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'मानवाधिकार केवल नारे भर नहीं हैं, हर समय निभाए जाने वाले दायित्व हैं'

António Guterres, United Nations Secretary-General, speaking at the opening of the High-level segment, 61st session of the Human Rights Council, Palais des Nations, Geneva, Switzerland - 23 February 2026
UN Photo/Violaine Martin यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश, जिनीवा में मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र को सम्बोधित कर रहे हैं.

'मानवाधिकार केवल नारे भर नहीं हैं, हर समय निभाए जाने वाले दायित्व हैं'

मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की स्थापना के 20 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 120 से अधिक देशों से आए प्रतिनिधियों ने वैश्विक अस्थिरता, युद्धों और हिंसक टकरावों के इस दौर में मानवाधिकारों व अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के प्रति अपना साझा संकल्प व्यक्त किया है. संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारियों ने स्विट्ज़रलैंड के जिनीवा शहर में इस अवसर पर मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित किए जाने का आहवान किया.

संयुक्त राष्ट्र के शीर्षतम अधिकारी एंतोनियो गुटेरेश ने  कहा कि ग़ाज़ा, म्याँमार, यूक्रेन, सूडान और अन्य देशों में धधकते हिंसक टकरावों से भूराजनैतिक अनिश्चितताएँ व्याप्त हैं. 

उनके अनुसार, इन परिस्थितियों में मानवाधिकारों पर बड़े पैमाने पर हो रहे प्रहार किए जा रहे हैं, जिन्हें अक्सर सबसे बड़ी शक्तियों द्वारा अंजाम दिया जा रहा है. उन्होंने ध्यान दिलाया कि मानवाधिकार, केवल अच्छे समय में लगाए जाने वाले नारे नहीं हैं, बल्कि हर दौर में निभाए जाने वाले कर्तव्य हैं.

महासचिव गुटेरेश ने कहा कि मंगलवार, 24 फ़रवरी को, यूक्रेन पर रूसी सैन्य बलों के पूर्ण स्तर के आक्रमण को 4 वर्ष पूरे हो जाएंगे, जिसमें अब तक 15 हज़ार से अधिक आम लोगों की जान जा चुकी है. उन्होंने क्षोभ जताया कि इस रक्तपात का अन्त करने का समय बहुत पहले ही पीछे छूट चुका है. 

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यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने भी अपने सम्बोधन में ध्यान दिलाया कि युद्धविराम और शान्ति समझौते के केन्द्र में न्याय व अधिकारों को रखा जाना आवश्यक है.

यूएन महासभा की अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक ने इन्हीं चिन्ताओं को दोहराते हुए कहा कि परिषद के सदस्य देशों, राजदूतों, मंत्रियों और यूएन अधिकारियों के लिए, मानवाधिकार कोई दर्शक दीर्घा में देखे जाने वाला कोई खेलकूद नहीं है.  

उन्होंने कहा कि चुप्पी धारण कर लेना एक विकल्प है, जिसके फिर नतीजों का सामना करना पड़ता है.

“इतिहास हमें सिखाता है कि बड़ी प्रणालियाँ, शायद ही कभी एक नाटकीय क्षण में ध्वस्त होती हैं. उनका क्षरण धीमी गति से होता है, नियम दर नियम, संकल्प दर संकल्प, उनके साथ जिन्हें चुप रहने के बजाय रक्षा करनी चाहिए थी.”

“उस दिन तक, जब चिरस्थाई नज़र आने वाली [वह व्यवस्था] फिर ओझल ही हो जाती है.”

ऐनालेना बेयरबॉक ने अपने सम्बोधन में अफ़ग़ानिस्तान की महिलाओं की व्यथा का उल्लेख किया, जिन्हें एक नए तालेबानी आदेश के तहत पति अपनी पत्नी को तब तक पीट सकते हैं, जब तक उनके शरीर पर दिखाई देने वाले निशान न पड़ें.

उन्होंने कहा कि हम न केवल महिला अधिकारों के विरोध में ऐसी प्रतिक्रिया को देख रहे हैं, बल्कि मानवाधिकारों व उन नियमों व मानकों के विरुद्ध भी, जोकि कभी एक पत्थर की लकीर से नज़र आते थे. 

अब उन पर खुले तौर से सवाल उठाए जा रहे हैं, उन्हें ख़ारिज किया जा रहा है या फिर हनन हो रहा है.

दो-राष्ट्र समाधान 

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अपने सम्बोधन में कहा कि क़ाबिज़ पश्चिमी तट में इसराइली बस्तियों के विस्तार में तेज़ी आ रही है और दिन के प्रकाश में दो-राष्ट्र समाधान को छिन्न-भिन्न किया जा रहा है.

“अन्तरराष्ट्रीय समुदाय ऐसा होने की अनुमति नहीं दे सकती है.”

उन्होंने आगाह किया कि ऐसे हिंसक टकरावों की संख्या बढ़ती जा रही है, जहाँ आक्रामक पक्ष दंडहीनता की भावना के साथ हिंसक कृत्यों को अंजाम दे रहे हैं, चूँकि देशों की सरकारों द्वारा अन्तरराष्ट्रीय क़ानून में निहित बुनियादी मानवाधिकारों को नज़रअन्दाज़ किया जा रहा है. 

एक ऐसे समय जब आवश्यकताओं में तेज़ उछाल दर्ज किया जा रहा है, वित्तीय समर्थन दरकता जा रहा है.

कटु वास्तविकताएँ

यूएन प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि हम एक ऐसी दुनिया में रह रहे हैं, जहाँ सामूहिक पीड़ाओं के लिए बहाने बनाए जा रहे हैं, जहाँ लोगों को मोलभाव की वस्तु के रूप में इस्तेमाल में लाया जा रहा है और जहाँ अन्तरराष्ट्रीय क़ानून को एक असुविधा मानकर बर्ताव किया जा रहा है.

महासचिव गुटेरेश के दूसरे पाँच-वर्षीय कार्यकाल की अवधि इस वर्ष 31 दिसम्बर को समाप्त हो रही है, और इससे पहले यह मानवाधिकार परिषद में उनका अन्तिम सम्बोधन था. 

उन्होंने दोहराया कि असुरक्षा और असमानताओं की वजह से प्रवासी उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं, उनकी गिरफ़्तारी हो रही है और देश निकाला दिया जा रहा है. वहीं, शरणार्थियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है और एलजीबीटीक्यू+ समुदायों पर दोषारोपण हो रहा है. 

“देश, कर्ज़ व निराशा में डूब रह हैं, और जलवायु उथपलुथल में तेज़ी आ रही है,” जिसका एक बड़ा ख़ामियाज़ा छोटे व सम्वेदनशील स्थिति से जूझ रहे देशों को भुगतना पड़ रहा है.

जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सदन का एक व्यापक दृश्य, जिसमें दीवार पर संयुक्त राष्ट्र का प्रतीक, मुख्य मेज पर वक्ताओं की पैनल और कार्यवाही प्रदर्शित करने वाले दो बड़े स्क्रीन शामिल हैं।
UN Geneva संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क, जिनीवा स्थित मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र को सम्बोधित कर रहे हैं.

एआई की चुनौती

यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने कहा कि टैक्नॉलॉजी, विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमता (AI) का इस्तेमाल अधिकारों का दमन करने, असमानता को गहरा बनाने, और हाशिएकरण पर रहने के लिए मजबूर लोगों के साथ भेदभाव को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है.

इसके मद्देनज़र, उन्होंने यूएन चार्टर की बुनियाद पर बहुपक्षवाद व एकजुटता के मूल्यों के प्रति नए सिरे से सकंल्प लिए जाने का आग्रह किया.

उन्होंने कहा कि मानवाधिकार, कोई विलास की वस्तुएँ नहीं हैं, न ही उन पर मोलभाव हो सकता है. “वे एक अधिक शान्तिपूर्ण व सुरक्षित जगत की नींव हैं. और चार्टर व अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत सदस्य देश अपने दायित्वों से बंधे हैं.”

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने कहा कि एक ऐसे समय जब कुछ देशों की सरकारों द्वारा बहुपक्षीय व्यवस्था को कमज़ोर किया जा रहा है, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के उल्लंघन को उजागर किए जाने की आवश्यकता है, भले ही इसके लिए कोई भी ज़िम्मेदार हो.