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'दुनिया, स्पष्टता के लिए आपको देख रही है', AI विशेषज्ञों के लिए महासचिव का सन्देश

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट में बोलते हुए अंतर्राष्ट्रीय एआई शासन में विज्ञान की भूमिका और सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए साक्ष्य आधारित नीतियों की आवश्यकता पर चर्चा की।
United Nations/Ishan Tankha
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश, नई दिल्ली में 'एआई इम्पैक्ट समिट' में एआई के लिए विज्ञान-आधारित संचालन व्यवस्था पर अपने विचार प्रस्तुत कर रहे हैं.

'दुनिया, स्पष्टता के लिए आपको देख रही है', AI विशेषज्ञों के लिए महासचिव का सन्देश

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) पर विशेषज्ञों के नए स्वतंत्र समूह की पहली बैठक में कहा है कि यह सुनिश्चित करना उनका दायित्व है कि इस टैक्नॉलॉजी को मानवता की भलाई के लिए उपयोग में लाया जाए. 

यूएन महासभा ने हाल ही में एआई पर स्वतंत्र अन्तरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल के लिए विश्व भर से 40 विशेषज्ञों के नाम को स्वीकृति दी थी, जो एआई में निहित अवसरों, जोखिमों, और सामाजिक प्रभावों का अध्ययन व निष्कर्षों को साझा करेंगे.

एआई के क्षेत्र में विशेषज्ञता के आधार पर इन नामों को चुना गया है, जोकि भौगोलिक प्रतिनिधित्व व लैंगिक सन्तुलन को ध्यान में रखते हुए चयनित किए गए हैं.

इनमें 19 महिलाएँ व 21 पुरुष हैं, जिनमें ब्रिटेन की सोनिया लिविन्गस्टन (लंदन स्कूल ऑफ़ इकॉनॉमिक्स में प्रोफ़ेसर); भारत के बालारामन रवीन्द्रन (आईआईटी मद्रास में डेटा विज्ञान व एआई विभाग के प्रमुख); और मारिया रेस्सा (प्रख्यात पत्रकार व नोबेल शान्ति पुरस्कार विजेता) हैं.

उनका दायित्व, एआई के सम्बन्ध में ज्ञान की खाई को दूर करना और इस महत्वपूर्ण टैक्नॉलॉजी से अर्थव्यवस्थाओं व समाजों पर हो रहे वास्तविक प्रभावों पर जानकारी जुटाना है, ताकि सभी देशों तक इसके लाभ पहुँचाए जा सकें.

महासचिव गुटेरेश ने कहा कि “व्यक्तिगत रूप से आप विविध क्षेत्रों और अनुशासनों से हैं, और आपके पास एआई व उससे सम्बन्धित विषयों की असाधारण विशेषज्ञता है. सामूहिक तौर पर, आप कुछ ऐसा प्रदर्शित करते हैं, जिसे इस दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा है.”

ये विशेषज्ञ किसी सरकार, कम्पनी या संस्थान का हिस्सा नहीं है और उनके वैज्ञानिक आकलन स्वतंत्र होंगे.

यूएन प्रमुख ने ध्यान दिलाया कि एआई, बेहद तेज़ गति से आगे बढ़ रही है और कोई देश, कोई कम्पनी या शोध क्षेत्र, केवल अपने दम पर पूरी तस्वीर को नहीं देख सकती है. इसलिए, दुनिया को यह आशा है कि आप स्पष्टता प्रदान करेंगे.

“दुनिया को जल्द से जल्द एक साझा, कृत्रिम बुद्धिमता की एक वैश्विक समझ की आवश्यकता है, जोकि विचारधारा में नहीं बल्कि विज्ञान पर आधारित हो.”

बहुत कुछ दाँव पर लगा है

आने वाले वर्षों व दशकों में, एआई, शान्ति व सुरक्षा, मानवाधिकारों, टिकाऊ विकास को आकार देगी. इसमें अपार अवसर निहित हैं, लेकिन इस टैक्नॉलॉजी को ग़लत ढंग से समझे जाने की आशंका भी है.

“मैंने देखा है कि किस तरह से जब तथ्य नदारद होते हैं या फिर उन्हें तोड़ा-मरोड़ा जाता है, तो भय पनप सकता है. किस तरह से भरोसा दरकता है और विभाजन गहराता है.” 

यूएन महासचिव ने कहा कि बढ़ते भूराजनैतिक तनावों और धधकते टकरावों के इस दौर में, साझा समझ को विकसित करना आवश्यक और एआई का सुरक्षित व ज़िम्मेदारी भरा इस्तेमाल बहुत अहम है. 

उन्होंने आगाह किया कि एआई तेज़ी से विकसित हो रही है और यह समय के साथ की जाने वाली दौड़ है. “भविष्य में हम कभी इतना धीरे नहीं चल पाएंगे, जितना हम अभी चल रहे हैं.”

महासचिव ने इस विषय में यूएन की अन्य पहल का उल्लेख किया, जिनमें एआई पर उच्चस्तरीय परामर्श समूह भी है, जोकि एआई से जुड़े नीतिगत मुद्दों पर सक्रिय है. उन्होंने कहा कि इस पृष्ठभूमि में, विशेषज्ञों के इस स्वतंत्र पैनल को शून्य से शुरुआत नहीं करनी है.