ईरान संकट पर सुरक्षा परिषद की आपात बैठक, किस देश ने क्या कहा
ईरान पर संयुक्त राज्य अमेरिका और इसराइल द्वारा किए गए सैन्य हमलों, और उसके बाद ईरान की जवाबी बमबारी में बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने की ख़बर है. मध्य पूर्व क्षेत्र में भड़के संकट और व्यापक टकराव की आशंकाओं के बीच शनिवार को सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई गई, जिसमें 15 सदस्य देशों में इस मुद्दे पर गहरी दरारें नज़र आईं.
ईरान: क़ानूनी बुनियाद के बिना ही किए गए हमले
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थाई प्रतिनिधि, राजदूत अमीर सईद इरावनी ने कहा कि शनिवार सुबह, अमेरिका ने इसराइल के साथ मिलकर, बिना किसी उकसावे के और पहले से मन बनाकर, ईरान के विरुद्ध आक्रामक कार्रवाई शुरू की है. पिछले कुछ महीनों में यह दूसरी बार हुआ है.
“यह केवल एक आक्रामक कृत्य नहीं है. यह एक युद्ध अपराध और मानवता के विरुद्ध अपराध है."
उन्होंने इसराइल और अमेरिका पर जानबूझकर, अनेक बड़े शहरों में नागरिक आबादी पर हमले करने का आरोप लगाया.
ईरानी राजदूत के अनुसार, बचाव के लिए किए गए हमले, आसन्न ख़तरे के दावे, और अन्य आधारहीन राजनैतिक दावे, क़ानूनी, नैतिक व राजनैतिक रूप से बेबुनियाद हैं.
फ़्राँस, ब्रिटेन और अन्य पश्चिमी देशों के प्रतिनिधियों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर जिन बातों को कहा था, ईरानी राजदूत ने उन्हें सिरे से ख़ारिज कर दिया.
इसराइल: ये हमले, आवश्यक क़दम
यूएन में इसराइल के स्थाई प्रतिनिधि राजूदत डैनी डेनॉन ने सदस्य देशों को बताया कि अस्तित्व पर मंडराते ख़तरे को रोकने के लिए ये हमले किए गए.
उन्होंने बताया कि इसराइल ने आवश्यक समझ करके यह क़दम उठाया है, चूँकि तत्कालीन सरकार ने कोई तर्कसंगत विकल्प या रास्ता नहीं छोड़ा था. अपने ही नागरिकों को जान से मार दिया गया, आवाज़ों को दबाया गया, और इसराइल को नक़्शे से मिटाने की मंशा दर्शाई गई.
मिसाइलों के ज़ख़ीरे का विस्तार किया जा रहा है, पूरे क्षेत्र में अपने समर्थक गुटों में हथियारों बाँटे गए हैं, और इसराइल को मानचित्र से मिटा देने का सपना भी दर्शाया गया है.
राजदूत डेनॉन ने बताया कि ईरान से यूरेनियम संवर्धन की प्रक्रिया को रोकने और परमाणु कार्यक्रम की पूर्ण जाँच की अनुमति देने का आग्रह किया गया था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया.
अमेरिका: आक्रामकता को नज़रअन्दाज़ नहीं किया जा सकता
अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज़ ने बताया कि ईरान पर हवाई हमले, उसकी बैलेस्टिक मिसाइल क्षमताओं में बिखराव लाने की एक शुरुआत है. साथ ही, अन्तरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में अस्थिरता लाने की कोशिश कर रहे जहाज़ों के विरुद्ध कार्रवाई करना और हथियारबन्द गुटों को शस्त्र देने वाली मशीनरी को तोड़ना है.
उनके अनुसार, लक्ष्य स्पष्ट है. ईरानी शासन व्यवस्था फिर कभी दुनिया को परमाणु हथियारों के ख़तरे से धमकी नहीं दे पाएगी.
माइक वॉल्ट्ज़ ने कहा कि कोई भी ज़िम्मेदार देश, निरन्तर आक्रामकता व हिंसा को बर्दाश्त नहीं कर सकता है.
“ईरान, निरन्तर अपनी अत्याधुनिक मिसाइल क्षमताओं में विस्तार कर रहा है, और परमाणु हथियारों की महत्वाकांक्षा का उन्मूलन करने में दिलचस्पी न होना, एक गम्भीर व बढ़ता हुआ ख़तरा है.
फ़्रांस का ज़ोर, क्षेत्र को शान्ति की ज़रूरत
फ्रांस के राजदूत जेरोम बोनाफोंट ने कहा कि राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने का अनुरोध किया था.
उन्होंने कहा, "इस क्षेत्र को शान्ति की आवश्यकता है. हमें ज़रूरत है कि ईरान अपने अन्तरराष्ट्रीय दायित्वों का सम्मान करे."
फ़्रांसीसी राजदूत ने तनाव कम करने का आहवान करते हुए ज़ोर दिया: "अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का सम्मान किया जाना, क्षेत्र और विश्व में दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए एक शर्त है."
उन्होंने ईरान द्वारा कई देशों के ख़िलाफ़ किए गए हमलों की "कड़ी" निन्दा की और इस बात पर ज़ोर दिया कि यदि वे देश अनुरोध करते हैं, तो फ्रांस उनकी सुरक्षा के लिए संसाधन तैनात करने के लिए तैयार है.
परमाणु कार्यक्रम
जेरोम बोनाफोंट ने कहा कि आज की घटनाएँ ईरान द्वारा परमाणु कार्यक्रम के निरन्तर प्रयास के सन्दर्भ में हो रही हैं. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ईरान ने समझौता करने के अवसर का लाभ नहीं उठाया है.
इसके बजाय, उसने अन्तरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ अपना सहयोग कम कर दिया है, जो उसके कार्यक्रम की शान्तिपूर्ण प्रकृति की गारंटी देने में सक्षम नहीं रही है.
रूस: 'सशस्त्र आक्रामकता का एक और उकसावे वाला कृत्य'
रूसी राजदूत वैसिली नेबेंज़िया ने कहा कि अमेरिका-इसराइल के हमले "एक सम्प्रभु और स्वतंत्र सदस्य देश के ख़िलाफ़ सशस्त्र आक्रामकता का एक और उकसावे वाला कृत्य हैं, जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन है."
उन्होंने कहा कि इस "ग़ैरज़िम्मेदार क़दम" ने पूरे क्षेत्र में तेज़ी से तनाव बढ़ाया है, जिसे उन्होंने "कूटनीति के साथ विश्वासघात" बताया.
उन्होंने कहा कि उनका देश, इस बैठक को, 'मध्य पूर्व स्थिति' की श्रेणी में आयोजित किए जाने को रद्द करता है. उनके देश व चीन ने इस बैठक को, 'अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा को ख़तरे' के तहत बुलाए जाने का अनुरोध किया था, और इस अनुरोध को एक पत्र के ज़रिए ईरान का समर्थन भी हासिल था.
रूसी राजदूत ने कहा कि 28 फ़रवरी को अमेरिका व इसराइल ने, ईरान के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर सैन्य हमले किए, जिनमें ईरान सरकार के नेतृत्व और परमाणु ठिकानों को निशाना घोषित किया गया.
चीन: ईरान की क्षेत्रीय अखंडता का 'सम्मान किया जाना होगा'
चीन के राजदूत फ़ू कोंग ने अमेरिका-इसराइल के हमलों को "धृष्टतापूर्ण" बताया. उन्होंने किसी भी अन्तरराष्ट्रीय विवाद को सुलझाने के लिए बल प्रयोग की धमकी की निन्दा की और "ईरान तथा अन्य क्षेत्रीय देशों की सम्प्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने" का आहवान किया.
चीन के राजदूत ने, शनिवार के हमलों के दौरान बड़े पैमाने पर नागरिक जीवन की हानि पर दुख व्यक्त करते हुए, सभी पक्षों से अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत अपने दायित्वों को पूरा करने और सैन्य कार्रवाई को तत्काल रोकने की पुकार लगाई.
उन्होंने कहा कि यह "चौंकाने वाली" बात है कि अमेरिका-इसराइल के हमले, अमेरिका व ईरान के बीच चल रही राजनयिक वार्ताओं के दौरान हुए हैं.
ब्रिटेन: क्षेत्रीय स्थिरता 'एक प्राथमिकता'
फ़रवरी के लिए सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष - ब्रिटेन के राजदूतजेम्स करियुकीने कहा, "यह मध्य पूर्व के लिए एक नाज़ुक क्षण है. क्षेत्रीय स्थिरता एक प्राथमिकता बनी हुई है."
उन्होंने आगे बताया कि अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के अनुरूप "समन्वित क्षेत्रीय रक्षात्मक अभियानों" के हिस्से के रूप में ब्रिटेन की सेना सक्रिय है और उसके विमान आसमान में हैं.
जेम्स करियुकी ने कहा, "हम जल्द से जल्द ऐसा समाधान देखना चाहते हैं जो क्षेत्र के लिए सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करे."
उन्होंने ईरान से आग्रह किया कि वह आगे के हमलों और अपने "भयावह" व्यवहार से परहेज़ करे ताकि कूटनीति का रास्ता फिर से खुल सके.
बहरीन ने 'अकारण' ईरानी हमलों की निन्दा की
बहरीन के राजदूत जमाल फ़ारेस अलरोवेई ने कहा कि उनके देश ने कभी भी "बिना किसी औचित्य के इस तरह के अकारण आक्रमण" का निशाना बनने की उम्मीद नहीं की थी.
उन्होंने ईरान द्वारा अपने देश पर महत्वपूर्ण सुविधाओं और आवासीय क्षेत्रों को निशाना बनाकर किए गए मिसाइल हमलों की कड़ी निन्दा की और इन हमलों को बहरीन की सम्प्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन बताया.
उन्होंने कहा कि इन हमलों ने अन्तरराष्ट्रीय क़ानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का घोर उल्लंघन किया है.
उन्होंने वादा किया कि बहरीन इस तरह की आक्रामकता के ख़िलाफ़ कड़ा रुख़ अपनाएगा, जिसे उन्होंने पूरे क्षेत्र की सामूहिक सुरक्षा पर हमला क़रार दिया.