हिंसक टकराव के दौरान बच्चों की शिक्षा: टैक्नॉलॉजी उपायों को साथ लेकर चलने का आग्रह
विश्व भर में, हर 5 में से 1 बच्चा या तो हिंसक टकराव से प्रभावित क्षेत्र में रहने के लिए मजबूर है या फिर वहाँ से भागने की कोशिश कर रहा है. यानि 47 करोड़ से अधिक बच्चे. ‘बच्चे, टैक्नॉलॉजी, और हिंसक टकरावों में शिक्षा’ के विषय पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक बैठक में इसी विषय पर चर्चा हुई, जिसमें हिंसक टकरावों में फँसे और पढ़ाई-लिखाई से वंचित बच्चों तक गुणवत्तापरक शिक्षा पहुँचाने के उपायों पर ध्यान केन्द्रित किया गया.
मार्च महीने के लिए सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष देश, संयुक्त राज्य अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रम्प ने इस बैठक की अध्यक्षता की. अतीत में पहले भी प्रथम महिलाओं ने सुरक्षा परिषद की बैठकों को सम्बोधित किया है, लेकिन यह पहला अवसर था जब अमेरिका की प्रथम महिला ने औपचारिक रूप से चर्चा की अध्यक्षता की.
राजनैतिक एवं शान्तिनिर्माण मामलों के लिए यूएन अवर महासचिव रोज़मैरी डीकार्लो ने प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह चर्चा एक, आसाधारण रूप से प्रासंगिक क्षण में हो रही है.
“दूसरे विश्व युद्ध के बाद से, दुनिया सबसे अधिक संख्या में सशस्त्र टकरावों की गवाह बन रही है और पिछले कई दशकों में मृतक आम नागरिकों के सर्वाधिक आँकड़े की भी.”
उन्होंने कहा कि जब हिंसक टकराव भड़कते हैं, तो बच्चे उससे सर्वाधिक प्रभावित होने वाली आबादी में होते हैं. यह एक ऐसी वास्तविकता है, जिसे पिछले कुछ दिनों में इसराइल, संयुक्त अरब अमीरात, क़तर, बहरीन और ओमान में महसूस किया गया है.
सैन्य टकराव की वजह से वहाँ स्कूल बन्द हो गए हैं और ऑनलाइन पढ़ाई-लिखाई, ‘रिमोट लर्निंग’ की व्यवस्था की गई है.
यूएन अवर महासचिव ने ईरान के मिनाब शहर में बमबारी की चपेट में आए एक प्राथमिक स्कूल में बड़ी संख्या में छात्राओं के मारे जाने की ख़बरों का भी उल्लेख किया. अमेरिकी प्रशासन द्वारा इस घटना के बारे में और जानकारी जुटाई जा रही है.
अधिकार हनन मामलों में उछाल
विश्व भर में, हर 5 में से 1 बच्चा, 47 करोड़ से अधिक बच्चे, या तो हिंसक टकराव से प्रभावित क्षेत्र में रहने के लिए मजबूर है या फिर वहाँ से भागने की कोशिश कर रहा है.
बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन मामलों में वृद्धि हुई है और 2023 की तुलना में 2024 में 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. बलात्कार और अन्य प्रकार की यौन हिंसा की घटनाएँ 35 प्रतिशत तक बढ़ी हैं.
रोज़मैरी डीकार्लो ने कहा कि हिंसक टकरावों में स्कूल ऐसे सुरक्षित स्थल हो सकते हैं जहाँ बच्चों को सैनिकों के रूप में भर्ती होने, तस्करी का शिकार होने और शोषण से बचाया जा सके.
“स्कूलों में स्वास्थ्य व स्वच्छता की रक्षा हो सकती है, मनोसामाजिक समर्थन मिलता है और परिवारों को अति-आवश्यक सेवाओं से जोड़ा जाता है.”
इसके बावजूद, स्कूलों, शिक्षकों व शिक्षा सम्बन्धी बुनियादी ढाँचे को निरन्तर हिंसा झेलनी पड़ रही है. वर्ष 2024 में, संयुक्त राष्ट्र ने स्कूलों व अस्पतालों पर 2,374 हमलों की पुष्टि की, जबकि वास्तविक आँकड़ा इससे कहीं अधिक होने की आशंका है.
वर्ष 2024 में सबसे अधिक हमले यूक्रेन, इसराइल, क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े और हेती में हुए.
टैक्नॉलॉजी उपायों पर बल
अवर महासचिव डीकार्लो के अनुसार, डिजिटल पढ़ाई-लिखाई के ज़रिए उन इलाक़ों में बच्चों के लिए शिक्षा की व्यवस्था की जा सकती है, जहाँ स्कूल बन्द हैं, उन तक पहुँच पाना कठिन है, या जहाँ छात्र हिंसा से बचने के लिए भाग रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र ने इन उपायों के लिए समन्वित ढंग से निवेश किया है.
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक-निजी साझीदारी, जब ठोस नैतिक फ़्रेमवर्क की बुनियाद पर टिकी हो, तो उससे नवाचारी शिक्षा टैक्नॉलॉजी उपायों का विस्तार किया जा सकता है.
उदाहरणस्वरूप, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की ‘Learning Passport’ नामक पहल को माइक्रोसॉफ़्ट के साथ मिलकर विकसित किया गया था, जोकि 47 देशों में 1 करोड़ बच्चों को मोबाइल लर्निंग प्लैटफ़ॉर्म के ज़रिए शिक्षा प्रदान कर रही है.
वहीं, Instant Network Schools कार्यक्रम को यूएन शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) और वोडाफ़ोन फ़ाउंडेशन ने शुरू किया था, जिसके ज़रिए शरणार्थियों व शिक्षकों को डिजिटल शैक्षणिक सामग्री व इंटरनैट मुहैया कराया जाता है. इससे दक्षिण सूडान और काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य में हाशिएकरण का शिकार आबादी तक शिक्षा पहुँचाना सम्भव हुआ है.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि टैक्नॉलॉजी की मदद से शिक्षा को सर्वाधिक निर्बलों तक पहुँचाया जा सकता है और इसलिए डिजिटल शिक्षा के ज़रिए बाल संरक्षण को बढ़ावा देना होगा और हर चरण में जोखिमों का आकलन करना होगा.
“हमें डिजिटल जगत में बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए क़ानूनी व नीतिगत फ़्रेमवर्क को मज़बूती देनी होगी...” इस प्रक्रिया में टैक्नॉलॉजी कम्पनियों की अहम भूमिका है.
उन्होंने सचेत किया कि हिंसक टकराव के दंश से बच्चों को बचाने के लिए सबसे कारगर उपाय है कि युद्धों की रोकथाम व उनका अन्त किया जाए और लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी को एक साथ मिलकर प्रयास करने होंगे.
पढ़ाई-लिखाई से राष्ट्र के भविष्य की रक्षा
संयुक्त राज्य अमेरिका की प्रथम महिला, मेलानिया ट्रम्प ने अपने सम्बोधन में कहा कि चिरस्थाई शान्ति को तभी हासिल किया जा सकता है जब सभी समाजों में ज्ञान व समझ की महत्ता को पूर्ण रूप से समझा जाए.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि उनका देश विश्व भर में बच्चों के समर्थन में खड़ा है. किसी राष्ट्र के नेताओं द्वारा शिक्षा को जितना महत्व दिया जाता है, उसी से उनके देश में विश्वास प्रणालियों की बुनियाद को आकार देने में मदद मिलती है.
“जो राष्ट्र पढ़ाई-लिखाई को पवित्र बनाता है, वो अपनी किताबों, अपनी भाषा, अपने विज्ञान और भाषा की रक्षा करता है. इससे उसके भविष्य की रक्षा होती है.” इससे समझ, नैतिक तर्कक्षमता और अन्य के प्रति सहिष्णुता बढ़ती है.
प्रथम महिला मेलानिया ट्रम्प के अनुसार, बुद्धिमता की नींव पर तैयार संस्कृतियों में पले-बढ़े बच्चों में विश्वास, नवाचार विकसित होता है और वे एक गहरी मूल्य प्रणाली को बना कर रखते हैं. उनके ज्ञान से अन्य लोगों के लिए भावनात्मक समझ को प्रोत्साहन मिलता है, जोकि भूगोल, धर्म, नस्ल, लिंग से परे तक जाती है.
वहीं, अज्ञान की बुनियाद पर आधारित समाजों में बड़े होने वाले बच्चे अक्सर अव्यवस्था और कभी-कभी टकरावों से घिरे होते हैं. मेलानिया ट्रम्प ने कहा कि जब कोई राष्ट्र, विचारों पर पाबन्दी थोपता है तो अपने भविष्य पर ही अंकुश लगाता है.