: घरेलू हिंसा से बचे लोगों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ऐप.

भारत: एआई आधारित समाधानों से महिला सशक्तिकरण को नई दिशा

© UN Women India न्यायसखी-स्वाति: घरेलू हिंसा से बचे लोगों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ऐप.

भारत: एआई आधारित समाधानों से महिला सशक्तिकरण को नई दिशा

महिलाएँ

महिला सशक्तिकरण के लिए यूएन संस्था (UN Women) ने भारत सरकार की साझेदारी में, एक नई उदाहरण-पुस्तिका (casebook) जारी की है, जो यह दर्शाती है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) किस तरह से, महिलाओं एवं लड़कियों के सशक्तिकरण और लैंगिक समानता को आगे बढ़ाने में मदद कर रही है.

इस 'केसबुक' में 50 से अधिक देशों से 233 पहल पर ध्यान केन्द्रित किया गया है, जोकि ज़मीनी अनुभवों से जुड़े व्यवहारिक एआई समाधानों को प्रस्तुत करती हैं. 

ये समाधान दर्शाते हैं कि जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियाँ, महिलाओं के वास्तविक अनुभवों और ज़रूरतों को ध्यान में रखकर विकसित की जाती हैं, तो वे लैंगिक समानता को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.

इस उदाहरण-पुस्तिका को, भारत सरकार में इलैक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के 'इंडिया एआई मिशन' और यूएन वीमैन द्वारा 'एआई इम्पैक्ट समिट' 2026 में जारी किया गया था. 

भारत में आयोजित एआई सम्मेलन 2026 के दौरान पैनल विशेषज्ञों ने यूएन वीमेन की एआई केसबुक का विमोचन किया.
© UN Women India भारत में आयोजित एआई सम्मेलन 2026 के दौरान पैनल विशेषज्ञों ने यूएन वीमेन की एआई केसबुक का विमोचन किया.

एआई पर आधारित और इस 'केसबुक' में शामिल, भारत से कुछ प्रमुख पहल:

HELPSTiR: स्थानीय स्तर पर सहायता पहुँचाने वाला एआई मंच

HELPSTiR, कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित एक ऐसा मंच है, जो असुरक्षा से जूझ रही महिलाओं और बच्चों को स्वास्थ्य, आश्रय व सरकारी सहायता योजनाओं समेत अन्य स्थानीय सेवाओं से जोड़ता है.

सामाजिक कार्यकर्ता या स्वयंसेवक, मोबाइल ऐप के ज़रिए मदद का अनुरोध भेजते हैं, जिसे स्थान आधारित टैक्नॉलॉजी के ज़रिए नज़दीक में स्थित संगठनों तक पहुँचा दिया जाता है. 

नई दिल्ली में किए गए एक परीक्षण के अनुसार, इस मंच ने स्कूलों के दायरे से बाहर रह रही कई लड़कियों की पहचान करके उन्हें फिर से पढ़ाई से जोड़ने में मदद की है.

YASHODA AI: महिलाओं के लिए डिजिटल सुरक्षा और एआई साक्षरता

YASHODA AI, महिला-नेतृत्व वाला एक कार्यक्रम है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित भाषा, आवाज़ और दृश्य साधनों की मदद से महिलाओं को ऑनलाइन धोखाधड़ी, नक़ली वीडियो और डिजिटल ख़तरों को पहचानना सिखाता है.

यह कार्यक्रम कार्यशालाओं और समुदाय के सहयोग से संचालित किया जाता है और अब तक भारत के 29 शहरों में 5,500 से अधिक महिलाओं तक पहुँच चुका है.

एआई प्रभाव सम्मेलन 2026 के दौरान,  संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश, यूएन वीमेन के एक कार्यक्रम में भारतीय लड़कियों से मुलाक़ात करते हुए.
© UN Women India एआई प्रभाव सम्मेलन 2026 के दौरान, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश, यूएन वीमेन के एक कार्यक्रम में भारतीय लड़कियों से मुलाक़ात करते हुए.

NyayaSakhi-SWATI: घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए क़ानूनी मार्गदर्शन

NyayaSakhi-SWATI, कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित और निर्णय लेने में एक सहायक प्रणाली है, जो घरेलू हिंसा से प्रभावित महिलाओं को अदालत जाने से पहले अपने क़ानूनी विकल्प समझने में मदद करती है.

यह प्रणाली पहले के न्यायिक निर्णयों के आधार पर सम्भावित क़ानूनी राहत और मुक़दमे में लगने वाले समय का अनुमान देती है. महाराष्ट्र में 2,100 से अधिक महिलाओं और लड़कियों ने इसका उपयोग किया है.

Digital Safe India: ऑनलाइन लैंगिक हिंसा के विरुद्ध एआई समर्थित कार्रवाई

Digital Safe India, एक ऐसी पहल है, जो बिना अनुमति के साझा की गई निजी तस्वीरों, ऑनलाइन ब्लैकमेल, धोखाधड़ी और डिजिटल उत्पीड़न जैसे मामलों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और विशेषज्ञों की सहायता से तेज़ कार्रवाई सुनिश्चित करती है.

इस पहल ने अब तक 1,000 से अधिक महिलाओं को सहायता दी है और कई हानिकारक वेबसाइटों को हटाने में भी मदद की है.

VoiceValor: ऑनलाइन दुर्व्यवहार, एआई की कमियों को उजागर करने वाला मंच

VoiceValor एक वैब आधारित ऐसा साधन है, जो महिलाओं और विविध लैंगिक पृष्ठभूमि के समुदायों को यह समझने में मदद करता है कि ऑनलाइन सामग्री की जाँच करने वाली एआई प्रणालियाँ किन मामलों में नफ़रत या दुर्व्यवहार को पहचान नहीं पाती हैं.

अब तक 10 हज़ार से अधिक लोगों ने इस मंच के ज़रिए, 5 लाख से अधिक टिप्पणियों का विश्लेषण किया है.

वॉयसवैलर: ऑनलाइन दुरुपयोग की पहचान के लिए एआई आधारित ऐप.
© UN Women India वॉयसवैलर: ऑनलाइन दुरुपयोग की पहचान के लिए एआई आधारित ऐप.

Project Saathi: महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए आवाज़ आधारित समाधान

Project Saathi, स्थानीय भाषाओं में काम करने वाली और आवाज़ पर आधारित एक ऐसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणाली है, जो महिलाओं को अपने स्वास्थ्य से जुड़े लक्षण समझने और समय पर उपचार प्राप्त करने में मदद करती है.

शुरुआती चरण में यह पहल महाराष्ट्र और तेलंगाना में परीक्षण के रूप में लागू की जा रही है और इसका लक्ष्य 500 घरों तक पहुँचना है.

Sanmati: एआई में लैंगिक पक्षपात को समझने में महिलाओं की भागेदारी

Sanmati परियोजना के तहत, कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भाषा प्रणालियों में उपस्थित लैंगिक पक्षपात की पहचान करने और उसके अध्ययन में महिलाओं को शामिल किया गया है.

6 भारतीय भाषाओं में चलाए गए इस कार्यक्रम में 20 हज़ार महिलाओं ने भाग लिया. इसके ज़रिए, एआई प्रणालियों के मूल्यांकन के लिए एक विशेष संग्रह भी तैयार किया गया है.

NariRaksha: महिलाओं की सुरक्षा के लिए एआई आधारित निगरानी प्रणाली

NariRaksha, एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणाली है, जो शहरों में सुरक्षा से जुड़े जोखिमों की पहचान करने के लिए स्थान सम्बन्धी आँकड़ों और चित्र विश्लेषण का उपयोग करती है.

भारत के चेन्नई और बेंगलुरु महानगरों के कुछ हिस्सों में लागू इस प्रणाली ने पुलिस की प्रतिक्रिया को तेज़ और अधिक प्रभावी बनाने में मदद की है.

Sakhi: शिक्षा से रोज़गार तक मार्गदर्शन देने में सहायक

Sakhi एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सहकर्मी मार्गदर्शन प्रणाली है, जो लड़कियों को शिक्षा से रोज़गार तक के महत्वपूर्ण चरणों में सलाह एवं सहयोग देती है.

दिल्ली में चल रहे एक परीक्षण में लगभग 150 लड़कियाँ और युवा महिलाएँ इस मंच का उपयोग कर रही हैं.

Thermalytix: स्तन कैंसर की पहचान के लिए एआई आधारित जाँच

Thermalytix, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तापीय चित्रण (heat map) पर आधारित एक ऐसी प्रणाली है, जो बिना किसी स्पर्श के स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान में मदद करती है.

भारत के 29 शहरों व ग्रामीण क्षेत्रों में, 1 लाख से अधिक महिलाओं की जाँच में इस टैक्नॉलॉजी का उपयोग किया जा चुका है.

रोमिता घोष ने बाल कुपोषण से निपटने के लिए ‘MAAP AI’ विकसित किया.
© UN News/Rohit Upadhyay रोमिता घोष ने बाल कुपोषण से निपटने के लिए ‘MAAP AI’ विकसित किया.

MAAP AI: कुपोषण की पहचान के लिए स्मार्टफोन आधारित प्रणाली

MAAP AI, एक मोबाइल ऐप है, जो एक तस्वीर के आधार पर बच्चे की लम्बाई व पोषण स्थिति का आकलन करने में सक्षम है.

इस प्रणाली के माध्यम से अब तक, 3 लाख से अधिक बच्चों की जाँच की जा चुकी है, जिससे सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों को बेहतर बनाने में मदद मिली है.

ट्रान्सजैंडर महिलाओं के लिए एआई आधारित सहायता मंच

कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित एक डिजिटल मंच, ट्रान्सजैंडर महिलाओं को सरकारी योजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, मानसिक स्वास्थ्य सहयोग और रोज़गार के अवसरों तक सुरक्षित तथा व्यक्तिगत रूप से मार्गदर्शन प्रदान करता है.

भारत के तमिलनाडु राज्य में किए गए एक परीक्षण में यह पहल 1 हज़ार से अधिक ट्रान्सजैंडर महिलाओं तक पहुँची है.

Smart Kojin: माहवारी सम्बन्धी स्वच्छता के लिए एआई समाधान

Smart Kojin, एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मोबाइल ऐप है, जो विशेष उपकरणों के साथ मिलकर महिलाओं व लड़कियों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक माहवारी प्रबन्धन में मदद करती है.

यह प्रणाली आवश्यक जानकारी, ज़रूरी उत्पादों की उपलब्धता और सुरक्षित निस्तारण सुविधाओं तक आसान पहुँच सुनिश्चित करती है.

स्मार्ट कोजिन: सैनिटरी नैपकिन निपटान हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मोबाइल ऐप.
© UN Women India स्मार्ट कोजिन: सैनिटरी नैपकिन निपटान हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मोबाइल ऐप.

TAGS: महिलाओं के डिजिटल सशक्तिकरण के लिए सामुदायिक पहल

Tech Ambassadors on Ground (TAGS) पहल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित बहुभाषी डिजिटल प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को तकनीकी कौशल और नेतृत्व क्षमता विकसित करने में मदद करती है.

इस कार्यक्रम के माध्यम से अब तक 580 से अधिक महिलाओं तक पहुँच बनाई जा चुकी है.

डीपफ़ेक अपराधों से निपटने के लिए एआई आधारित पुलिस प्रशिक्षण

उत्तर प्रदेश राज्य के श्रावस्ती ज़िले में पुलिस अधिकारियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित साधनों की मदद से डीपफ़ेक सामग्री -- एआई से तैयार झूठी तस्वीरों व वीडियो -- की पहचान और जाँच के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है.

इस कार्यक्रम के तहत 200 से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है और 5 हज़ार से अधिक लोगों को जागरूक किया गया है.