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क़ानूनी अधिकारों में बराबरी के बिना, लैंगिक समानता के प्रयास अधूरे हैं - महासचिव

 पोर्ट सूडान की महिलाएँ कृषि, व्यापार और आर्थिक अधिकारों के बारे में सीखते हुए.
UN Photo/Mona Elfateh
पोर्ट सूडान की महिलाएँ कृषि, व्यापार और आर्थिक अधिकारों के बारे में सीखते हुए.

क़ानूनी अधिकारों में बराबरी के बिना, लैंगिक समानता के प्रयास अधूरे हैं - महासचिव

महिलाएँ

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने 8 मार्च को, 'अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस' के अवसर पर अपने सन्देश में सचेत किया है कि जब तक महिलाओं को पुरुषों के बराबर क़ानूनी अधिकार नहीं मिलते हैं, तब तक सही मायनों में लैंगिक समानता सम्भव नहीं होगी. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि महिलाएँ व लड़कियाँ दुनिया को बदल रही हैं, और अब यह समय उनके लिए दुनिया को बदलने का है. 

इस वर्ष अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस का विषय “सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए अधिकार, कार्रवाई और न्याय” पर केन्द्रित है.

यूएन प्रमुख ने अपने सन्देश में ध्यान दिलाया कि विश्व स्तर पर महिलाओं को अब भी पुरुषों की तुलना में केवल 64 प्रतिशत क़ानूनी अधिकार ही प्राप्त हैं.

उन्होंने कहा कि क़ानूनी भेदभाव, महिलाओं के जीवन के लगभग हर पहलू को प्रभावित कर सकता है. उन्हें अनेक मामलों में सम्पत्ति रखने, तलाक लेने या अपने पति की अनुमति के बिना नौकरी करने से रोका जा सकता है.

महासचिव के अनुसार, “40 से अधिक देशों में, वैवाहिक बलात्कार को अब भी अपराध के रूप में मान्यता नहीं दी गई है. अन्य क़ानून, शिक्षा तक महिलाओं की पहुँच को सीमित करते हैं, बच्चों को नागरिकता देने की उनकी क्षमता को बाधित करते हैं, या फिर घर से बाहर उनकी स्वतंत्र आवाजाही पर भी पाबन्दी लगाते हैं.”

उन्होंने कहा कि जहाँ क़ानूनी सुरक्षा मौजूद भी है, वहाँ भी भेदभाव और कमज़ोर क्रियान्वयन के कारण महिलाएँ, अक्सर अदालतों और क़ानूनी सहायता तक पहुँच नहीं पातीं,

महासचिव ने चेतावनी दी कि सदियों से चले आ रहे अन्यायपूर्ण क़ानूनों के अलावा आज एक नई चिन्ताजनक प्रवृत्ति भी सामने आ रही है. 

उन्होंने कहा कि “बढ़ते अधिनायकवाद, राजनैतिक अस्थिरता और पितृसत्तात्मक व्यवस्था को मज़बूती देने की नई कोशिशों के बीच, वर्षों के संघर्ष से हासिल की गई प्रगति पीछे धकेली जा रही है — अधिक न्यायसंगत श्रम सुरक्षा के अधिकार से लेकर यौन व प्रजनन अधिकार तक.”

यूएन प्रमुख ने सभी देशों से, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) और बीजिंग+30 एक्शन एजेंडा के वादों को पूरा करने के लिए एकजुट होने की अपील की है, जोकि महिलाओं के लिए अधिकारों को साकार करने पर लक्षित है.

उन्होंने कहा कि “भेदभावपूर्ण क़ानूनों और प्रथाओं के विरूद्ध लड़ाई करते हुए, और अब तक हासिल की गई प्रगति की रक्षा करते हुए, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि सभी महिलाओं को वह गरिमा, अवसर और स्वतंत्रता प्राप्त हो, जिसकी वे हक़दार हैं.”