एक त्रासदी, अनगिनत बिखरी उम्मीदें: युद्ध के 4 वर्षों ने बदल दी यूक्रेन की तस्वीर
यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में वर्ष 2014 से ही लड़ाई धधक रही थी, लेकिन देश में अधिकाँश लोगों को यह ऐहसास नहीं था कि कुछ वर्षों बाद, यहाँ पूर्ण पैमाने पर ही युद्ध भड़क जाएगा. 24 फ़रवरी 2022 को रूसी सैन्य बलों के आक्रमण से शुरू हुआ हिंसक टकराव, अब पाँचवे वर्ष में दाख़िल हो रहा है और इस लम्बी अवधि के बावजूद, बड़ी संख्या में यूक्रेनी नागरिकों को इस लड़ाई का फ़िलहाल कोई अन्त नज़र नहीं आ रहा है.
रूसी सैन्य बलों ने चार वर्ष पहले, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन करते हुए यूक्रेन में ‘विशेष सैन्य अभियान’ शुरू किया था.
उसके बाद से अब तक, लगभग 15 हज़ार आम नागरिक मारे जा चुके हैं, हज़ारों अन्य घायल हुए हैं और देश को 195 अरब डॉलर की क्षति हो चुकी है.
‘सामूहिक चेतना पर धब्बा’
यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इस दुखद पड़ाव पर अपने एक वक्तव्य में क्षोभ जताते हुए कहा कि यह विनाशकारी युद्ध, हमारी सामूहिक चेतना पर लगा एक धब्बा है. यह युद्ध क्षेत्रीय और अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा के लिए एक ख़तरा बना हुआ है.
उन्होंने चेतावनी दी है कि जितने लम्बे समय तक यह युद्ध खिंचेगा, यह उतना ही घातक होता जाएगा. आम नागरिक इस युद्ध का ख़ामियाज़ा भुगत रहे हैं. वर्ष 2025 में 2,500 से अधिक लोगों की जान गई थी, जिसे उन्होंने अस्वीकार्य क़रार दिया है.
यूक्रेन में हिंसक टकराव के कारण आम लोगों के लिए अन्तहीन कठिनाइयाँ उपजी हैं. बुज़ुर्ग आबादी में अब भी, 80 वर्ष पहले दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पूर्वी मोर्चे पर हुई बर्बर लड़ाई की यादें ताज़ा हैं. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में हुआ रक्तपात 1941-1945 से भी लम्बी खिंच चुका है.
यूक्रेन में युद्ध की वजह से अनेक मोर्चों में चुनौतियाँ मौजूद हैं, जिनसे आम लोगों को कईं प्रकार की पीड़ाएँ झेलनी पड़ रही हैं.
कुछ लोगों के अपने प्रियजन सदैव के लिए छिन खो चुके हैं. बहुत से लोगों के घर बमबारी में क्षतिग्रस्त हो गए. अनेक लोग सुरक्षित आश्रय की तलाश में देश से बाहर विस्थापित हो गए और फिर सैन्य कार्रवाई की वजह से वापिस नहीं लौट पाए.
एक माँ का सपना
प्रान्तीय राजधानी ख़ेरसॉन, लड़ाई के अग्रिम मोर्चे पर स्थित है, जहाँ पूरे शहर में हर दिन सायरन का शोर सुनाई देता है, जोकि बमबारी की चेतावनी है. स्कूल व किन्डरगार्टन बन्द हैं, और इसलिए अभिभावक अपने बच्चों को भूमिगत आश्रय स्थलों पर ले जाते हैं, जहाँ वे सुरक्षित माहौल में पढ़ाई-लिखाई, खेलकूद सकते हैं और जमा देने वाली सर्दी में गर्माहट ले सकते हैं.
विक्टोरिया और उनकी 5 वर्षीय बेटी मिरोस्लावा ऐसे ही केन्द्र पर हर दिन जाती हैं. विक्टोरिया ने ख़ेरसॉन को छोड़कर दो बार नज़दीकी शहर मिकोलाइव जाने की कोशिश की लेकिन वो लौट आईं, चूँकि यहाँ घर होने की वजह से, कठिनाइयों के बावजूद उनके लिए हालात कुछ बेहतर हैं.
विक्टोरिया पार्ट-टाइम काम करती हैं और उन्हें सामाजिक लाभ मिलते हैं. उनके पति के पास भी रोज़गार है. मानवीय सहायता संगठनों ने परिवार के लिए अति-आवश्यक सामान की व्यवस्था की है. “इससे बहुत मदद मिलती है, और मैं इस समर्थन के लिए आभारी हूँ.”
लेकिन वह नेताओं से बहुत ग़ुस्सा हैं. “कोई भी युद्ध का अन्त नहीं करना चाहते हैं, और उनकी इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है.”
विक्टोरिया का सपना, अपनी बेटी के लिए एक शान्तिपूर्ण भविष्य का है, जहाँ बम विस्फोट की बजाय बस आतिशबाज़ी हो.
सर्दी से कोई निजात नहीं
ख़ेरसॉन के घरों में तापन व्यवस्था (heating) मुश्किल से ही काम करती है. इसलिए विक्टोरिया का परिवार अलग से एक हीटर का इस्तेमाल करता है, लेकिन गर्माहट के लिए वह भी उतना कारगर नहीं है.
सुन्न कर देने वाली ठंड एक बड़ी समस्या है. और इस वर्ष, यूक्रेन में कड़ाके की सर्दी पड़ी है.
तापमान शून्य से 20 डिग्री नीचे लुढ़क रहे हैं और देश के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर रूसी सैन्य बलों के हमलों से लाखों लोग बिजली आपूर्ति व हीटिंग की क़िल्लत से जूझ रहे हैं और जैनरेटर व मरम्मत के लिए सामान का अभाव है.
कठोर सर्दी में हताहत होने वाले लोगों की संख्या एक और बड़ी चिन्ता का विषय है. यूएन मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार वर्ष 2025 के अन्त तक, 55 हज़ार से अधिक आम नागरिक हताहत हुए हैं. लगभग 15 हज़ार आम नागरिकों की जान गई है, हालांकि मृतकों की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक होने की आशंका है.
बच्चों के लिए विकट हालात
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने बच्चों की व्यथा पर गहरा क्षोभ प्रकट किया है. एक अनुमान के अनुसार, फ़रवरी 2022 से अब तक 3 हज़ार से अधिक बच्चों की या तो मौत हुई है या वे घायल हुए हैं.
2024 की तुलना में 2025 में बाल हताहतों के आँकड़े में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. यह लगातार तीसरा वर्ष है जब बाल पीड़ितों की संख्या में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है.
37 लाख यूक्रेनी नागरिक देश की सीमाओं के भीतर विस्थापित हैं. युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक, पहले बेघर हुए 44 लाख लोग वापिस लौट चुके हैं. इनमें से 10 लाख लोगों ने अन्य देशों में शरण ली हुई थी.
मगर, सीमा पार करके यूक्रेन वापिस आने वाला हर नागरिक अपने घर नहीं लौट पाया है. 3.72 लाख लोग अब भी आन्तरिक रूप से विस्थापित हैं.
‘ये कैसी ज़िन्दगी है?’
बिजली आपूर्ति ठप रहने की वजह से यूक्रेन की बुज़ुर्ग आबादी, विकलांगजन और लम्बे समय से बीमार चल रहे व्यक्तियों के लिए एक बड़ा ख़तरा है.
ऊर्जा संकट के मनोसामाजिक दुष्परिणाम भी कम चिन्ताजनक नहीं हैं: अंधेरा, अलग-थलग पड़ जाना, और निरन्तर अनिश्चितता की वजह से लोग बुरी तरह थक चुके हैं.
80 वर्ष की ऐलेना, ख़ेरसॉन में यूएन मानवीय सहायता केन्द्र में नियमित रूप से मदद हासिल करने के लिए पहुँचती हैं. उन्होंने कहा कि यह किस तरह की ज़िन्दगी है? जब हर दिन गोलीबारी हो रही तो उसे जीवन नहीं कहा जा सकता है.
“एक वर्ष पहले, मैंने अपने बेटे और उसकी पत्नी को दफ़नाया था. घर बर्बाद हो चुका है, हर चीज़ टूटी हुई है. यह कैसी ज़िन्दगी है.”
ऐलेना ने कहा कि मानवीय सहायता के अभाव में, बहुत से लोग जीवित नहीं बच पाएंगे. “पेंशन बहुत कम है. हम अपना गुज़ारा किस तरह से करें? मेरा बेटा जा चुका है, दूसरे भी नहीं रहे...वे हमें दोपहर का भोजन देते हैं. वे हमें ब्रैड, दवा देते हैं. मदद के लिए ईश्वर उनका भला करे.”
शान्ति के लिए आशाएँ
यूक्रेन में मानवीय सहायता मामलों के लिए यूएन के शीर्ष अधिकारी माथियास श्माले ने देश भर में यात्रा करके हालात का जायज़ा लिया है. उन्होंने कहा कि जिस तरह के हालात हैं, उससे स्थानीय आबादी में हताशा बढ़ रही है और इसे समझा जा सकता है.
उन्होंने ऐसे लोगों से मुलाक़ात की, जो बुरी तरह थके हुए हैं लेकिन हिम्मत हारने के लिए तैयार नहीं हैं. “आइए, उनकी इस हिम्मत का सम्मान करें.”
मानवतावादी समन्वयक श्माले ने ज़ोर देकर कहा कि इस वर्ष सबसे अहम बात यह है कि वास्तव में शान्ति क़ायम हो, और यूक्रेन के लोगों की पीड़ा का अन्त हो.
“हम यह देखना चाहते हैं कि [युद्ध के] पाँचवे वर्ष में युद्धविराम लागू हो और गरिमा के साथ स्थाई शान्ति भी.”