पाकिस्तान के साथ झड़पों के बाद, अफ़ग़ान नागरिकों के लिए बढ़ी चिन्ता
पाकिस्तानी सैन्य बलों द्वारा, अफ़ग़ानिस्तान के कई बड़े शहरों पर की गई बमबारी और दोनों पक्षों के बीच सीमावर्ती इलाक़ों में हुई झड़पों के बाद, तनाव चरम पर पहुँच गया है. साथ ही, उन आम अफ़ग़ान नागरिकों की स्थिति पर भी चिन्ता उपजी है, जो सत्तारूढ़ तालेबान के कठोर शासन में अपने दैनिक जीवन में पहले से ही संघर्ष कर रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने गुरूवार को हालात पर चिन्ता व्यक्त करते हुए आम नागरिकों की रक्षा सुनिश्चित करने और अफ़ग़ानिस्तान व पाकिस्तान के बीच सम्वाद का आग्रह किया था.
इस बीच, अफ़ग़ानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति पर नज़र रखने के लिए मानवाधिकार परिषद द्वारा नियुक्त स्वतंत्र विशेषज्ञ रिचर्ड बैनेट ने आगाह किया है कि दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने से, आम अफ़ग़ान नागरिकों की मुश्किलें बढ़ी हैं और हाल ही में अफ़ग़ानिस्तान वापिस लौटने को मजबूर लोगों के लिए जोखिम भी.
उन्होंने बताया कि हाल ही में वह पाकिस्तान में थे, जहाँ उन्होंने अफ़ग़ान लोगों से बातचीत की, जो अपने भविष्य के प्रति आशंकित व भयभीत हैं.
“उनका मानना है कि अफ़ग़ानिस्तान लौटने का अर्थ न केवल निर्धनता में एक जीवन है, बल्कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, अतीत में सरकारी सुरक्षा बलों के सदस्यों समेत कुछ निश्चित समूहों के लिए हिंसक, बदले की भावना से किए गए हमलों का जोखिम है.”
“और हम पिछले कुछ महीनों में इन [मामलों] में उछाल देख रहे हैं.” हाल के कुछ वर्षों में, क़रीब 27 लाख अफ़ग़ान शरणार्थी, पाकिस्तान समेत अन्य पड़ोसी देशों से अपने वतन वापिस लौटने के लिए मजबूर हुए हैं.
विशेष रैपोर्टेयर रिचर्ड बैनेट एक स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ हैं, संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारी नहीं हैं और उन्हें इस कार्य के लिए वेतन नहीं मिलता है.
उन्होंने बताया कि बढ़ते क्षेत्रीय व भूराजनैतिक तनावों के बीच ठंडे दिमाग़ से काम लिया जाना होगा और यह आशा है कि तीसरे पक्षों की बात सुनी जाएगी.
समाचार माध्यमों के अनुसार, पाकिस्तानी वायु सेना के विमानों ने काबुल और कन्दहार समेत अन्य शहरों पर गुरूवार देर रात और शुक्रवार सुबह को हमले किए.
पाकिस्तान के प्रतिरक्षा मंत्री ने शुक्रवार को अपने वक्तव्य में कहा कि उनका देश अब अफ़ग़ानिस्तान के साथ एक खुले युद्ध में उलझा हुआ है.
इससे पहले भी, अक्टूबर 2025 में युद्धविराम की घोषणा होने के बाद, पिछले कुछ महीनों से सीमावर्ती क्षेत्रों में छिटपुट झड़पें हो रही थीं.
कठिन मानवीय स्थिति
विशेष रैपोर्टेयर रिचर्ट बैनेट ने कहा कि इस टकराव से अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के लिए कठिनाइयाँ बढ़ेंगी, जो अगस्त 2021 में तालेबान द्वारा देश की सत्ता हथिया लिए जाने के बाद से मानवीय संकट व चुनौतियों से जूझ रहे हैं.
तथ्यत: प्रशासन (de facto) द्वारा ‘सदगुणों’ को बढ़ावा देने और ‘दुर्गणों’ पर नियंत्रण के लिए आधिकारिक आदेश जारी किए गए हैं, जिनकी देश के बाहर व्यापक निन्दा हुई है.
साथ ही, अफ़ग़ानिस्तान की महिलाओं पर पाबन्दियाँ थोपी गई हैं और उन्हें अपने दैनिक जीवन के हर पहलु में सख़्त पाबन्दियों व अंकुशों का सामना करना पड़ रहा है.
स्वास्थ्य देखभाल सेवाएँ, दैनिक जीवन का एक ऐसा क्षेत्र है, जोकि तालेबान प्रशासन के दौरान बुरी तरह प्रभावित हुआ है.
“देश के बड़े हिस्सों में, मेडिकल उपचार को अलग-अलग बांटा गया है, इसलिए, महिलाओं का इलाज महिलाओं द्वारा किया जाना होगा, और पुरुषों का पुरुषों द्वारा.”
देखभाल सेवाओं पर असर
रिचर्ड बैनेट ने बताया कि स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या में भी गिरावट आई है, न केवल चिकित्सकों की बल्कि दाइयों, नर्स, और सम्पूर्ण स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था में.
विशेष रैपोर्टेयर के अनुसार, कुछ साक्ष्य दर्शाते हैं कि स्वास्थ्य देखभाल में तालेबान की ये सख़्तियाँ, देश के हर हिस्से में लागू नहीं हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि यह केवल उपचार तक सीमित नहीं है. आवाजाही पर पाबन्दी होने से अक्सर महिलाओं व लड़कियों के लिए ऐसी सेवाओं तक पहुँच पाना कठिन होता है.
अफ़ग़ानिस्तान पर तालेबान के नियंत्रण से पहले भी, दशकों के टकराव, निर्धनता व अल्पनिवेश की वजह से देश की स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था नाज़ुक थी, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में यह एक स्वास्थ्य आपदा में तब्दील हो सकती है, विशेष रूप से महिलाओं व लड़कियों के लिए.