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दक्षिण सूडान: 2.8 लाख लोग विस्थापन को मजबूर, हालात 'विनाशकारी तूफ़ान' जैसे

दक्षिण सूडान में एक जल गई कार मलबे और अस्थायी आश्रयों के बीच बैठी है, जो संघर्ष के बाद के परिणामों को उजागर करती है।
© UNICEF/Sebastian Rich दक्षिण सूडान के अपर नाइल प्रान्त के एक ग्रामीण इलाक़े में एक ध्वस्त वाहन. (फ़ाइल)

दक्षिण सूडान: 2.8 लाख लोग विस्थापन को मजबूर, हालात 'विनाशकारी तूफ़ान' जैसे

शान्ति और सुरक्षा

दक्षिण सूडान के जोंगलेई प्रान्त में, हाल के सप्ताहों में फिर से भड़की लड़ाई के कारण लाखों आम नागरिकों को, अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है. स्वास्थ्य सुविधाएँ बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, और हैज़ा तेज़ी से फैल रहा है. यूएन आपात राहत मामलों के लिए यूएन अवर महासचिव टॉम फ़्लैचर ने, इन बिगड़ते हालात को देखते हुए आगाह किया है कि यह संकट युद्ध, जलवायु झटकों और गहरी वंचना से बना एक “विनाशकारी तूफ़ान” (perfect storm) है.

इस क्षेत्र में आम नागरिकों और राहतकर्मियों के लिए सुरक्षा जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं. 

संयुक्त राष्ट्र के राहत समन्वय कार्यालय (OCHA) के अनुसार, 7 से 16 फ़रवरी के बीच जोंगलेई और अपर नाइल प्रान्त में 3 मानवीय सहायता कर्मियों की मौत हो चुकी है.

हालाँकि प्रशासन ने, राहत अभियानों की अनुमति देने का फिर से भरोसा दिलाया है, लेकिन सबसे अधिक प्रभावित इलाक़ों तक मानवीय सहायता की पहुँच अब भी असमान और सीमित बनी हुई है.

एक विनाशकारी संगम

आपात राहत समन्वयक टॉम फ़्लैचर ने गत शुक्रवार को, दक्षिण सूडान का 5 दिन का दौरा किया, ताकि इस संकट की ओर दुनिया का ध्यान दिलाया जा सके.

उन्होनें इस संकट को बिगड़ता हुआ और इसके बारे में कम रिपोर्टिंग होने का ज़िक्र भी किया.

टॉम फ़्लैचर ने कहा, “दक्षिण सूडान में जलवायु परिवर्तन, युद्ध, असमानता और ग़रीबी - सब मिलकर एक विनाशकारी संगम बन गए हैं.”

“इस समय दक्षिण सूडान के लोगों को लगता है कि उनकी बात कहीं नहीं सुनी जा रही है.”

टॉम फ्लेचर दक्षिण सूडान के जोंगले राज्य में अकोबो काउंटी अस्पताल में एक चिकित्सा पेशेवर के साथ बात करते हुए, जहां डॉक्टर चल रहे संघर्ष से घायल नागरिकों का इलाज कर रहे हैं।
© UNOCHA आपात राहत समन्वयक टॉम फ़्लैचर ने पिछले शुक्रवार, दक्षिण सूडान का 5 दिन का दौरा किया.

बड़े पैमाने पर विस्थापन 

दिसम्बर (2025) के अन्त में फिर से शुरू हुई झड़पों के बाद, दक्षिण सूडान का राष्ट्रीय बल और प्रतिद्वंद्वी सशस्त्र गुट (SPLA-iO) के बीच युद्ध ने, जोंगलेई प्रान्त के मध्य और उत्तरी इलाक़ों में लोगों को बड़े पैमाने पर विस्थापन के लिए विवश किया है.

दक्षिण सूडान के अधिकारियों के अनुसार, 8 काउंटियों में लगभग 2 लाख 80 हज़ार लोग अपने घर छोड़ चुके हैं, जिनमें से बड़ी संख्या में आबादी अपर नाइल और लेक्स प्रान्तों की ओर चली गई है.

यहाँ परिवार खुले आसमान के नीचे या अस्थाई ढाँचों में शरण ले रहे हैं, जहाँ भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और ज़रूरी सामान की तत्काल ज़रूरत है.

साथ ही, बाज़ार और कृषि गतिविधियाँ बुरी तरह बाधित हो गई हैं, जिससे अनेक समुदायों के पास भोजन तक पहुँच बेहद सीमित या पूरी तरह बन्द हो गई है.

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने खाद्य सहायता बढ़ाई है, लेकिन जारी युद्ध और असुरक्षा राहत प्रयासों में गम्भीर बाधा बन रहे हैं, जिनमें सहायता क़ाफ़िलों की लूट भी शामिल है.

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दयनीय हालात

टॉम फ़्लैचर ने, जोंगलेई प्रान्त के दक्षिणी शहर अकोबो में एक स्थानीय अस्पताल का दौरा किया, जहाँ 18 फ़रवरी तक, गोली लगने से घायल कम से कम 93 मरीज़ों का इलाज हुआ.

उन्होंने कहा, “आम नागरिकों को कभी भी निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए.” 

इस यात्रा के दौरान, उन्होंने 18 महीने के एक बच्चे और 70 साल की एक बुज़ुर्ग महिला से भी मुलाक़ात की.

अस्पताल में एक मानवीय सहायता कर्मी ने बताया, “बच्चे के पिता को गोली मार दी गई और माँ का अपहरण कर लिया गया.”

जबकि, उस बुज़ुर्ग महिला ने मदद पाने के लिए सात दिनों तक पैदल सफ़र किया था.

यूएन अधिकारी ने बताया कि “यहाँ खाने के लिए कुछ भी नहीं है,” और अनेक समुदाय “सप्ताहों तक ज़रूरी मदद के बिना” रह रहे हैं.

साथ ही, उन्होंने यौन हिंसा, भूख और भुखमरी की दिल दहला देने वाली आपबीतियों का ज़िक्र किया.

ढहती स्वास्थ्य व्यवस्था

इस युद्ध का स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा असर पड़ा है. बताया गया है कि 13 स्वास्थ्य केन्द्रों को नुक़सान पहुँचाया गया है या लूटा गया है, जिससे 3 स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हुई हैं और 1 घायल हुआ है.

कुछ काउंटी में अधिकांश स्वास्थ्य केन्द्र नष्ट हो चुके हैं या उन्होंने काम बन्द कर दिया है.

इस बीच, हैज़ा लगातार फैल रहा है. 11 से 17 फ़रवरी के बीच पाँच प्रान्तों में हैज़ा संक्रमण के 106 नए मामले और तीन मौतें दर्ज की गईं.

सितम्बर 2024 में प्रकोप शुरू होने के बाद से, देशभर में अब तक 98 हज़ार से अधिक मामले और 1,624 मौतें दर्ज की जा चुकी हैं.

हालाँकि, अधिकारियों ने मानवीय सहायता तक बेरोकटोक पहुँच के निर्देश दोहराए हैं, लेकिन धरातल पर उनका पालन अब भी असंगत बना हुआ है.

कुछ इलाक़ों में राहत क़ाफ़िलों को प्रवेश से रोका गया है और प्रशासनिक व सुरक्षा बाधाओं के कारण उनकी आवाजाही भी सीमित हो गई है.

आपात राहत प्रमुख टॉम फ़्लैचर ने कहा कि यह चुनौती केवल तात्कालिक राहत तक सीमित नहीं है.

उन्होंने सवाल किया: “हम शान्ति प्रक्रिया की शुरुआत कैसे करें? इस युद्ध को कैसे समाप्त करें? और यहाँ लोगों को सुरक्षा कैसे दी जाए?”

“लेकिन इसके साथ-साथ, हम ध्यान भटकाने वाले शोर और उदासीनता के इस माहौल को तोड़कर लोगों तक सच्चाई कैसे पहुँचाएँ?”