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ईरान: लड़कियों के प्राइमरी स्कूल पर बमबारी, 'मानवतावादी क़ानून का गम्भीर उल्लंघन'

ईरान की राजधानी तेहरान का दृश्य. (फ़ाइल)
United Nations
ईरान के इसफ़हान शहर का दृश्य. (फ़ाइल)

ईरान: लड़कियों के प्राइमरी स्कूल पर बमबारी, 'मानवतावादी क़ानून का गम्भीर उल्लंघन'

संस्कृति और शिक्षा

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) ने ईरान में इसराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के सैन्य बलों के हवाई हमलों के दौरान एक प्राथमिक स्कूल पर हुई बमबारी को अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून का गम्भीर उल्लंघन क़रार दिया है.

यूनेस्को ने रविवार को सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म पर जारी अपने वक्तव्य में इन सैन्य हमलों से हुई जान-माल की क्षति पर गहरी चिन्ता जताई है, जोकि रविवार को भी जारी हैं, और जिनसे मध्य पूर्व क्षेत्र में स्थिति बहुत नाज़ुक है.

समाचार माध्यमों के अनुसार, दक्षिणी ईरान के मिनाब में लड़कियों का एक प्राइमरी स्कूल इस मिसाइल हमले में ध्वस्त हो गया, जिसमें लगभग 100 से अधिक लोगों की मौत हुई है और अनेक घायल हुए हैं. इनमें अधिकाँश छात्राएँ हैं.

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यूनेस्को ने ध्यान दिलाया कि पढ़ाई-लिखाई के लिए समर्पित इस स्थल को अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून के तहत संरक्षण प्राप्त है और यहाँ छात्राएँ शिक्षा पाने के लिए एकत्र हुई थीं.

शैक्षणिक संस्थाओं के विरुद्ध हमलों से, शिक्षकों व छात्राओं के जीवन के लिए ख़तरे उपजते हैं और उनका शिक्षा पाने का अधिकार कमज़ोर होता है.

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने भी गहरी चिन्ता जताई है कि इस सप्ताहांत, मध्य पूर्व में सैन्य टकराव में आई तेज़ी, इस क्षेत्र में लाखों-करोड़ों बच्चों के लिए एक गम्भीर क्षण है.

यूनीसेफ़ ने मिनाब में लड़कियों के स्कूल पर हुए हमले, और बिगड़ते हालात को बच्चों के लिए जोखिमपूर्ण बताया है. संगठन ने दोहराया है कि आम नागरिकों और स्कूलों समेत अन्य नागरिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जाना, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन है.

संयुक्त राष्ट्र शान्ति दूत और नोबेल शान्ति पुरस्कार विजेता मलाला युसूफ़ज़ई ने भी स्कूल पर हुई बमबारी की इस घटना को हृदयविदारक बताया है. मलाला ने कहा कि आम नागरिकों की मौतें, विशेष रूप से बच्चों की, अक्षम्य है और वह इसकी बिना किसी लागलपेट के निन्दा करती हैं.

उन्होंने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में मध्य पूर्व क्षेत्र में हिंसा पर विराम लगाने की पुकार लगाई है और कहा है कि न्याय व जवाबदेही को तय किया जाना होगा.

“सभी देशों व पक्षों को अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत, आम नागरिकों व स्कूलों की रक्षा के लिए अपने दायित्वों को निभाना होगा. हर एक बच्चा, शान्ति में रहने और सीखने-सिखाने का हक़दार है.”

ग़ौरतलब है कि इसराइली और अमेरिकी सैन्य बलों द्वारा ईरान में तेहरान, इसफ़हान, क़ौम, शहरियार और तबरीज़ समेत लगभग 20 शहरों पर हमले किए गए हैं, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली ख़मेनेई, समेत कई अन्य नेतों और वरिष्ठ अधिकारियों के मारे जाने की ख़बर है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने चेतावनी दी है कि इन सैन्य हमलों और उनके जवाब में ईरान द्वारा संयुक्त अरब अमीरात, क़तर, कुवैत समेत मध्य पूर्व के अनेक देशों में किए गए हमलों से, घटनाओं के एक ऐसे सिलसिले के भड़कने का जोखिम है, जिसे फिर नियंत्रण में ला पाना किसी के बस में नहीं होगा. 

यूएन प्रमुख ने सभी पक्षों से वार्ता की मेज़ पर वापिस लौटने का आग्रह किया, विशेष रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि स्थिति को हर बिगड़ने से बचाने के लिए हरसम्भव क़दम उठाए जाने होंगे.