ईरान: स्कूली छात्राओं की मौत पर क्षोभ, हिंसा से हज़ारों लोग विस्थापन के लिए मजबूर
ईरान के विरुद्ध इसराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के हवाई हमले लगातार चौथे दिन भी जारी हैं और मध्य पूर्व क्षेत्र में स्थित 12 देश अस्थिरता, तनाव व हमलों की चपेट में है. संयुक्त राष्ट्र ने भीषण हिंसक टकराव की वजह से विस्थापन और मानवीय सहायता आवश्यकताओं में उछाल की चेतावनी दी है और आम नागरिकों की रक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है.
यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय की प्रवक्ता रवीना शमदासानी ने हिंसक टकराव के दौरान ईरान के मिनाब शहर में लड़कियों के एक प्राथमिक स्कूल के हमले की चपेट में आने पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्राओं की मौत हुई है.
“बच्चे, छोटी लड़कियाँ... स्कूली दिन की शुरुआत में इस तरह मारी जा रही है, उनके बस्तों पर ख़ून के धब्बे हैं. यह पूरी तरह से भयावह है.”
“यदि कोई तस्वीर इस हिंसक टकराव के विध्वंस, हताशा, बेतुकेपन और क्रूरता को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं, तो वे यही तस्वीरें हैं.”
मानवाधिकार कार्यालय उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने इस हिंसक टकराव से आम लोगों व नागरिक प्रतिष्ठानों पर हुए असर पर गहरी स्तब्धता व्यक्त की है और मिनाब में हुए हमले की परिस्थितियों की तुरन्त, निष्पक्ष जाँच कराए जाने की मांग की है.
“इसकी जाँच की ज़िम्मेदारी उन सैन्य बलों की है, जिन्होंने ये हमला किया. हम उनसे अपने निष्कर्षों को सार्वजनिक करने की मांग और पीड़ितों के लिए जवाबदेही व न्याय सुनिश्चित करते हैं.”
मानवाधिकार कार्यालय प्रवक्ता रवीना शमदासानी ने कहा कि यदि यह साबित हुआ कि ये हमले आम नागरिकों या नागरिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर, या अंधाधुंध किए गए तो ये अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून का गम्भीर उल्लंघन है और इसे युद्ध अपराध की श्रेणी में रखा जा सकता है.
12 देश टकराव की चपेट में
इसराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरान पर शनिवार को हवाई हमले शुरू होने के बाद से अब तक, ईरान ने मध्य पूर्व क्षेत्र में जवाबी हमले किए हैं, जिसमें क़तर, बहरीन, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात लगभग 12 देश चपेट में आए हैं.
इन देशों में घर, व्यवसाय, हवाई अड्डे और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को गहरी क्षति पहुँची है.
OHCHR प्रवक्ता ने ईरान सरकार द्वारा शासन का विरोध करने वाले और असहमति जताने वाले नागरिकों के विरुद्ध घातक बल प्रयोग की पृष्ठभूमि को देखते हुए, उनकी स्थिति पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है.
उन्होंने ईरानी प्रशासन से बुनियादी स्वतंत्रताओं की रक्षा करने की अपील और अति-आवश्यक सूचनाओं की उपलब्धता को सीमित करने की आलोचना की है. फ़िलहाल, ईरान में इंटरनैट सेवाएँ ठप हैं.
लेबनान में फिर विस्थापन
लेबनान में, हिज़बुल्लाह के सशस्त्र चरमपंथियों ने भी इस हिंसक टकराव में दख़ल दी है, जिसके बाद इसराइल ने दक्षिणी लेबनान में बमबारी की है.
यूएन शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के प्रवक्ता बाबर बलोच ने बताया कि दक्षिणी लेबनान, बेका और बेरूत के दक्षिणी इलाक़ों में बड़े पैमाने पर लोगों के विस्थापित होने की जानकारी है. इसराइल ने लेबनान के 53 गाँवों में स्थानीय निवासियों को जगह खाली करने की चेतावनी दी है और देश के विभिन्न हिस्सों में भीषण हवाई कार्रवाई की है.
UNHCR के अनुसार, सोमवार तक क़रीब 30 हज़ार लोगों को सामूहिक आश्रय व्यवस्था के लिए पंजीकृत किया गया. अनेक अन्य सड़कों पर अपनी गाड़ियों में सो रहे हैं या फिर ट्रैफ़िक जाम में फँसे हैं. वे दक्षिणी लेबनान से राजधानी बेरूत पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं.
समाचार माध्यमों के अनुसार, उत्तरी इसराइल पर हिज़बुल्ला द्वारा किए गए हमलों के बाद मंगलवार को इसराइली सैन्य बलों ने दक्षिणी लेबनान में प्रवेश किया है.
यूएन एजेंसी प्रवक्ता बाबर बलोच ने बताया कि हिंसक टकराव से प्रभावित देशों में पहले से ही लाखों शरणार्थियों और आन्तरिक रूप से विस्थापितों ने शरण ली हुई है. नए सिरे से भड़की हिंसा और विस्थापन से मेज़बान समुदायों की क्षमता पर दबाव गहराने की आशंका है.