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भारत में सड़क हादसों की ‘मौन महामारी’ रोकने की अपील

UN Road Safety Campaign Poster at a Bus Stop in India.
© UN India/Shachi Chaturvedi
भारतीय बस स्टॉप पर संयुक्त राष्ट्र सड़क सुरक्षा अभियान पोस्टर.

भारत में सड़क हादसों की ‘मौन महामारी’ रोकने की अपील

एसडीजी

सड़क सुरक्षा पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष दूत ज्याँ टॉड ने भारत में सड़क हादसों से होने वाली मौतें कम करने के लिए, मंगलवार को वैश्विक जागरूकता अभियान का भारतीय संस्करण शुरू किया. उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं को मौन महामारी” बताते हुए कहा कि ये हादसे, हर साल हज़ारों लोगों की जान लेते हैं.

ज्याँ टॉड ने राजधानी नई दिल्ली में आयोजित प्रैस वार्ता में UN-JCDecaux के वैश्विक सड़क सुरक्षा अभियान #MakeASafetyStatement की शुरुआत की. 

इस अभियान के तहत प्रसिद्ध हस्तियाँ दैनिक जीवन में आसानी उठाए जा सकने वाले क़दमों को बढ़ावा दे रही हैं, जो सड़क पर जान बचा सकते हैं. 

सड़क सुरक्षा अभियान के सन्देश वाले डिजिटल होर्डिंग और पोस्टर नई दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु सहित चार बड़े शहरों में लगाए जाएँगे और सोशल मीडिया पर भी व्यापक रूप से साझा किए जाएँगे.

इस अवसर पर भारतीय क्रिकेट दिग्गज सचिन तेंदुलकर सड़क सुरक्षा के वैश्विक चैम्पियनों के समूह में शामिल हुए और पहल के समर्थन में एक वीडियो जारी किया.

ज्याँ टॉड ने कहा, “सड़क दुर्घटनाएँ दुनिया भर में एक ‘मौन महामारी’ बन चुकी हैं, और भारत में भी वे हर साल हज़ारों लोगों की जान लेती हैं, जिससे परिवार और समुदाय गहराई से प्रभावित होते हैं.” 

उन्होंने जोर देकर कहा कि तेज़ी से बढ़ती आवाजाही के कारण सड़क सुरक्षा पर समन्वित कार्रवाई पहले से कहीं अधिक ज़रूरी हो गई है.

लगभग एक वर्ष पहले देशों ने मराकेश घोषणा अपनाकर, सड़क सुरक्षा के दूसरे कार्य दशक में प्रयास तेज़ करने का संकल्प लिया था. इसका लक्ष्य दुनिया भर में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों और चोटों को, वर्ष 2030 तक आधा करना है.

भारत में सड़क हादसे अब भी एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चिन्ता बने हुए हैं. अनुमान है कि हर साल लगभग 1 लाख 53 हज़ार 972 लोग, सड़क दुर्घटनाओं में मौत के शिकार होते हैं, जिनमें बड़ी संख्या पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों और मोटरसाइकिल सवारों की होती है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के सड़क सुरक्षा विशेष दूत ज़्याँ टॉड, भारत में सड़क सुरक्षा अभियान के शुभारम्भ पर सचिन तेंदुलकर के होर्डिंग के साथ.
© UN India/Shachi Chaturvedi

सरल क़दम, वैश्विक पहुँच

#MakeASafetyStatement अभियान का उद्देश्य व्यावहारिक उपायों पर ज़ोर देकर सड़कों को सुरक्षित बनाना है. इनमें सीट बैल्ट और हेलमेट पहनना, सुरक्षित गति से वाहन चलाना, वाहन चलाते समय मोबाइल फ़ोन के ज़रिए सन्देश नहीं भेजना, नशे या थकान की हालत में गाड़ी नहीं चलाना, तथा पैदल यात्रियों व साइकिल चालकों का सम्मान करना शामिल है.

2022 में वैश्विक स्तर पर शुरू किया गया यह अभियान, संयुक्त राष्ट्र और JCDecaux की साझेदारी के तहत 2026 के अन्त तक 80 देशों और 1,000 शहरों में प्रदर्शित होने की उम्मीद है. 

यह पहले ही बेल्जियम, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, नाइजीरिया, मैक्सिको और संयुक्त अरब अमीरात सहित 50 से अधिक देशों में पहुँच चुका है, जहाँ इसे हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों, मैट्रो प्रणालियों एवं शॉपिंग सेंटर जैसे सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित किया गया है.

सचिन तेंदुलकर उन 16 वैश्विक हस्तियों और ओलम्पिक चैम्पियनों के समूह में शामिल हुए हैं जो सरल लेकिन प्रभावी सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ा रहे हैं. खेल के मैदान से परे, वे दक्षिण एशिया के लिए यूनीसेफ़ के सदभावना दूत भी हैं और सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन के माध्यम से सामाजिक कार्यों का समर्थन करते हैं.

भारत में सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए UNRSF परियोजना का उद्घाटन.
© UN India/Shachi Chaturvedi

यूएन समर्थित नई सड़क सुरक्षा परियोजना

संयुक्त राष्ट्र ने, अभियान की शुरुआत के साथ ही, यूएन सड़क सुरक्षा कोष से समर्थित एक नई पहल की घोषणा की, जिसका नाम है भारत में सड़क सुरक्षा के लिए सतत वित्तपोषण: एक सहयोगी दृष्टिकोण.

विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनीसेफ़ और एशिया-प्रशान्त के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग के तकनीकी सहयोग से लागू की जा रही इस परियोजना का उद्देश्य, देशभर में सड़क सुरक्षा प्रणालियों को मज़बूत करना है.

संयुक्त राष्ट्र रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर कार्यालय के समन्वय में राजस्थान, केरल, तमिलनाडु और असम राज्यों के साथ मिलकर चलाए जा रहे इस कार्यक्रम का ध्यान, सतत वित्त व्यवस्था विकसित करने, संस्थागत क्षमता बढ़ाने और सड़क सुरक्षा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुधारने पर होगा, ताकि मौतों व गम्भीर चोटों को कम किया जा सके.

संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों का कहना है कि वैश्विक जागरूकता, राष्ट्रीय साझेदारी और स्थानीय स्तर की कार्रवाई का संयुक्त प्रयास ही, सड़कों को सुरक्षित बनाने और दशक के अन्त तक सड़क दुर्घटना मृत्यु दर को आधा करने के अन्तरराष्ट्रीय लक्ष्य हासिल करने के लिए आवश्यक होगा.