मध्य पूर्व: 'हिंसक टकराव की लपटें फैलती जा रही हैं', अनेक देश चपेट में
ईरान पर इसराइली व अमेरिकी बमबारी और फिर ईरान के जवाबी मिसाइल व ड्रोन हमलों से भड़के हिंसक टकराव की चपेट में मध्य पूर्व के अनेक देश आ चुके हैं, जहाँ मानवीय परिस्थितियाँ बिगड़ रही हैं और व्यापक अस्थिरता फैलने की आशंका है. यूएन एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि लगभग 16 देश इस संकट से प्रभावित हैं, आम नागरिक हताहत व विस्थापित हो रहे हैं, और बुनियादी ढाँचे को क्षति पहुँच रही है.
अहम अपडेट, संक्षेप में
- मध्य पूर्व संकट अपने सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है, और हमले व जवाबी बमबारी जारी है. ईरान में 1 हज़ार से अधिक लोग मारे गए हैं और अन्य देशों में भी बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए हैं.
- यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त ने आगाह किया है कि इस टकराव का दायरा अब ईरान, इसराइल व अमेरिका से आगे फैल रहा है और इसे रोकने के लिए तुरन्त क़दम उठाने होंगे.
- संयुक्त अरब अमीरात, क़तर, ओमान, बहरीन, कुवैत, लेबनान, सऊदी अरब समेत मध्य पूर्व में स्थित कई अन्य देश इस संकट की चपेट में हैं.
- संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने चेतावनी दी है कि बच्चे, इस हिंसा का सबसे अधिक ख़ामियाज़ा भुगत रहे हैं, सैकड़ों की जान गई हैं, और उनके लिए शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी असर हुआ है.
- लेबनान में भी इसराइली हमलों और जगह छोड़कर जाने के आदेशों से लाखों लोग प्रभावित हुए हैं, बड़े स्तर पर विस्थापन हो रहा है और मानवीय सहायता की आवश्यकता है.
तेहरान से बड़े पैमाने पर पलायन
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया है कि पिछले सात दिनों के दौरान ईरान पर इसराइली और अमेरिकी सैन्य हमलों के बीच, 1 हज़ार से अधिक लोगों के मारे जाने की ख़बर है और 7 हज़ार लोग घायल हुए हैं.
अब तक 1 लाख लोग तेहरान छोड़कर जा चुके हैं. 28 फ़रवरी के बाद से स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों पर 14 हमलों की पुष्टि हुई है, जिनमें 4 स्वास्थ्यकर्मियों की जान गई है.
अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएँ जारी हैं और बमबारी में घायल लोगों के इलाज के लिए क्षमताओं का विस्तार किया गया है.
फ़िलहाल, ईरान ने यूएन स्वास्थ्य एजेंसी से सेवाओं के संचालन के लिए औपचारिक अनुरोध नहीं किया है, लेकिन संगठन इसके लिए तैयार है.
हिंसा की आग बुझाने की अपील
यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने मध्य पूर्व में बढ़ते संकट से निपटने के लिए तत्काल क़दम उठाने का आग्रह किया है. साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी है कि हमले जारी रहने और भड़काऊ बयानबाज़ियों से आम नागरिकों के लिए जोखिम भी बढ़ रहा है.
उन्होंने जिनीवा में बताया कि एक सप्ताह पहले, ईरान पर किए गए हमले और फिर उसकी जवाबी कार्रवाई की आंच अनेक देशों में फैल चुकी है, जिससे पूरे क्षेत्र में भारी क्षति हुई है.
स्कूल पर हमले की जाँच का आग्रह
यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त ने ईरान के मिनाब में लड़कियों के एक प्राइमरी स्कूल के बमबारी की चपेट में आने की घटना की तुरन्त, पारदर्शी व निष्पक्ष जाँच कराए जाने का आग्रह किया है. यह घटना इसराइली-अमेरिकी बमबारी शुरू होने के दिन ही हुई थी, जिसमें 150 से अधिक छात्राओं के मारे जाने की रिपोर्ट है.
उन्होंने कहा कि ज़मीन पर टीम की उपस्थिति न होने की वजह से उनके पास अधिक जानकारी नहीं है, और इंटरनैट सेवाओं के ठप होने से भी सूचना नहीं मिल पा रही है.
स्वास्थ्य प्रणालियों पर दबाव
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आगाह किया है कि मध्य पूर्व में स्थित देशों में स्वास्थ्य सेवाओं पर पहले से ही बोझ था, जोकि हिंसक टकराव भड़कने के बाद और गहरा हुआ है.
पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्र के लिए यूएन कार्यालय ने बताया कि 11.5 करोड़ लोगों को तुरन्त मानवीय सहायता की आवश्यकता है.
संगठन के अनुसार, यह क्षेत्र 14 स्वास्थ्य आपात स्थितियों से जूझ रहा है, जिनमें सात अपने उच्चतम स्तर पर हैं. 8 करोड़ लोग खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे हैं और बड़े पैमाने पर बीमारियों को प्रकोप है.