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ग़ाज़ा: अपने बेहतर भविष्य के लिए आवाज़ उठा रहे हैं बच्चे

यूएन एजेंसियों ने, ग़ाज़ा में युद्धविराम से उपजे अवसरों का लाभ उठाते हुए, सहायता प्रयास तेज़ कर दिए हैं.
© WFP/Maxime Le Lijour
यूएन एजेंसियों ने, ग़ाज़ा में युद्धविराम से उपजे अवसरों का लाभ उठाते हुए, सहायता प्रयास तेज़ कर दिए हैं.

ग़ाज़ा: अपने बेहतर भविष्य के लिए आवाज़ उठा रहे हैं बच्चे

शान्ति और सुरक्षा

ग़ाज़ा में बच्चे, अपने भविष्य के लिए अब ख़ुद अपनी आवाज़ बुलन्द करने की कोशिश कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र की एक पहल शान्ति, सुरक्षा और अपने खोए हुए बचपन की उम्मीदों को कला, कविता और युद्ध के मलबे से बनाए गए मॉडल के माध्यम से सामने रखने में बच्चों की मदद कर रही है.

ग़ाज़ा के अलग-अलग इलाक़ों में रहने वाले हज़ारों बच्चों ने, इस पहल के तहत अपने सपनों का ग़ाज़ा दिखाया है… ऐसा ग़ाज़ा, जहाँ वे बिना डर के रह सकें, पढ़ सकें और सामान्य ज़िन्दगी जी सकें.

इस कार्यक्रम को यूएन बाल कल्याण एजेंसी - UNICEF का समर्थन प्राप्त है. इसके अन्तर्गत 5 से 18 वर्ष तक के बच्चों से पूछा गया है कि कि वे युद्ध से तबाह हो चुके अपने इलाक़े को दोबारा किस तरह बनते हुए देखना चाहते हैं.

अक्टूबर 2023 में युद्ध शुरू होने के बाद से ग़ाज़ा का बड़ा हिस्सा बुरी तरह नष्ट हो चुका है. इसी पृष्ठभूमि में यह पहल, बच्चों को न केवल अपनी भावनाएँ व्यक्त करने का मंच देती है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करती है कि ग़ाज़ा के भविष्य से जुड़े फै़सलों में बच्चों की आवाज़ को गम्भीरता से सुना जाए.

यूनीसेफ़ के संचार प्रमुख जोनाथन क्रिक्स ने, जीनेवा में पत्रकारों को जानकारी दी है कि यह पहल, ग़ाज़ा के भविष्य को लेकर होने वाली चर्चाओं और निर्णयों में बच्चों की सार्थक भागेदारी की हिमायत करती है, ताकि वही लोग इस क्षेत्र के भविष्य के पुनर्निर्माण की दिशा तय कर सकें.

गाजा में एक बच्चा फूलों और एक आशाजनक शहर के परिदृश्य के बीच एक टेडी बियर के साथ खेलता है, जो शांति, स्कूलों और एक बहाल बचपन की अपील का प्रतीक है।
© UNICEF

हज़ारों बच्चों ने भाग लिया

इस पहल में 11 हज़ार से अधिक बच्चों ने भाग लिया है, जिनमें विकलांग बच्चे भी शामिल हैं.

इन बच्चों से “सम्मान के साथ जीवन की कल्पना करने” और अपने विचार साझा करने को कहा गया था.

बच्चों ने सबसे पहले सुरक्षित आश्रय और सुरक्षा को प्राथमिकता दी. इसके बाद छत, दीवारों और शौचालयों वाले असली स्कूलों की माँग रखी.

फिर, अस्पतालों और मानसिक स्वास्थ्य सहायता को ज़रूरी बताया, और अन्त में, ऐसे स्थानों की बात की जहाँ वे खेल सकें और “युद्ध ने उनसे जो छीन लिया है, उसे वापस पा सकें.”

जोनाथन क्रिक्स ने कहा कि जब हज़ारों बच्चे अलग-अलग होकर भी साफ़ सड़कों, कक्षाओं और पार्क की तस्वीरें बनाते हैं, तो “यह कोई संयोग नहीं है, यह दुनिया से सीधी अपील है.”

उन्होंने कहा, “ये कोई असाधारण मांगें नहीं हैं. ये बचपन के बुनियादी अधिकार हैं.”

“बच्चों की सबसे गहरी इच्छा बस इतनी है कि वे रात में चैन से सो सकें, बिना डर के स्कूल जा सकें… मैं ऐसे बहुत से बच्चों से मिला हूँ जिनके शरीर के जख़्म तो भर गए हैं, लेकिन उनका डर अब भी नहीं गया है.”

उन्होंने शारीरिक इलाज के साथ-साथ बच्चों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता की ज़रूरत पर भी बल दिया.

एक रंगीन चित्र जो गाजा में एक जीवंत दृश्य को दर्शाता है, जिसमें बच्चे खेल रहे हैं, पतंग उड़ाते हैं, और पृष्ठभूमि में नदी, पुल और फिलिस्तीनी ध्वज के साथ एक पार्क में बातचीत कर रहे हैं।
© UNICEF

'नज़रअन्दाज़ करना कठिन'

संचार प्रमुख जोनाथन क्रिक्स ने, मध्य ग़ाज़ा शहर डेयर अल-बलाह के एक अस्थाई शिक्षण केन्द्र में 15 वर्षीय हाला से भी मुलाक़ात की.

हाला ने बताया कि कई महीनों तक स्कूल नहीं जा पाने की वजह से उसकी शिक्षा बुरी तरह प्रभावित हुई है, लेकिन उसका सपना एक सुरक्षित ज़िन्दगी, एक सुरक्षित घर, अपना अलग कमरा और एक अच्छा स्कूल है.

उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2025 में युद्धविराम लागू होने के बावजूद, ग़ाज़ा में अब तक 135 से अधिक बच्चों के मारे जाने की ख़बरें सामने आ चुकी हैं.

यूनीसेफ़ के मुताबिक़, किसी भी विश्वसनीय पुनर्निर्माण की बुनियाद, बच्चों की बात सुनने से ही रखी जानी चाहिए.

संचार प्रमुख ने कहा, “इतनी अनिश्चितता में जीवन बिताने वाले बच्चों की स्पष्ट सोच को नज़रअन्दाज़ करना कठिन है… जो पुनर्बहाली बच्चों की आवाज़ों को अनसुना करेगी, वह बच्चों को भी निराश करेगी और ग़ाज़ा को भी…”

उन्होंने कहा, “ग़ाज़ा के बच्चे जो बता रहे हैं, वह कोई कल्पना नहीं है. वही ग़ाज़ा है जिसमें वे रहना चाहते हैं और जिसमें उन्हें अपने जीवन को आगे बढ़ते हुए देखने का अधिकार है.”