अफ़ग़ानिस्तान की सीमाओं पर बढ़ती असुरक्षा, लाखों लोगों के लिए सहायता प्रयासों पर असर
विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने आगाह किया है कि अफ़ग़ानिस्तान की पूर्वी और दक्षिणी सीमाओं पर पाकिस्तान के साथ हो रही सैन्य झड़पों और पश्चिमी सीमा पर ईरान में हिंसक टकराव की वजह से देश में असुरक्षा गहरा रही है और मानवीय परिस्थितियाँ जटिल होती जा रही हैं. यूएन एजेंसी के अनुसार, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में नए सिरे से भड़की लड़ाई से उन स्थानीय समुदायों पर गहरा असर हुआ है, जो पहले से ही पिछले कई वर्षों से सम्वेदनशील स्थिति में जीवन गुज़ार रहे हैं.
अफ़ग़ानिस्तान में WFP के प्रतिनिधि और देशीय निदेशक जॉन ऐलिफ़ ने बैंकॉक से जानकारी देते हुए बताया कि अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमावर्ती क्षेत्र क़रीब 2,400 किलोमीटर तक फैला हुआ है, जोकि उसके लगभग एक-तिहाई प्रान्तों से होकर गुज़रता है.
26 फ़रवरी के बाद से अब तक, दोनों देशों को अलग करने वाली सीमा, 'डूरन्ड लाइन' पर भड़की हिंसा से लगभग 20 हज़ार परिवार विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं.
सीमा पार सैन्य झड़पों, हवाई और ज़मीनी हमलों का असर नांगरहार, नूरिस्तान, कुनार, पकतिका और कन्दहार समेत अन्य प्रान्तों के 30 से अधिक ज़िलों पर हुआ है.
उन्होंने बताया कि इन प्रान्तों में सुरक्षा हालात बिगड़ने के कारण आपात खाद्य सहायता, सामाजिक सुरक्षा, स्कूल में खाद्य व्यवस्था और आजीविका से जुड़ी गतिविधियाँ अस्थाई रूप से स्थगित कर दी गई हैं. इससे क़रीब 1.6 लाख लोग आपात खाद्य सहायता से वंचित हो गए हैं.
पिछले वर्ष 31 अगस्त को, पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में आए भूकम्प से सबसे ज़्यादा प्रभावित पहाड़ी इलाक़ों, विशेषकर कुनार और नांगरहार के समुदाय पहले से ही बेहद असुरक्षित स्थिति में थे. अब वही इलाके़ एक बार फिर हिंसा की जद में हैं और सबसे अधिक जोखिम का सामना कर रहे हैं.
इन क्षेत्रों में पहले से ही गम्भीर खाद्य असुरक्षा की स्थिति थी. प्रभावित क्षेत्रों के आधे से अधिक इलाक़ों में ‘आपात स्तर’ पर भूख व्याप्त है, जबकि 4 प्रान्तों में अत्यधिक गम्भीर कुपोषण का स्तर बेहद चिन्ताजनक बना हुआ है.
ईरान युद्ध की मार
उधर, अफ़ग़ानिस्तान की पश्चिमी सीमा पर ईरान में इसराइली व अमेरिकी हमलों से भड़के हिंसक टकराव की वजह से बड़ी संख्या में अफ़ग़ान लोगों की वापसी की आशंका जताई गई है.
WFP प्रतिनिधि ने ध्यान दिलाया कि जून 2025 में भी इसी तरह की परिस्थितियों के दौरान बड़ी संख्या में अफ़ग़ान शरणार्थी अपने देश लौटे थे.
जॉन ऐलिफ़ ने, 36 वर्षीय सईद अज़ीज़ का उदाहरण देते हुए बताया कि ईरान से लौटने के बाद उनके पास न घर है, न रोज़गार. वह चोट के कारण काम करने में असमर्थ हैं और देश में महिलाओं पर लगी पाबन्दियों की वजह से, उनकी पत्नी भी काम नहीं कर पा रही है, अब उनका परिवार पूरी तरह WFP की सहायता पर निर्भर है.
WFP ने 2025 में, ईरान और पाकिस्तान की सीमाओं पर लौटने वाले लगभग 5 लाख लोगों को नकद सहायता, पोषक बिस्किट और पोषणयुक्त खाद्य सामग्री मुहैया कराई थी. आँकड़ों के अनुसार, 2025 में ही ईरान और पाकिस्तान से 25 लाख से अधिक लोग अफ़ग़ानिस्तान लौटे थे.
इससे पहले, हाल ही में एक अनुमान में आगाह किया गया था कि साल 2026 में भी, इसी स्तर पर लोगों की देश वापसी की सम्भावना, लेकिन सैन्य झड़पों की वजह से हालात और गम्भीर रूप धारण कर सकते हैं.
तत्काल खाद्य सहायता की ज़रूरत
उन्होंने बताया कि अफ़ग़ानिस्तान में खाद्य असुरक्षा की स्थिति, इस समय दुनिया के सबसे गम्भीर भूख संकटों में है. देश का हर तीसरा नागरिक यानि लगभग 1.74 करोड़ लोग तत्काल खाद्य सहायता के ज़रूरतमन्द हैं.
वर्ष 2026 में लगभग 37 लाख बच्चों को कुपोषण के इलाज की आवश्यकता होने का अनुमान है.
यूएन खाद्य एजेंसी ने चेतावनी दी कि मौजूदा वित्तीय स्थिति को देखते हुए, ईरान और पाकिस्तान से लौट रहे परिवारों तथा सीमाओं पर चल रही झड़पों के कारण देश के भीतर विस्थापित लोगों तक पर्याप्त सहायता पहुँचा पाना कठिन होगा.
WFP निदेशक जॉन ऐलिफ़ ने कहा कि विश्व खाद्य संगठन, इस सर्दी में भी ज़रूरतमन्दों के केवल एक छोटे हिस्से तक ही खाद्य सहायता पहुँचा सका है. अप्रैल 2026 तक आपात सहायता अभियानों के लिए धन समाप्त हो सकता है, जिससे लाखों लोगों के लिए जीवनरक्षक सहायता रुकने का ख़तरा है.
आगामी 6 महीनों के लिए WFP को 31.3 करोड़ अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता है. यूएन एजेंसी ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से अपने वादों को निभाने की अपील करते हुए कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान को इस गम्भीर संकट की घड़ी में अकेला नहीं छोड़ना होगा.