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मध्य पूर्व संकट: हिंसक टकराव से आम नागरिकों के लिए गहराती पीड़ा, बढ़ती अनिश्चितता

बेरूत, लेबनान के दक्षिणी उपनगरों में ध्वस्त इमारतें और मलबे, हवाई हमलों के बाद। फोटो क्रेडिटः ©UNICEF2026 /Lebanon.
© UNICEF/Ramzi Haidar लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिण में स्थित बाहरी इलाक़ों को हवाई हमलों में निशाना बनाया गया है.

मध्य पूर्व संकट: हिंसक टकराव से आम नागरिकों के लिए गहराती पीड़ा, बढ़ती अनिश्चितता

शान्ति और सुरक्षा

मध्य पूर्व में हिंसक टकराव के छठे दिन, ईरान पर इसराइल व अमेरिका के हवाई हमलों और ईरान द्वारा इसराइल, खाड़ी देशों में किए जा रहे मिसाइल व ड्रोन हमलों में कोई ठहराव नहीं आया है. इसराइल ने लेबनान में भी हिज़बुल्ला पर कार्रवाई शुरू की है, जिससे बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं. इस बीच, ईरान द्वारा कथित रूप से तुर्कीये पर दागी एक मिसाइल को बीच में ही रोक लिया गया, हालांकि ईरान ने इस दावे का खंडन किया है.

अहम अपडेट, संक्षेप में

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि अब इस टकराव ने 16 देशों को अपनी चपेट में ले लिया है. मध्य पूर्व और उसके नज़दीकी क्षेत्रों में 3.3 लाख लोग जबरन विस्थापति हुए हैं. 
     
  • पिछले कुछ दिनों में ईरान पर हुए हवाई हमलों के बाद से 1 लाख लोग राजधानी तेहरान छोड़कर जा चुके हैं. अनुमान है कि हर दिन 1-2 हज़ार वाहन तेहरान से बाहर की ओर जा रहे हैं. 
     
  • पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में हवाई हमले और जवाबी बमबारी जारी है. दक्षिणी लेबनान में इसराइली कार्रवाई के बीच 58 हज़ार विस्थापितों ने आश्रय केन्द्रों में शरण ली है.
     
  • खाड़ी और 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' जलक्षेत्र में व्यापारिक जहाज़ों की आवाजाही, समुद्री नाविकों और क्रूज़ जहाज़ों में सवार यात्रियों की सुरक्षा के प्रति चिन्ता है.
     
  • गहराते संकट के बीच, संयुक्त राष्ट्र ने निरन्तर संयम बरते जाने और कूटनीति व वार्ता की मेज़ पर लौटने की अपील दोहराई है.

दुबई में स्वास्थ्य आपूर्ति केन्द्र में व्यवधान

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, संयुक्त राज्य अमीरात के दुबई में स्थित वैश्विक स्वास्थ्य सामग्री आपूर्ति केन्द्र में, बढ़ती असुरक्षा, वायु क्षेत्र के बन्द होने और 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' में पाबन्दियों की वजह से कामकाज अस्थाई रूप से रोकना पड़ा है.

इस व्यवधान की वजह से, इस आपात केन्द्र में 1.8 करोड़ डॉलर की आपूर्ति तक पहुँच प्रभावित हुई है, जबकि 80 लाख डॉलर के मूल्य की खेप फ़िलहाल यहाँ नहीं पहुँच पा रही है. 

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में 25 देशों से आपात आपूर्ति के लिए 50 अनुरोधों पर असर हुआ है, जिनमें ग़ाज़ा के लिए दवाएँ और पोलियो लैब सम्बन्धी सामान हैं. 

स्वास्थ्य केन्द्रों पर असर

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने आगाह किया है कि मध्य पूर्व संकट से संयुक्त अरब अमीरात, क़तर, बहरीन, कुवैत, लेबनान, इराक़ समेत 16 देश प्रभावित हैं. आम नागरिकों के जीवन पर जोखिम है और स्वास्थ्य प्रणालियों पर दबाव बढ़ता जा रहा है.

हताहत आम नागरिकों की संख्या बढ़ती जा रही है और स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों पर हमलों की पुष्टि हुई है. 

WHO महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने बताया कि ईरान में अब तक लगभग 1 हज़ार लोगों के मारे जाने की ख़बर है. लेबनान, इसराइल और खाड़ी देशों में भी बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है. 

संगठन ने ईरान में अब तक 13 स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों पर हमलों की पुष्टि की है, जबकि लेबनान मे 1 केन्द्र हमले की चपेट में आया है. 

यूएन एजेंसी प्रमुख के अनुसार, हिंसक टकराव बड़े पैमाने पर विस्थापन की वजह बन रहा है. 1 लाख लोग ईरान छोड़कर जा चुके हैं और लेबनान में 60 हज़ार विस्थापित हुए हैं. अपने स्थान छोड़कर जाने के आदेशों की वजह से विस्थापितों की संख्या 1 लाख तक पहुँच सकती है.

महानिदेशक घेबरेयेसस ने आगाह किया है कि बमबारी के दौरान यदि परमाणु प्रतिष्ठानों को किसी प्रकार की क्षति पहुँची, तो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए उसके गम्भीर दुष्परिणाम होंगे. 

समुद्री नाविकों की सुरक्षा के प्रति चिन्ता

होर्मुज जलडमरूमध्य का उपग्रह दृश्य, जो अरब प्रायद्वीप और ओमान के मुसंदम प्रायद्वीप के बीच संकीर्ण जलमार्ग दिखाता है।
© NASA/GSFC/Jacques Descloitres 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' की सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीर.

अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने खाड़ी क्षेत्र में 20 हज़ार से अधिक समुद्री नाविकों और क्रूज़ जहाज़ों में सवार 15 हज़ार यात्रियों की सलामती के प्रति चिन्ता जताई है. मध्य पूर्व और ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ जलक्षेत्र में अन्तरराष्ट्रीय जहाज़ों पर हमले की घटनाओं और व्यापारिक आवाजाही पर उसके असर से तनाव व्याप्त है.

‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’, ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा जलमार्ग है, जो फ़ारस की खाड़ी (Persian Gulf) को अरब सागर से जोड़ता है. यह विश्व में उन समुद्री जलमार्गों में से है, जोकि रणनैतिक रूप से बहुत अहम हैं. हर दिन वैश्विक तेल व गैस आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा, इसी जल क्षेत्र से होकर गुज़रता है. 

इस रास्ते के ज़रिए जहाज़ों की आवाजाही में किसी भी प्रकार के व्यवधान से वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों और अन्तरराष्ट्रीय व्यापार पर तत्काल असर पड़ सकता है. 

अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के महासचिव आरसेनियो डोमिन्ग्वेज़ ने कहा कि ऐसी घटनाएँ, न केवल आर्थिक मुद्दा हैं, बल्कि मानवीय स्थिति से भी जुड़े हैं. उन्होंने कहा कि समुद्री नाविकों और नागरिक जहाज़ों पर हमले को कभी भी न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता है. 

IMO प्रमुख ने जहाज़रानी कम्पनियों से आग्रह किया है कि आवाजाही के दौरान अधिकतम सतर्कता बरती जानी होगी और तनाव में कमी लाने के प्रयास करने होंगे.

विस्थापन, नाज़ुक हालात

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी संगठन (UNHCR) ने मध्य पूर्व क्षेत्र में टकराव पर गहरी चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि पहले से ही सम्वेदनशील परिस्थितियों में जीवन गुज़ार रहे लोगों के लिए हालात बद से बदतर हुए हैं. 

यूएन एजेंसी ने अपने एक अपडेट में बताया है कि हिंसा से प्रभावित देशों में पहले से ही 2.5 करोड़ जबरन विस्थापित लोगों ने शरण ली हुई थी.

अब इस आबादी के लिए संरक्षण जोखिम और मानवीय सहायता आवश्यकताएँ बढ़ने की आशंका प्रबल है और उनके मेज़बान समुदाय भी चुनौतियों से जूझ रहे हैं.

लेबनान में अफ़रा-तफ़री

दक्षिणी लेबनान में इसराइली बमबारी और राजधानी बेरूत के दक्षिणी बाहरी इलाक़ों में हिंसा से आम नागरिक बुरी तरह प्रभावित हैं. हिज़ुबल्ला लड़ाकों ने भी इसराइली ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है.

लेबनान के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, हिंसक टकराव भड़कने के बाद से बुधवार तक 70 से अधिक लोगों के मारे जाने और 435 लोगों के घायल होने की ख़बर है.

लेबनान के लिए यूएन की विशेष समन्वयक जिनीन हेनिस-प्लाशर्ट और संयुक्त राष्ट्र मिशन तनाव में कमी लाने के लिए अपने कूटनैतिक प्रयास जारी रखे हुए हैं. वहीं, यूएन की देशीय टीम ने बढ़ती मानवीय आवश्यकताओं के मद्देनज़र, अपने सहायता प्रयासों को तेज़ किया है.  

इस बीच, इसराइल ने दक्षिणी लेबनान में लोगों को अपने स्थान छोड़कर जाने का आदेश दिया है, जिसके बाद स्थानीय निवासियों में अफ़रा-तफ़री है और वे जल्द इलाक़ों से बाहर जाना चाहते हैं.

पिछले दो दिनों में 58 हज़ार लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं. बड़ी संख्या में लोगों ने भीड़भाड़ भरे स्कूलों में शरण ली है. यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य के लिए यूएन एजेंसी (UNFPA) ने चेतावनी दी है कि महिलाओं व लड़कियों के लिए जोखिम बढ़ रहे हैं, विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के लिए.

इन परिस्थितियों में, यूएन एजेंसी ने सचल स्वास्थ्य टीमों को तैनात किया है, और उन्हें मानसिक स्वास्थ्य व संरक्षण सेवाएँ प्रदान की जा रही हैं. साथ ही, सामूहिक केन्द्रों में गरिमा किट वितरित की गई हैं और स्थिति का आकलन किया जा रहा है.