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ईरान संकट: बढ़ते सैन्य टकराव के बीच परमाणु जोखिम, IAEA ने किया संयम बरतने का आग्रह

ईरान की राजधानी तेहरान का एक आश्चर्यजनक सूर्यास्त दृश्य, जिसमें प्रतिष्ठित इमारतों के साथ इसकी क्षितिज रेखा और नारंगी आकाश के खिलाफ सिल्हूट किया गया मिलाद टॉवर दिखाया गया है।
© Unsplash/Hosein Charbaghi
ईरान की राजधानी तेहरान का दृश्य. (फ़ाइल)

ईरान संकट: बढ़ते सैन्य टकराव के बीच परमाणु जोखिम, IAEA ने किया संयम बरतने का आग्रह

शान्ति और सुरक्षा

इसराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरान पर की गई बमबारी के बाद मध्य पूर्व में भड़के हिंसक टकराव का यह तीसरा दिन है और संयुक्त राष्ट्र ने लड़ाई को रोकने के लिए सम्वाद व संयम बरतने का अनुरोध किया है. इस बीच, अन्तरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने भी परमाणु सुरक्षा के लिए बढ़ते ख़तरों पर चिन्ता व्यक्त करते हुए, कूटनैतिक उपाय अपनाने पर बल दिया है.

IAEA महानिदेशक रफ़ाएल ग्रोस्सी ने ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में बताया कि अभी तक, बुशहर परमाणु ऊर्जा प्लांट, तेहरान रीसर्च रिएक्टर और परमाणु ईंधन सम्बन्धी किसी अन्य केन्द्र समेत ईरान के किसी परमाणु प्रतिष्ठान को क्षति पहुँचने का संकेत नहीं है.

IAEA प्रमुख रफ़ाएल ग्रोस्सी ने कहा कि सैन्य टकराव बढ़ने पर परमाणु हादसे का जोखिम है, चूँकि ईरान समेत मध्य पूर्व क्षेत्र के अनेक देशों में सैन्य हमले हुए हैं, और वहाँ परमाणु ऊर्जा प्लांट व परमाणु शोध रिएक्टर स्थित हैं.  

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उन्होंने IAEA बोर्ड की एक विशेष बैठक को सम्बोधित करते हुए बताया कि बमबारी शुरू होने के बाद से अब तक, ईरान की सीमा से लगे देशों में विकिरण का स्तर फ़िलहाल सामान्य है. 

उधर, जिनीवा स्थित मानवाधिकार परिषद में, ईरान के जवाबी बैलेस्टिक व ड्रोन हमलों को झेल रहे खाड़ी क्षेत्र में स्थित देशों ने सम्प्रभुता के हनन की निन्दा की है और तेहरान से आग्रह किया है कि क्षेत्रीय स्थिरता को जोखिम में डालने वाले इन क़दमों को रोकना होगा.

इसराइल के अलावा बहरीन, जॉर्डन, ओमान, कुवैत, क़तर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में मिसाइल हमलों की जानकारी है. वहीं, लेबनान से हिज़बुल्लाह के हमलों के बाद इसराइल द्वारा सोमवार को वहाँ सैन्य कार्रवाई की गई है.

स्वास्थ्य केन्द्र, हमले की चपेट में

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, ईरान पर शनिवार को शुरू हुए हमलों में अब तक 550 आम नागरिक मारे जा चुके हैं. तेहरान में स्थित गाँधी अस्पताल भी बमबारी की चपेट में आया है, जहाँ रविवार को हमला होने की ख़बर है. 

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने सोशल मीडिया पर अपने सन्देश में कहा कि ये घटना हमें ध्यान दिलाती है कि स्वास्थ्य केन्द्रों को हिंसक टकराव की चपेट में आने से बचाने के लिए हरसम्भव प्रयास किए जाने होंगे.

“स्वास्थ्य केन्द्रों को अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून के तहत संरक्षण प्राप्त है.”

संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधि शहाद मटार ने जिनीवा में यूएन मानवाधिकार परिषद को सम्बोधित करते हुए आरोप लगाया कि 28 फ़रवरी से अब तक, ईरान द्वारा किए गए हमलों में 3 आम नागरिक मारे जा चुके हैं और 58 अन्य घायल हुए हैं.

“खुलेआम किए गए ये कायरतापूर्ण हमले, हमारी सम्प्रभुता, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून व यूएन चार्टर का खुला उल्लंघन है.”

कुवैत के प्रतिनिधि नासेर अब्दुल्लाह अलहायेन ने भी ईरान के मिसाइल हमलों की निन्दा की है और अपने क्षेत्र व नागरिकों की रक्षा करने के अधिकार को दोहराया है, जोकि यूएन चार्टर के अनुच्छेद 51 के अनुरूप है.

टकराव बढ़ने की आशंका

ईरान के प्रतिनिधि अली बाहरेनी ने मानवाधिकार परिषद को बताया कि ईरानी प्रतिनिधि के अनुसार, देश के विरुद्ध जिस तरह से यह अवैध सैन्य आक्रामकता को अंजाम दिया जा रहा है, वह दर्शाता है कि मानवाधिकारों के सिद्धान्तों पर खुली ताक़त के दबदबे को दर्शाती है.

उन्होंने कहा कि शनिवार को दक्षिणी क्षेत्र में स्थित मिनाव में लड़कियों के एक प्राइमरी स्कूल पर हुए हमले में 160 से अधिक छात्राओं की मौत हुई है. 

ईरानी प्रतिनिधि ने कहा कि उनके देश पर ताबड़तोड़, सीमा का अतिक्रमण करके निरन्तर हमले हो रहे हैं. इन हमलों में सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़मेनेई भी मारे गए हैं.  

“हाल के दिनों में, स्कूलों पर बमबारी हुई है, अस्पतालों पर बिना कोई भेद किए हमले हुए हैं, धार्मिक व आध्यात्मिक नेता समेत सिविलयन नेताओं की हत्याएँ की गई हैं, और ईरानी रैड क्रेसेन्ट के मुख्यालय के साथ-साथ अनेक अन्य ग़ैर-सैन्य इमारतों को ध्वस्त कर दिया गया है.”

इससे पहले, ईरान ने जिनीवा में निरस्त्रीकरण पर यूएन की बैठक में हिस्सा ले रहे देशों के नाम एक पत्र में बताया था कि जब तक यह आक्रामकता जारी रहेगी, ईरान अपनी रक्षा के अधिकार का उपयोग करेगा. 

जिनीवा में यूएन मिशन में ईरान के स्थाई प्रतिनिधि ने कहा कि अमेरिकी सेना के सभी ठिकाने, केन्द्र व सम्पत्ति, इस आक्रामकता भरे युद्ध में जायज़ निशाने हैं.