संक्षेप में: ग्रीस तट के नज़दीक नाव दुर्घटना, सूडान में ड्रोन हमले में लोग हताहत
ग्रीस के क्रीट नामक द्वीप के तट के नज़दीक ख़राब मौसम के दौरान एक नाव के डूब जाने से उसमें सवार कम से कम 30 प्रवासियों के मारे जाने या लापता होने की आशंका है. इस हादसे में चार बच्चों समेत 20 लोगों को बचा लिए जाने की ख़बर है.
अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के अनुसार, शनिवार को ख़राब मौसमी परिस्थितियों के बीच, ग्रीस तक पहुँचने की कोशिश कर रहे नाव यात्री एक दुर्घटना का शिकार हो गए. यह नौका 19 फ़रवरी को तोबरुक रवाना हुई थी और क्रीट से क़रीब 20 समुद्री मील पहले पलट गई.
स्थानीय प्रशासन ने लगभग 4 शवों को बरामद कर लिया है. 20 लोगों को बचा लिया गया है, जिनमें 4 बच्चे हैं.
यूएन प्रवासन एजेंसी ने बताया कि इस वर्ष अब तक, भूमध्यसागर में जोखिम भरे मार्गों पर यात्राएँ कर रहे कम से कम 606 प्रवासी या तो मारे गए हैं या फिर वे लापता हो गए हैं.
वर्ष 2014 में इस सिलसिले में रिकॉर्ड रखे जाने की शुरुआत के बाद से अब तक यह साल की सबसे घातक शुरुआत बताई गई है.
IOM ने आगाह किया है कि तस्करी में लिप्त नैटवर्क, केन्द्रीय भूमध्यसागर मार्ग पर प्रवासियों का शोषण कर रहे हैं, उन्हें असुरक्षित नौकाओं में ख़तरनाक यात्राएँ करने के लिए मजबूर करके मुनाफ़ा कमाया जाता है, और अक्सर प्रवासियों के साथ दुर्व्यवहार व मानवाधिकार उल्लंघन को भी अंजाम दिया जाता है.
इसके मद्देनज़र, यूएन प्रवासन एजेंसी ने अन्तरराष्ट्रीय सहयोग और संरक्षण केन्द्रित जवाबी उपायों पर बल दिया है ताकि आपराधिक नैटवर्क से निपटा जा सके, जोखिमों में कमी लाई जाए और ज़िन्दगियों की रक्षा हो.
सूडान: ड्रोन हमले में 3 लोगों की मौत, सहायता प्रयास थमे
संयुक्त राष्ट्र मानवतावादी कार्यालय ने चिन्ता जताई है कि सूडान के कोर्दोफ़ान क्षेत्र में निरन्तर हमले किए जा रहे हैं, जिससे ज़रूरतमन्द आबादी तक मानवीय सहायता पहुँचाने के प्रयासों में बाधाएँ पेश आ रही हैं.
पिछले कुछ दिनों में, दक्षिण कोर्दोफ़ान के कडूग्ली और डिलिंग शहरों में खाद्य सामग्री ले जा रहे एक क़ाफ़िले पर हमला किया गया, जिनमें 3 आम नागरिक मारे गए.
कडूग्ली और डिलिंग में विशाल स्तर पर मानवीय सहायता आवश्यकताएँ उपजी हैं. संयुक्त राष्ट्र समर्थित एक आकलन के अनुसार, कडूग्ली में अकाल के हालात हैं और ऐसी ही परिस्थितियाँ अब डिलिंग में फैलने की आशंका है.
यूएन मानवतावादी कार्यालय ने कोर्दोफ़ान क्षेत्र में दोनों स्थानों पर निरन्तर, सुरक्षित ढंग से मदद पहुँचाए जाने के लिए मार्ग मुहैया कराए जाने की अपील की है.
इस बीच, ‘डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ ने बताया है कि फ़रवरी के पहले दो सप्ताह के दौरान, ड्रोन हमलों में घायल हुए कम से कम 170 लोगों का इलाज किया गया.
वहीं, यूएन स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, सूडान में इस वर्ष अब तक, स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं पर 5 हमले हो चुके हैं, जिनमें 69 लोगों की जान गई है और 49 घायल हुए हैं.
आपात राहत मामलों के लिए यूएन कार्यालय ने दोहराया है कि आम नागरिकों व बुनियादी प्रतिष्ठानों की रक्षा की आवश्यकता है, और साथ ही, अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून के तहत तयशुदा दायित्वों को निभाया जाना होगा.
ग़ाज़ा: चुनौतियो के बावजूद, 20 लाख लोगों तक पहुँची मदद
ग़ाज़ा पट्टी में तमाम अवरोधों के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र और उसके साझेदार संगठनों ने 20 लाख से अधिक लोगों तक महत्वपूर्ण सहायता पहुँचाई है.
यूएन मानवतावादी कार्यालय के अनुसार, 18 फ़रवरी के बाद से अब तक 7,700 परिवारों के लिए टैंट, तिरपाल, ग़द्दों, रसोई में काम आने वाले सामान, कपड़ों समेत अन्य सामग्री की व्यवस्था की गई है.
साझेदार संगठनों ने बताया कि विस्थापित लोगों की सुरक्षा के लिए यह ज़रूरी है कि उनके लिए आश्रय व आवास की दीर्घकालिक व्यवस्था की जाए, ताकि वे निजता और गरिमा के साथ रह सकें.
शिक्षा क्षेत्र में साझेदार संगठन भी बच्चों के लिए पढ़ाई-लिखाई के माहौल को बेहतर बनाने में जुटे हैं. पिछले दो सप्ताह में, सीखने-सिखाने के लिए 160 से अधिक केन्द्रों का विस्तार किया गया है, जिसके ज़रिए 1 लाख बच्चों के लिए व्यवस्था की गई है.
ग़ाज़ा में पढ़ाई-लिखाई के लिए सामान की आपूर्ति पर अब भी सख़्ती है और इसलिए बच्चों की शिक्षा के लिए प्रयासों में देरी हो रही है. विकलांगता की अवस्था में जीवन गुज़ार रहे बच्चों को कहीं अधिक अवरोधों का सामना करना पड़ रहा है, और उनके लिए सहायक उपकरणों को यहाँ तक पहुँचाने की अनुमति नहीं मिल पा रही है.
इसराइली प्रशासन के साथ समन्वय से ग़ाज़ा में मानवीय सहायता प्रयासों को आगे बढ़ाया जा रहा है. 20-22 फ़रवरी के दौरान, यूएन ने भोजन, ईंधन, स्वच्छता सामग्री, मेडिकल आपूर्ति समेत अन्य सामान की केरेम शलोम और ज़िकिम नामक सीमा चौकियों से आपूर्ति की है.
साथ ही, रफ़ाह चौकी से होकर मेडिकल कारणों से मरीज़ों को बाहर जाने की अनुमति दी गई है और अपने घर वापिस लौट रहे लोगों को भी समर्थन मुहैया कराया गया है.