संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व, पिछले एक दशक में प्रगति की सबसे सुस्त गति
संयुक्त राष्ट्र समर्थित अन्तर-संसदीय संघ (IPU) की एक नवीन रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 की शुरुआत में, दुनिया भर की संसदों में 27.5 प्रतिशत सीटों पर ही महिलाओं की भागेदारी है. यह 2025 की तुलना में 0.3 प्रतिशत की वृद्धि है, जोकि लगभग एक दशक में सबसे धीमी बढ़त को दर्शाती है.
“संसद में महिलाएँ - 2025” नामक इस रिपोर्ट को, 8 मार्च को 'अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस' से पहले जारी किया गया है, जो बताती है कि संसदों में महिलाओं के नेतृत्व में गिरावट देखी गई है. नए नियुक्त 75 स्पीकर पदों में से केवल 12 पदों पर ही महिलाएँ नियुक्त की गई हैं.
इस बीच, पिछले वर्ष जिन 49 देशों में चुनाव आयोजित हुए वहाँ महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने में कोटा प्रणाली या आरक्षण व्यवस्था की भूमिका को “महत्वपूर्ण” बताया गया.
जिन संसदों में किसी प्रकार का आरक्षण क़ानून लागू था, वहाँ औसतन 31 प्रतिशत महिलाएँ चुनी गईं, जबकि जिन संसदों में यह व्यवस्था नहीं थी, वहाँ यह आँकड़ा 23 प्रतिशत तक ही रहा.
अन्तर-संसदीय संघ, IPU, राष्ट्रीय संसदों का एक वैश्विक संगठन है, जिसे 1889 में दुनिया की पहली बहुपक्षीय राजनैतिक संस्था के रूप में स्थापित किया गया था. इसका उद्देश्य सभी देशों के बीच सहयोग और सम्वाद को प्रोत्साहित करना है.
एक नज़र आँकड़ों पर...
अमेरिका क्षेत्र में संसदों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सबसे अधिक रहा, जहाँ कुल सांसदों में 35.6 प्रतिशत महिलाएँ हैं.
वहीं, अन्य क्षेत्रों में किर्गिज़्स्तान ने महिलाओं के प्रतिनिधित्व में सबसे अधिक प्रगति दर्ज की, जहाँ संसद में महिलाओं की संख्या में 12.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई.
इसके बाद, कैरीबियाई क्षेत्र में स्थित देश, सेंट विन्सेंट एंड ग्रेनेडीन्स में 12.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.
इसके विपरीत, रिपोर्ट के अनुसार मध्य पूर्व और उत्तर अफ़्रीका क्षेत्र में संसदों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सबसे कम बना हुआ है, जहाँ औसतन केवल 16.2 प्रतिशत सीटें ही महिलाओं के पास हैं.
रिपोर्ट में बताया गया कि ओमान, तुवालू और यमन ऐसे तीन देश हैं, जहाँ संसद के निचले सदन या एकमात्र सदन में कोई भी महिला सांसद नहीं है.
बढ़ती राजनैतिक हिंसा
संसदों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व में रुकी हुई प्रगति के बीच, महिला सांसदों को, सार्वजनिक तौर पर डराने-धमकाने की बढ़ती घटनाओं का भी अधिक सामना करना पड़ रहा है. IPU की रिपोर्ट के अनुसार, सांसदों के विरूद्ध बढ़ती राजनैतिक हिंसा में, महिला सांसद पुरुषों की तुलना में अधिक प्रभावित होती हैं.
सर्वेक्षण में शामिल 76 प्रतिशत महिला सांसदों ने बताया कि उन्हें, ऑनलाइन और ऑफ़लाइन दोनों तरह की हिंसा या धमकी का सामना करना पड़ा, जबकि पुरुष सांसदों में यह आँकड़ा 68 प्रतिशत रहा.
IPU ने अपने वक्तव्य में कहा कि, “यह बढ़ती प्रवृत्ति कुछ महिलाओं को चुनाव लड़ने से हतोत्साहित कर सकती है, जो महिलाओं के राजनैतिक प्रतिनिधित्व में प्रगति के रास्ते में एक अतिरिक्त बाधा बन सकती है.”
IPU के योरोपीय प्रतिनिधिमंडल की सदस्य और इटली की सांसद वैलेन्टीना ग्रिप्पो ने पिछले महीने यूएन न्यूज़ से बातचीत के दौरान आज के दौर में सांसदों के सामने आने वाली कठिनाइयों पर प्रकाश डाला था.
उन्होंने कहा, “यदि आप कुछ ऐसा कहते हैं जो आपके श्रोताओं की अपेक्षाओं के बिल्कुल अनुरूप नहीं है, तो आपको अनेक तरह के हमलों का सामना करना पड़ता है.”
हालाँकि, रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ देशों ने, इस हिंसा से निपटने के लिए क़दम उठाए हैं. उदाहरण के लिए, कोलम्बिया की संसद ने राजनीति में महिलाओं के विरूद्ध हिंसा को रोकने और दंडित करने के लिए एक क़ानून पारित किया है.