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इसराइली-अमेरिकी हमलों और ईरान की जवाबी बमबारी की निन्दा, 'अकल्पनीय टकराव का जोखिम'

तेहरान, ईरान का एक रात का शहरी परिदृश्य, शहरी क्षेत्र में आग से उठते धुएं के साथ।
© Mehr News Agency
ईरान की राजधानी तेहरान में, जून 2025 में इसराइली हवाई हमलों के बाद एक इलाक़े से उठता धुँआ. (फ़ाइल)

इसराइली-अमेरिकी हमलों और ईरान की जवाबी बमबारी की निन्दा, 'अकल्पनीय टकराव का जोखिम'

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव और यूएन एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों ने इसराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा शनिवार को ईरान पर सैन्य हमले किए जाने और उसके बाद ईरान द्वारा किए गए जवाबी हमलों की निन्दा की है. साथ ही, उन्होंने आगाह किया है कि इस टकराव से मध्य पूर्व क्षेत्र में अकल्पनीय स्तर पर विध्वंस होने का जोखिम है. यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने अपने वक्तव्य में कहा है कि मध्य पूर्व में इस घटनाक्रम से अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा को ठेस पहुँची है और तबाही के बजाय सम्वाद के मार्ग को अपनाया जाना होगा. 

समाचार माध्यमों के अनुसार, इसराइली और अमेरिकी सैन्य बलों ने ईरान की राजधानी तेहरान और अन्य शहरों में शीर्ष नेतृत्व व सैन्य स्थलों को निशाना बनाकर हमले किए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने की जानकारी मिली है.

इसके जवाब में, ईरान द्वारा इसराइल, क़तर, संयुक्त अरब अमीरात समेत अन्य देशों में बमबारी की गई है.

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संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शनिवार को जारी अपने वक्तव्य में, संयुक्त राज्य अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान पर की गई बमबारी, बल प्रयोग और उसके बाद, पूरे क्षेत्र में ईरान के जवाबी हमलों की निन्दा की है. उन्होंने आगाह किया है कि इससे अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा को ठेस पहुँची है.

यूएन प्रमुख ने बढ़ते टकराव को तुरन्त रोकने और तनाव में कमी लाने की अपील की है. उन्होंने आगाह किया कि “यदि इसमें विफलता मिली, तो एक व्यापक क्षेत्रीय हिंसक टकराव भड़कने का जोखिम है, जिसके आम नागरिकों व क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गम्भीर दुष्परिणाम होंगे.”

“मैं सभी पक्षों से तुरन्त वार्ता की मेज़ पर लौटने की पुरज़ोर अपील करता हूँ.”

यूएन चार्टर का पालन ज़रूरी

महासचिव गुटेरेश ने अपने वक्तव्य में सचेत किया कि सभी सदस्य देशों को यूएन चार्टर समेत अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत अपने तयशुदा दायित्वों का सम्मान करना होगा.

“चार्टर में स्पष्टता से, किसी देश की क्षेत्रीय अखंडता या राजनैतिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बल का प्रयोग किए जाने की धमकी या संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों के प्रति कोई अन्य असंगत कार्रवाई निषिद्ध है.”

उन्होंने दोहराया है कि अन्तरराष्ट्रीय विवादों के शान्तिपूर्ण निपटान का कोई दूसरा व्यावहारिक विकल्प नहीं है, और यूएन चार्टर अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा को बनाए रखने की बुनियाद प्रदान करता है.

तनाव घटाने का आग्रह

यूएन महासभा अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक ने मध्य पूर्व में भड़के ख़तरनाक सैन्य टकराव की निन्दा की है. उन्होंने ध्यान दिलाया कि यूएन चार्टर में स्पष्ट है कि अन्तरराष्ट्रीय विवादों को सदस्य देशों द्वारा शान्तिपूर्ण ज़रियों से निपटाया जाना ज़रूरी है. ऐसे तरीक़ों से, जिनसे अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा और न्याय के लिए ख़तरे पैदा न हो. 

उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय गतिविधियों और मानवाधिकार उल्लंघन के प्रति गम्भीर चिन्ताओं को यूएन चार्टर और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के अनुरूप ही हल किया जाना होगा.

महासभा प्रमुख ने अमेरिका, इसराइल और ईरान से तनाव में तुरन्त कमी लाने और पड़ोसी देशों को इस टकराव में नहीं घसीटने की अपील की है और वार्ता व कूटनीति की ओर लौटने का आग्रह किया है.

आम नागरिकों के लिए पीड़ा

मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने अपने वक्तव्य में इन हमलों की निन्दा करते हुए कहा कि हमेशा की तरह, किसी भी सशस्त्र टकराव का ख़ामियाज़ा अन्तत: आम नागरिकों को ही भुगतना पड़ता है.

“बम और मिसाइलें मतभेदों को सुलटाने का रास्ता नहीं है, बल्कि उनका नतीजा केवल मौत, विध्वंस, और मानव पीड़ा ही है.”

उन्होंने आम नागरिकों के लिए इन भयावह नतीजों को टालने के लिए, सभी पक्षों से संयम और तनाव में कमी लाने की पुकार लगाई है.

उच्चायुक्त टर्क ने सचेत किया कि वार्ता की मेज़ पर लौटना होगा, जहाँ कुछ घंटों पहले तक समाधान निकालने के सक्रिय प्रयास किए जा रहे थे. मानवाधिकार मामलों के प्रमुख के अनुसार, देशों के बीच गहरे मतभेदों को सुलझाने का यही एकमात्र स्थाई रास्ता है.

उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि बातचीत का रास्ता विफल रहा तो फिर वृहद क्षेत्र में एक बड़ा टकराव भड़कने का जोखिम है, जिसमें और अधिक संख्या में आम लोग मारे जाएंगे और न केवल ईरान बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में अकल्पनीय स्तर पर विध्वंस का जोखिम है.

“मैं सभी पक्षों को ध्यान दिलाता हूँ कि सशस्त्र टकराव के विषय में अन्तरराष्ट्रीय क़ानून बहुत स्पष्ट है: आम नागरिकों की रक्षा सर्वोपरि है. हर सम्बद्ध पक्ष को इन क़ानूनों का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा.”

“इनका उल्लंघन किए जाने पर, ज़िम्मेदारों की जवाबदेही तय की जानी होगी.”

शान्ति, सर्वोत्तम औषधि

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने मध्य पूर्व में घटनाक्रम पर शनिवार को गहरी चिन्ता व्यक्त की है. 

उन्होंने कहा है दोनों पक्षों से हो रही बमबारी में फँसे आम लोगों की व्यथा पर अपनी सम्वेदना जताई है. महानिदेशक टैड्रॉस ने ध्यान दिलाया है कि सीमाओं से परे, हर एक व्यक्ति, हिंसा के ख़तरे के बिना जीवन जीने का हक़दार है.

उन्होंने सभी नेताओं से विध्वंस के बेतुके मार्ग के बजाय, सम्वाद का रास्ता चुनने का आग्रह किया है, भले ही यह कितना भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हो.

यूएन एजेंसी महानिदेशक के अनुसार, दुनिया वर्तमान स्थिति को देख रही है और उसे उम्मीद है कि हथियारों पर बुद्धिमानी की जीत होगी. 

“शान्ति ही सर्वोत्तम औषधि है.”