9 करोड़ से अधिक बच्चों की श्रवण क्षमता में कमी, रोकथाम है सम्भव
विश्व भर में, 5 से 19 वर्ष की आयु के साढ़े 9 करोड़ से अधिक बच्चे व किशोर, ठीक से नहीं सुन पाने और ऐसी कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं, जिनका न तो उचित समाधान हुआ है और न ही आवश्यक सेवाएँ उपलब्ध हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने, 3 मार्च को 'विश्व श्रवण दिवस' के अवसर पर, देशों की सरकारों, नागरिक समाज और साझीदार संगठनों से ठोस क़दम उठाने का आग्रह किया है, ताकि बच्चों की श्रवण क्षमता की रक्षा की जा सके.
इस वर्ष 'विश्व श्रवण दिवस' की थीम है: “सामुदायिक स्तर से कक्षाओं तक: सभी बच्चों के लिए श्रवण देखभाल”.
हाल ही में, WHO और 'Global Burden of Disease' के आँकड़े दर्शाते हैं कि यह समस्या विशेष रूप से कम और मध्यम आय वाले देशों में अधिक है, ख़ासकर अफ़्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया के क्षेत्रों में.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने चेतावनी दी है कि पहले से सुनने की क्षमता में कमी, श्रवण समस्याओं से जूझ रहे बच्चों के लिए समय पर मदद बहुत महत्वपूर्ण है.
विशेषज्ञों का कहना है कि दवाएँ, सर्जरी, 'श्रवण सहायक सामग्री', कोकल इम्प्लांट, सांकेतिक भाषा और लूप सिस्टम या दृश्य सामग्री पर लिखित सामग्री जैसे किफ़ायती और साक्ष्यों पर आधारित उपाय और सहायक तकनीकें, दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभावों को रोक सकती हैं.
साथ ही, बच्चों को स्कूल और सामुदायिक जीवन में पूरी तरह भाग लेने में सक्षम बना सकती हैं.
WHO की नेत्र, कान और मौखिक स्वास्थ्य टीम की प्रमुख डॉक्टर शैली चढ्ढा ने कहा कि समुदाय और स्कूल, बच्चों तक रोकथाम और प्रारम्भिक देखभाल पहुँचाने के लिए स्वाभाविक और प्रभावी माध्यम हैं.
"अब जब व्यावहारिक और किफ़ायती समाधान उपलब्ध हैं, किसी भी बच्चे को अनदेखी के कारण कान और श्रवण समस्याओं की वजह से पीछे नहीं रहना चाहिए."
सम्पूर्ण विकास पर असर
ग़ौरतलब है कि सुनने की समस्याओं का इलाज न होना केवल बच्चे की सुनने की क्षमता को प्रभावित नहीं करता, बल्कि उसके पूरे विकास पर असर डालता है.
इससे बच्चे के बोलने और भाषा सीखने में देरी हो सकती है, सोचने-समझने की क्षमता पर असर पड़ सकता है और सामाजिक मेलजोल भी कम हो जाता है. फलस्वरूप, पढ़ाई में पिछड़ना, आगे चलकर कामकाजी अवसरों में कमी और आर्थिक रूप से पिछड़ना जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं.
इसलिए, टाली जा सकने वाली श्रवण समस्याओं के समाधान निकालना, जल्दी पहचान करना और समय पर उचित उपचार देना, बच्चों के विकास और भविष्य के लिए बहुत ज़रूरी है.
अगर, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में कान सम्बन्धी और श्रवण सेवाएँ मजबूत हों, तो बच्चे को समय पर और सही देखभाल मिल सकती है, जिससे उनके विकास और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है.
रोकथाम सम्भव
WHO के गै़र-संचारी रोग एवं मानसिक स्वास्थ्य विभाग की अन्तरिम निदेशक डेवोरा केस्टेल ने बताया, “WHO के अनुमान के अनुसार, लगभग 60 प्रतिशत कान और श्रवण समस्याओं को, स्थानीय स्वास्थ्य केन्द्रों में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी, आवश्यक उपकरण, दवाओं और श्रवण सहायक उपलब्ध होने पर रोका या इलाज किया जा सकता है.”
“फिर भी आज, 80 प्रतिशत से अधिक ऐसे लोग जिन्हें कान और श्रवण देखभाल की आवश्यकता है, इन सेवाओं तक पहुँच नहीं पा रहे हैं. इसके गम्भीर परिणाम बच्चों की शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य की जीवनयात्रा पर पड़ते हैं.”
WHO द्वारा उठाए गए क़दम
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी, बच्चों में सुनने की क्षमता में कमी को रोकने के लिए स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रमों के माध्यम से कान और श्रवण सम्बन्धी आदतों को बढ़ावा दे रही है. इसके तहत, स्कूल और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में कान और श्रवण जाँच को शामिल किया गया है.
साथ ही, शिक्षकों, माता-पिता, स्वास्थ्य कर्मियों और बच्चों को सही जानकारी और व्यावहारिक उपकरण प्रदान करके उन्हें सशक्त बनाया जा रहा है, ताकि वे श्रवण सम्बन्धी समस्याओं की पहचान और देखभाल करने में सक्षम हो सकें. WHO द्वारा देशों को कान और श्रवण जाँच देखभाल में समर्थन देने के लिए तकनीकी संसाधन भी प्रदान किए जाते हैं.
इनमें श्रवण जाँच के कार्यान्वयन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलू, स्कूल आयु के बच्चों के लिए दृष्टि और श्रवण जाँच के लिए दिशा-निर्देश, और कम व मध्यम आय वाले क्षेत्रों में हियरिंग एड (सुनने में सहायक सामग्री) सेवा प्रदान करने के तरीके़ शामिल हैं.
ये संसाधन बच्चों में समय पर पहचान और देखभाल सुनिश्चित करने के लिए तैयार किए गए हैं.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने, स्वास्थ्य कर्मियों को सामान्य कान और श्रवण समस्याओं की पहचान और प्रबन्धन करने के कौशल सिखाने के लिए प्रशिक्षण संसाधन भी विकसित किए हैं, ताकि आवश्यक होने पर मरीज़ों को उच्च स्तर की देखभाल के लिए, दीगर चिकित्सा के लिए भेजा जा सके.
इन उपकरणों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में शामिल करने से श्रवण देखभाल तक पहुँच में महत्वपूर्ण सुधार किया जा सकता है.
इसके साथ ही, WHOears नामक एक मुफ़्त मोबाइल ऐप भी उपलब्ध होगी, जो स्कूलों और सामुदायिक स्तर पर श्रवण जाँच कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन में सहायता करेगी और बच्चों तक पहुँच को व्यापक बनाएगी.
इस ऐप के माध्यम से, प्रशिक्षित व्यक्ति, स्कूलों और समुदायों में बच्चों की श्रवण जाँच कर सकेंगे, जिससे क्लीनिक से परे भी सेवाएँ उपलब्ध होंगी और शुरुआती चरण में ही पहचान किया जाना सम्भव होगा.