मध्य पूर्व: विश्व अर्थव्यवस्था के लिए गम्भीर जोखिम, स्थिति नियंत्रण से बाहर जाने की चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व में ग़ैरक़ानूनी ढंग से किए जा रहे हमलों से आम नागरिकों के लिए गहरी पीड़ा उपजी है और ये स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक गम्भीर जोखिम है. उन्होंने कहा है कि यदि इस टकराव को तुरन्त नहीं रोका गया तो हालात हर किसी के नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं.
28 फ़रवरी को ईरान पर इसराइल व अमेरिकी बमबारी और उसके बाद ईरान के जवाबी हमलों से भड़के भीषण हिंसक टकराव का असर, मध्य पूर्व में लगभग 16 देशों में महसूस किया जा रहा है.
वहीं, फ़ारस की खाड़ी (Persian Gulf) को अरब सागर से जोड़ने वाले संकरे जलमार्ग, ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ में जहाज़ों की आवाजाही पूरी तरह रुकने के कगार पर है, जहाँ से वैश्विक तेल व गैस आपूर्ति और कमर्शियल सामान का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है.
मध्य पूर्व में व्याप्त तनातनी के बीच, जहाज़ कम्पनियों ने ‘आपात शुल्क’ के तौर पर, प्रति कंटेनर लगभग 3 हज़ार डॉलर का सरचार्ज लगाना शुरू कर दिया है.
यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने मध्य पूर्व में टकराव की स्थिति को बेहद चिन्ताजनक क़रार देते हुए आगाह किया है कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा ख़तरा है और हालात हर किसी के नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं.
“यह समय लड़ाई को रोकने और गम्भीर कूटनैतिक वार्ता की ओर लौटने का है.” उन्होंने कहा कि बहुत कुछ दाँव पर लगा हुआ है और स्थिति अत्यंत गम्भीर है.
विश्व के लिए गम्भीर जोखिम
संयुक्त राष्ट्र आपात राहत समन्वयक (OCHA) टॉम फ़्लैचर के अनुसार, यह विश्व के समक्ष एक गम्भीर जोखिम का क्षण है, हिंसक संघर्षों में तेज़ी आ रही है, और मानवीय संकट एक दूसरे से जुड़ते जा रहे हैं.
यूएन अवर महासचिव ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व में हिंसक टकराव का बढ़ता दायरा, पूरे क्षेत्र और उससे परे भी, मानवीय स्थिति बिगड़ने की वजह बन सकता है.
उन्होंने कहा कि ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ में समुद्री मार्ग में आए व्यवधान से खाद्य वस्तुओं की क़ीमतों में उछाल आ सकता है, स्वास्थ्य प्रणालियों पर दबाव बढ़ने और मानवीय सहायता की आपूर्ति में कठिनाई पेश आने की आशंका है.
यूएन मानवतावादी कार्यालय (OCHA) प्रमुख टॉम फ़्लैचर ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि लड़ाई के जोखिम, उसे भड़काने वालों के नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं.
“युद्ध में विशाल संसाधन झोंके जा रहे हैं, जबकि मानवीय सहायता बजट में कटौती की जा रही हैं.”
उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और तुरन्त कूटनीति की ओर लौटने का आग्रह करते हुए कहा कि हमें तनाव में कमी लाने, टकराव को रोकने की ज़रूरत है. यूएन चार्टर के अनुरूप, सार्थक सम्वाद व वार्ता की ओर जाना होगा और ठंडे दिमाग़ से काम लेना होगा.