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अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर सैन्य झड़पों की वजह से, हज़ारों परिवार हुए बेघर

अफगानिस्तान लौटने वाले अफगान लोग टॉर्कहम सीमा पार से गुजरते हैं, सामान ले जाते हैं और थकान के संकेत दिखाते हैं। बच्चों और बुजुर्गों सहित परिवार, भीड़भाड़ और धूल भरी सड़क पर सवार होते हैं, जो भरी हुई गाड़ियों से घिरी होती है, जो अफगानिस्तान लौटने की उनकी यात्रा का प्रतीक है।
© UNHCR/Oxygen Empire मीडिया प्रोडक्शन पाकिस्तान से लगी सीमा पर स्थित तोरख़म चौकी के ज़रिए, अफग़ान शरणार्थी अपने देश वापिस लौट रहे हैं. (फ़ाइल)

अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर सैन्य झड़पों की वजह से, हज़ारों परिवार हुए बेघर

शान्ति और सुरक्षा

अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के बीच पिछले एक सप्ताह से सीमावर्ती इलाक़ों में फिर भड़की हिंसक झड़पों की वजह से अब तक, 150 से अधिक लोग हताहत और 1 लाख से अधिक लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं. अफ़ग़ानिस्तान में यूएन मिशन (UNAMA) ने सभी युद्धरत पक्षों से आम नागरिकों की रक्षा और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का पालन करने का आग्रह किया है.

यूएन मिशन ने बताया है कि 26 फ़रवरी से 5 मार्च के दौरान, गोलीबारी और हवाई हमलों की चपेट में आने से 56 अफ़ग़ान नागरिक मारे गए हैं और 129 घायल हुए हैं. हताहतों में 55 प्रतिशत लड़कियाँ व महिलाएँ हैं.

लड़ाई से प्रभावित इलाक़ों में सीमित पहुँच होने की वजह से हताहतों के बारे में ठोस जानकारी मिल पाना कठिन है.

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इन झड़पों से अफ़ग़ानिस्तान के लगभग 10 प्रान्त प्रभावित हुए हैं, जिनमें काबुल, कन्दहार, ख़ोस्त, कुनार, लघमान, नांगरहार, नूरिस्तान समेत अन्य इलाक़े हैं.

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी संगठन के अनुसार, सीमा पर जारी टकराव के बीच अफ़ग़ानिस्तान में 1.15 लाख और पाकिस्तान में 3 हज़ार लोग आन्तरिक रूप से विस्थापित हुए हैं.

पश्चिमोत्तर पाकिस्तान में मोर्टार से गोलाबारी की वजह से अनेक परिवार अपने गाँव छोड़कर भागने के लिए मजबूर हो गए हैं.

सीमा पर स्थित ज़िलों में स्कूल व बाज़ार बन्द हैं. मानवीय सहायताकर्मी, ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रान्त के दक्षिण में ज़रूरतमन्द लोगों के लिए मानवीय सहायता पहुँचाने में जुटे हैं. मगर सीमावर्ती इलाक़ों में उनके कुछ कार्य अस्थाई रूप से स्थगित किया गया है.

यूएन मानवतावादी कार्यालय ने सभी पक्षों से आम लोगों व नागरिक प्रतिष्ठानों की रक्षा करने, ज़रूरतमन्द आबादी तक तुरन्त, बेरोकटोक मदद पहुँचाने और अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून के तहत अपने तयशुदा दायित्वों को पूरा करने का आग्रह किया है.

सहायता प्रयासों में चुनौतियाँ

इस बीच, काबुल अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 5 मार्च तक उड़ानों का संचालन जारी था, लेकिन सुरक्षा सम्बन्धी चुनौतियों और अमेरिका-इसराइल व ईरान के बीच टकराव भड़कने की वजह से उड़ानों पर असर हुआ है. 

यूएन मानवतावादी विमान सेवा (UNHAS) ने जलालाबाद और कन्दहार में अपनी नियमित उड़ानें फ़िलहाल स्थगित कर दी हैं, और सप्ताह में केवल दुशान्बे के लिए एक उड़ान की उपलब्धता बरक़रार है. बताया गया है कि कन्दहार के लिए साप्ताहिक उड़ानें 8 मार्च से फिर बहाल की जाएंगी.

अफ़ग़ानिस्तान में स्थिति पहले से ही नाज़ुक है और ईरान संकट के कारण, यदि बड़ी संख्या में अफ़ग़ान शरणार्थियों की वापसी हुई तो उससे बुनियादी सेवाओं व मेज़बान समुदायों पर दबाव बढ़ेगा.

यूएन शरणार्थी एजेंसी, ज़रूरतमन्द आबादी तक मानवीय सहायता पहुँचाने में जुटी है और उनके लिए कम्बल, आश्रय समर्थन, बिस्तर समेत अन्य सेवाओं को सुनिश्चित किया जा रहा है.

मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने पाकिस्तान सेना और तालेबान के सुरक्षा बलों से लड़ाई को तुरन्त रोकने का आग्रह किया है, और उन लाखों लोगों की मदद को प्राथमिकता देने की अपील की है, जिनका जीवन मानवीय सहायता पर निर्भर है, और जो पिछले कई वर्षों से हिंसा व पीड़ा का सामना कर रहे हैं.