वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

विषैले प्रदूषण की चुनौती, कमज़ोर नियम और संगठित अपराध ज़िम्मेदार

एक युवा व्यक्ति एक अनौपचारिक रीसाइक्लिंग साइट में इलेक्ट्रॉनिक कचरे के ढेरों के बीच काम करता है, जो बेकार उपकरणों और खतरनाक सामग्रियों से घिरा हुआ है।
© WHO/Abraham Thiga Mwaura
घाना में ई-कचरे के इस्तेमाल के लिए पुर्ज़ों को अलग किया जा रहा है.

विषैले प्रदूषण की चुनौती, कमज़ोर नियम और संगठित अपराध ज़िम्मेदार

स्वास्थ्य

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि कमज़ोर नियमन, चालाक आपराधिक गिरोहों और भ्रष्टाचार के कारण, विषैले पदार्थों सहित अपशिष्ट उत्पादों का मुनाफ़े वाला अवैध व्यापार और तस्करी, अब महाद्वीपों के आर-पार तेज़ी से बढ़ सकते हैं.

संयुक्त राष्ट्र के मादक पदार्थ एवं अपराध निरोधक कार्यालय (UNODC) की बुधवार को जारी एक नई रिपोर्ट में, वैश्विक स्तर पर फैले इस भूमिगत संकट पर प्रकाश डाला गया है.

रिपोर्ट में आकलन प्रस्तुत किया गया है कि यह अवैध कारोबार, हर साल लगभग 18 अरब अमेरिकी डॉलर तक का मुनाफ़ा उत्पन्न करता है, और इसमें दुनिया के सभी क्षेत्र शामिल हो चुके हैं. 

Tweet URL

हालाँकि योरोप के बाहर इससे जुड़े आँकड़े बेहद सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं.

गम्भीर जन-स्वास्थ्य प्रभाव

वैश्विक स्तर पर क़ानूनी अपशिष्ट प्रबन्धन बाज़ार का आकार, वर्ष 2024 में बढ़कर लगभग 1.2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जो वर्ष 2011 में 410 अरब अमेरिकी डॉलर था.

UNODC में नीति विश्लेषण एवं जन मामलों की निदेशक कैंडिस वेल्श ने कहा कि यह कोई सैद्धान्तिक समस्या नहीं है, बल्कि इसके गम्भीर जन-स्वास्थ्य प्रभाव हैं, क्योंकि इसके कारण पीने के पानी, समुद्र और मिट्टी में विषैला प्रदूषण फैल रहा है.

एजेंसी ने यह भी कहा कि अपशिष्ट अपराध और तस्करी में कम्पनियों की संलिप्तता आम बात है, कुछ कम्पनियाँ नियमों का पालन नहीं करतीं, कुछ जानबूझकर अवैध सेवाएँ लेती हैं, जबकि कुछ समानांतर रूप से अवैध गतिविधियाँ भी संचालित करती हैं.

रिपोर्ट में बताया गया कि सबसे कम मूल्यवान या निपटान में सबसे कठिन अपशिष्ट का प्रवाह धनी क्षेत्रों से निर्धन क्षेत्रों की ओर होता है.

साथ ही, दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ते कचरे के स्रोतों में शामिल ई-कचरे (E-Waste) के अलावा, बड़े पैमाने पर उत्पादित वस्तुएँ भी संगठित आपराधिक गिरोहों द्वारा शोषण के लिए संवेदनशील पाई गई हैं, मसलन सौर ऊर्जा पैनल.

सतत विकास में बड़ी बाधा

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि 2022 के आँकड़ों के अनुसार, पर्यावरणीय अपशिष्ट (E-Waste) के केवल लगभग पाँचवें हिस्से का ही, पर्यावरण के अनुकूल तरीक़े से प्रबन्धन किया जाता है.

रिपोर्ट के अनुसार, अवैध तस्करों ने, इस कच्चे माल (जैसे लोहा, तांबा और सोना) से पुनः प्राप्त किए जा सकने वाले कुल 91 अरब डॉलर में से, 28 अरब डॉलर हड़प लिए, जिससे यह स्थिति आर्थिक स्थिरता और सतत विकास के लिए बड़ी बाधा बन गई है.

विशेषज्ञों का कहना है कि अवैध अपशिष्ट व्यापार गन्तव्य देशों में पारिस्थितिकी तंत्र को नुक़सान पहुँचाता है, स्वास्थ्य जोखिम बढ़ाता है और असमानता उत्पन्न करता है.

साथ ही, यह शासन व्यवस्था को कमज़ोर करता है, भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है और संगठित अपराधों का समर्थन करता है.

बड़े पैमाने पर तस्करी 

रिपोर्ट के लेखकों ने कहा है कि “अधिकांश (संगठित अपराध समूह) क़ानून और नियमों के बारे में काफ़ी जानकार होते हैं, क्योंकि अपशिष्ट तस्करी में उच्च स्तर की विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है.”

इसका मतलब है कि ये समूह उन जगहों को चुनते हैं जहाँ नियम सबसे कमज़ोर हों और दंड सबसे कम हो.

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अपराध गतिविधियों के अपशिष्ट संग्रह, निर्यात, आयात, वितरण और निपटान जैसे विभिन्न चरणों का समन्वय करने के लिए जटिल संचालन व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे अकसर अलग-अलग देशों में अलग-अलग संचालक संचालित करते हैं.

UNODC ने इंटरपोल की जाँच का हवाला देते हुए कहा है कि अपशिष्ट तस्कर स्थानीय स्तर पर सक्रिय हैं, और महाद्वीपों के पार बड़े पैमाने पर तस्करी में भी शामिल हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि जब आपराधिक गिरोह क़ानूनी मुखौटा कम्पनियों के तहत स्थापित हो जाते हैं, तो वे अपनी अवैध गतिविधियाँ संचालित करते हैं, जैसे कि तरल अपशिष्ट को नदियों या झीलों में बहाना, अपशिष्ट जलाकर ऊर्जा उत्पन्न करना, और ख़तरनाक अपशिष्ट को सुरक्षित के रूप में प्रदर्शित करना.

अपशिष्ट का निपटान करना भी तस्करों की पसन्दीदा रणनीति है, जिससे वे अपशिष्ट निपटान अनुबन्धों में बोली लगाते समय, वैध प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ सकते हैं.

रिपोर्ट में योरोपोल का हवाला देते हुए कहा गया है कि “कुछ मामलों में, अपशिष्ट तस्कर पूरी प्रक्रिया पर नियंत्रण रखते हैं, निर्यात देश से लेकर आयात देश तक, और उनके पास पर्याप्त मानव और वित्तीय संसाधन मौजूद हैं.”

भारत में हर साल लगभग 6 करोड़ 20 लाख टन कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से एक बड़ी मात्रा प्लास्टिक की होती है.
UNDP India

क़ानूनों में ख़ामियाँ

यूएन विशेषज्ञों ने कहा है कि अपशिष्ट निपटान क़ानूनों में मौजूद ख़ामियाँ, संगठित आपराधिक समूहों को फ़ायदा पहुँचाती हैं.

इसके साथ ही लागू करने की सीमित क्षमता, निगरानी की कमी और कम जुर्माने भी, तस्करों के काम को वैश्विक स्तर पर आसान बनाते हैं.

योरोपीय संघ में इसका असर दिखाई दे रहा है, जहाँ सख़्त नियम और क़ानूनी निपटान की बढ़ती लागत के कारण, अवैध अपशिष्ट निपटान की मांग बढ़ रही है.

UNODC ने कई अनौपचारिक अपशिष्ट श्रमिकों की स्थितियों को भी उजागर किया जो कूड़ा स्थलों पर काम करते हैं और जिन्हें स्वास्थ्य पर गम्भीर नकारात्मक प्रभाव झेलने पड़ सकते हैं.