संक्षेप में: मानवतावादी प्रमुख का दक्षिण सूडान दौरा, ग़ाज़ा के शिविरों में आग का जोखिम
दक्षिण सूडान के जोंगलेई प्रान्त में सरकारी सुरक्षा बलों और विपक्षी गुटों में झड़पों के बीच, आपात राहत मामलों के लिए यूएन अवर महासचिव, मानवीय संकट से जूझ रहे देश में हालात का जायज़ा लेने के लिए अपनी पाँच-दिवसीय यात्रा पर वहाँ पहुँचे हैं.
वर्ष 2011 में स्वाधीनता हासिल करने वाला दक्षिण सूडान, लम्बे समय से राजनैतिक, हिंसक टकराव और अस्थिरता से जूझ रहा है, और आम नागरिकों व मानवीय सहायताकर्मियों के लिए जोखिम बढ़ रहा है.
यूएन मानवतावादी कार्यालय के शीर्ष अधिकारी टॉम फ़्लैचर ने शुक्रवार को अपर नाईल प्रान्त में स्थानीय समुदायों, उनके नेताओं व देश वापिस लौटने वाले लोगों से मुलाक़ात की. उन्होंने स्थानीय लोगों की आवश्यकताओं, दैनिक चुनौतियों और पड़ोसी देश सूडान में हिंसक टकराव से उपजी समस्याओं के बारे में जानकारी हासिल की.
टॉम फ़्लैचर का जोंगलेई जाने का भी कार्यक्रम है, जहाँ पिछले कुछ हफ़्तों में हिंसक टकराव भड़कने की वजह से मानवीय सहायता आवश्यकताओं में उछाल आया है. लड़ाई के कारण 2.8 लाख विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं.
यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने न्यूयॉर्क में पत्रकारों को जानकारी देते हुए कहा कि अपनी यात्रा के दौरान, मानवतावादी प्रमुख, लड़ाई के अग्रिम मोर्चे पर डटे सहायताकर्मियों से भी मुलाक़ात करेंगे.
“वह आम नागरिकों व मानवीय सहायताकर्मियों की सुरक्षा की पैरवी करेंगे, मानवीय सहायता अभियान को समर्थन देने के लिए पुकार को दोहराएंगे और संकट की बुनियादी वजहों से निपटने के लिए समन्वित प्रयासों का आग्रह करेंगे.”
वर्ष 2013 में राष्ट्रपति सल्वा कीर के वफ़ादार सैन्य बलों और पूर्व उप राष्ट्रपति रिएक मचार के समर्थकों के बीच गृहयुद्ध भड़क उठा था. कई वर्षों तक जातीय हिंसा, सामूहिक अत्याचार और मानवीय संकट जारी रहने के बाद, 2018 में नाज़ुक हालात में एक शान्ति समझौते पर सहमति हुई.
इस समझौते के बाद, फ़रवरी 2020 में एक संक्रमणकालीन सरकार का गठन किया गया था, लेकिन उसके बाद से ही चुनाव स्थगित होते रहे हैं और सरकार और विरोधी पक्षों के बीच टकराव भड़का है.
ग़ाज़ा: आश्रय स्थलों में आग का जोखिम
युद्ध से बेहाल ग़ाज़ा पट्टी में आम फ़लस्तीनियों के लिए उपयुक्त आवास व्यवस्था न होने की वजह से उन्हें भीड़भाड़ भरे केन्द्रों में गुज़र-बसर करनी पड़ रही है, जहाँ आग लगने के अलावा स्वास्थ्य जोखिम भी हैं.
यूएन मानवतावादी कार्यालय के अनुसार, परिवार बहुत सीमित स्थान में आग जलाकर खाना पका रहे हैं, सो रहे हैं और वहीं उनका सामान भी रखा है. पिछले वर्ष नवम्बर के बाद से अब तक, आग लगने की कम से कम 12 घटनाएँ हो चुकी हैं.
इस महीने, 10 दिनों की अवधि में यूएन मानवीय सहायताकर्मियों ने डेयर अल-बलाह और ख़ान युनिस में कम से कम 85 परिवारों के लिए आश्रय की व्यवस्था की है, जिनके टैंट ग़ाज़ा सिटी में लगी आग में बर्बाद हो गए थे.
इस बीच, ग़ाज़ा पट्टी के अनेक स्थानों पर मानवीय सहायता अभियान के लिए अब भी इसराइली प्रशासन से अनुमति लिए जाने की आवश्यकता है.
12 से 19 फ़रवरी के दौरान, 67 अभियानों के लिए समन्वय स्थापित किया गया था, जिनमें से 43 को स्वीकृति दी गई लेकिन 9 को सिरे से ख़ारिज कर दिया गया.
मानवीय सहायता संगठन इन अभियानों के ज़रिए ज़रूरतमन्द आबादी के लिए ईंधन, मेडिकल सामग्री, पशु चारा, स्वच्छता सामान समेत अन्य व्यवस्था करना चाहते हैं.
पश्चिमी तट: फ़लस्तीनी-अमेरिकी युवक की मौत की जाँच की मांग
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इस सप्ताह क़ाबिज़ पश्चिमी तट में एक फ़लस्तीनी-अमेरिकी युवक को जान से मार दिए जाने की घटना की जाँच का आग्रह किया है.
बुधवार को मुखमास नामक एक गाँव में इसराइली बस्तियों के निवासियों के एक हमले में 19 वर्षीय नसरअल्लाह अबू सिएम के साथ मारपीट हुई और गोली मार दी गई. इस घटना के अगले दिन उसकी मौत हो गई थी.
इस हमले के दौरान तीन अन्य फ़लस्तीनियों को भी पीटा गया और फिर गोली मार दिए जाने की ख़बरें थी.
यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने न्यूयॉर्क में बताया कि महासचिव ने पीड़ित के परिजन व प्रियजन के प्रति अपनी गहरी सम्वेदना व्यक्त की है.
महासचिव गुटेरेश ने इस घटना की तुरन्त, पारदर्शी जाँच कराए जाने और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने का आग्रह किया है.
उन्होंने इसराइल सरकार से अनुरोध किया है कि फ़लस्तीनी आबादी के विरुद्ध इसराइली बस्तियों के निवासियों की हिंसा को रोकने के लिए ठोस क़दम उठाए जाने होंगे. एक क़ाबिज़ शक्ति के तौर पर उसके लिए तयशुदा दायित्वों के अनुरूप.
क़ाबिज़ पश्चिमी तट में हिंसक घटनाओं के जारी रहने की वजह से आम नागरिक हताहत हुए हैं, सम्पत्ति को नुक़सान पहुँचा है और लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं.