ईरान पर बमबारी और जवाबी हमले, ‘अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा के लिए गम्भीर ख़तरा’
संयुक्त राज्य अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान के अनेक शहरों पर किए गए सैन्य हमलों और उनके जवाब में ईरान द्वारा संयुक्त अरब अमीरात, क़तर, कुवैत समेत मध्य पूर्व के अनेक देशों में किए गए हमलों से, घटनाओं के एक ऐसे सिलसिले के भड़कने का जोखिम है, जिसे फिर नियंत्रण में ला पाना किसी के बस में नहीं होगा. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शनिवार को ईरान संकट पर सुरक्षा परिषद की आपात बैठक को सम्बोधित करते हुए यह चेतावनी जारी की है, और इस टकराव को टालने के लिए हरसम्भव क़दम उठाए जाने की पुकार लगाई है.
फ़्राँस, बहरीन और कोलम्बिया के अनुरोध पर 'मध्य पूर्व में स्थिति' के एजेंडा के तहत सुरक्षा परिषद की यह बैठक बुलाई गई, जिसकी अध्यक्षता फ़रवरी महीने के लिए परिषद के अध्यक्ष देश ब्रिटेन ने की.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सुरक्षा परिषद में सदस्य देशों को सम्बोधित करते हुए तीन क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित किया: सिद्धान्त, तथ्य, और वर्तमान संकट से बाहर निकलने का मार्ग.
चिन्ताजनक घटनाक्रम
यूएन प्रमुख ने बताया कि मध्य पूर्व क्षेत्र में स्थिति बहुत नाज़ुक है और अपुष्ट ख़बरों का सिलसिला जारी है. अभी तक मिली जानकारी के अनुसार, ईरान में तेहरान, इसफ़हान, क़ौम, शहरियार और तबरीज़ समेत लगभग 20 शहरों पर हमले किए गए हैं.
राजधानी तेहरान में राष्ट्रपति निवास और सर्वोच्च नेता के परिसर वाले इलाक़ों में ज़ोरदार धमाकों की आवाज़ सुनी गई. इन हमलों में, अनेक वरिष्ठ अधिकारियों के मारे जाने की ख़बर है. महासचिव गुटेरेश ने इसराइली स्रोतों के हवाले से बताया कि ईरान के सर्वोच्च नेता अली ख़मेनेई भी इन हमलों में मारे गए हैं.
ईरान के वायुक्षेत्र को बन्द कर दिया गया है और देश में इंटरनैट पर पूर्ण रूप से पाबन्दी थोप दी गई है. इसराइली-अमेरिकी हमलों में बड़े पैमाने पर आम नागरिक भी हताहत हुए हैं.
ईरानी मीडिया के अनुसार, मीनाब में स्थित लड़कियों के एक स्कूल पर हुए हवाई हमले में कम से कम 85 लोगों के मारे जाने की ख़बर है. तेहरान में भी एक स्कूल में हमले में 2 लोग मारे गए हैं.
ईरान द्वारा किए गए जवाबी हमलों में अब तक इसराइल में 89 लोगों के घायल होने की बात कही गई है और क़ाबिज़ पश्चिमी तट में भी इसका असर महसूस किया गया है.
ईरान ने अमेरिकी और इसराइली हवाई हमलों के जवाब में मध्य पूर्व क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की घोषणा की है. ये हमले नागरिक इलाक़ों में भी हुए हैं, जिनसे बुनियादी ढाँचों को नुक़सान पहुँचा है.
यूएन चार्टर की बुनियाद
महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ध्यान दिलाया कि यूएन चार्टर में अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा को बनाए रखने के लिए सैद्धान्तिक नींव प्रदान की गई है, जिसके अनुच्छेद 2 के अनुसार, सभी सदस्य देश अपने अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्धों में किसी अन्य देश की क्षेत्रीय अखंडता या राजनैतिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बल का प्रयोग किए जाने की धमकी से परहेज़ करेंगे.
यूएन प्रमुख के अनुसार, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून व अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून की सदैव रक्षा की जानी होगी. “इसी वजह से, मैंने सुबह से अब तक, संयुक्त राज्य अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान के विरुद्ध किए गए व्यापक सैन्य हमलों की निन्दा की है.”
“मैंने इसके बाद, ईरान द्वारा बहरीन, इराक़, जॉर्डन, कुवैत, क़तर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की सम्प्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता का हनन करते हुए किए गए हमलों की भी निन्दा की है.”
महासचिव ने चेतावनी दी है कि हम अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा के लिए गम्भीर ख़तरों के प्रत्यक्षदर्शी बन रहे हैं. “सैन्य कार्रवाई से घटनाओं के एक ऐसे सिलसिले के भड़कने का जोखिम है, जिसे फिर दुनिया के सबसे उथलपुथल वाले क्षेत्र में नियंत्रण में ला पाना किसी के बस में नहीं है.”
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कूटनैतिक अवसर गँवा दिया गया
यूएन प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि अन्तरराष्ट्रीय विवादों के शान्तिपूर्ण ढंग से निपटान का कोई व्यावहारिक विकल्प नहीं है और स्थाई शान्ति को केवल सार्थक सम्वाद व अन्य शान्तिपूर्ण तरीक़ों से ही हासिल किया जा सकता है.
उन्होंने सचेत किया कि ओमान की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच तीसरे दौर की अप्रत्यक्ष वार्ता के बाद ये हमले किए गए. “मुझे गहरा खेद है कि कूटनीति के इस अवसर को बर्बाद कर दिया गया.”
उनके अनुसार, अब मध्य पूर्व क्षेत्र और दुनिया को यहाँ से बाहर निकलने के रास्ते की ज़रूरत है.
“मैं टकराव पर तुरन्त विराम लगाने और तनाव में कमी लाने की अपील करता हूँ. इसका विकल्प एक व्यापक हिंसक टकराव भड़कने की आशंका है, जिसके आम नागरिकों व क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गम्भीर दुष्परिणाम होंगे.”
यूएन प्रमुख ने सभी पक्षों से वार्ता की मेज़ पर वापिस लौटने का आग्रह किया, विशेष रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि स्थिति को हर बिगड़ने से बचाने के लिए हरसम्भव क़दम उठाए जाने होंगे.