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दक्षिणपूर्व एशिया में तस्करी, धोखाधड़ी के जाल में फँसे पीड़ितों की हृदयविदारक व्यथा

एक कंबोडियाई प्रवासी श्रमिक थाईलैंड में अपने छात्रावास में एक बिस्तर पर बिना शर्ट के बैठा हुआ टीवी देख रहा है। कमरा मामूली है, एक नारंगी रेफ्रिजरेटर, दीवारों पर पोस्टर और बिखरे हुए व्यक्तिगत सामान के साथ।
© ILO/Emmanuel Maillard
तस्करी करके जबरन धोखाधड़ी करने की गतिविधियों में शामिल किए गए बहुत से लोगों को, घोटाला केन्द्रों में काम करने के लिए मजबूर किया गया था. ऐसे लोग सदमे से पीड़ित होने और घर पर ख़तरों का सामना करने की जानकाी देते हैं. (प्रतिनिधिक तस्वीर)

दक्षिणपूर्व एशिया में तस्करी, धोखाधड़ी के जाल में फँसे पीड़ितों की हृदयविदारक व्यथा

क़ानून और अपराध रोकथाम

यातना व बुरा बर्ताव, यौन शोषण व दुर्व्यवहार, जबरन गर्भपात, भोजन से वंचित, एकान्त कारावास समेत अन्य मानवाधिकार उल्लंघन के गम्भीर मामले. संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में उन लाखों लोगों के भयावह, व्यथा भरे अनुभव बयान किए गए हैं, जिन्हें जबरन धोखाधड़ी गतिविधियों में धकेलने के लिए, विश्व के कई देशों में तस्करी का शिकार बनाया गया.

रिपोर्ट के अनुसार, धोखाधड़ी की ये गतिविधियाँ मुख्यत: दक्षिणपूर्व एशिया के देशों में केन्द्रित हैं, लेकिन उससे इतर भी कई देश प्रभावित हैं.  

बांग्लादेश, चीन, भारत, म्याँमार, श्रीलंका, दक्षिण अफ़्रीका, थाईलैंड, वियतनाम, ज़िम्बाब्वे समेत अन्य देशों के भुक्तभोगियों ने बताया कि अक्सर सीमा चौकियों पर तैनात अधिकारी भी, धोखाधड़ी गतिविधियों को संचालित कर रहे लोगों के साथ संलिप्त पाए गए. उन्हें धमकियाँ दी गईं और फ़िरौती वसूली गई.

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इस अध्ययन के लिए पुलिस व सीमावर्ती इलाक़ों में तैनात अधिकारियों, नागरिक समाज व ऐसे अभियानों पर नज़र रखने वाले विशेषज्ञों से बातचीत की गई.

सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों और ज़मीनी स्तर पर जुटाई गई जानकारी के अनुसार, धोखाधड़ी में लिप्त तीन-चौथाई से अधिक केन्द्र मेकाँग क्षेत्र में स्थित हैं. 

इसके अलावा, यह नैटवर्क दक्षिण एशिया, खाड़ी देशों, पश्चिम अफ़्रीका और अमेरिकी क्षेत्र के कुछ देशों में फैला हुआ है. 

रिपोर्ट दर्शाती है कि ‘स्कैम’ से जुड़ी इन गतिविधियों में शामिल होने के लिए मजबूर लोगों के साथ जिस तरह का बर्ताव किय गया, वह बहुत ही चिन्ताजनक है.

रोज़गार दिलाने का झूठा वादा करके, पहले तस्करी के ज़रिए भुक्तभोगियों को 2021 व 2025 के दौरान कम्बोडिया, लाओ पीडीआर, म्याँमार, फ़िलिपींस और संयुक्त अरब अमीरात में लाया गया. 

मगर, इसके बाद उन पर लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी, घोटालों, ऑनलाइन फ़िरौती, साइबर अपराधों, रोमांस के ज़रिए लुभाकर धन ऐंठने समेत अन्य अपराधों को अंजाम देने के लिए मजबूर किया गया. 

भयावह परिस्थितियाँ

कुछ पीड़ितों के अनुसार, उन्हें विशाल परिसरों में रखा गया, जोकि एक छोटे नगर की तरह नज़र आते थे, उनका आकार 500 एकड़ तक था, बहुमंज़िला इमारतों की कड़ी सुरक्षा की जाती थी, ऊँची दीवारों पर काँटेदार तारें लगाई गई थीं, जहाँ वर्दीधारी सुरक्षाकर्मियों द्वारा पहरा दिया जाता था.

रिपोर्ट में श्रीलंका के एक पीड़ित का उल्लेख किया गया है, जोकि धोखाधड़ी के ज़रिए अपने लिए निर्धारित मासिक धनराशि को जुटाने में नाकाम रहा. इस वजह से उसे कई घंटों तक जल टैंक में डूबो कर रखा गया. 

इसके अलावा, अनेक बार पीड़ितों को दूसरों के साथ किए जाने वाले बुरे बर्ताव को देखने के लिए मजबूर किया गया, ताकि वे भयभीत होकर अपना काम करते रहें. 

एक बांग्लादेशी भुक्तभोगी के अनुसार, उसे अन्य कर्मचारियों को मारने-पीटने के लिए कहा गया, जबकि घाना के एक व्यक्ति ने बताया कि उसे अपने साथी की पिटाई होते हुए देखने के लिए मजबूर किया गया.

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कई कंप्यूटर मॉनिटर, कीबोर्ड, और डेस्क पर पेय के साथ एक खाली कार्यालय स्थान, कंबोडिया में एक छापेमारी किए गए घोटाले केंद्र का संकेत देता है।
© UNODC/Laura Gil

बचाव का कोई रास्ता नहीं

इन हालात से किसी तरह बचकर भागने की कोशिश करने वाले व्यक्तियों की मौत होने के भी मामले भी सामने आए हैं, जोकि छत या बालकनी से गिर जाने की वजह से हुए. बचकर भागने की कोशिश करने और फिर पकड़े जाने वाले लोगों को बुरी तरह दंडित किया गया. 

वियतनाम के एक भुक्तभोगी के अनुसार, उसकी बहन को बुरी तरह पीटा गया, और फिर बिना भोजन के सात दिनों के लिए एक कमरे में बन्द कर दिया गया. 

इसके अलावा, तस्करों ने अक्सर पीड़ितों के परिवारों को वीडियो कॉल किया और फिर उनके परिजन के साथ बुरा बर्ताव, मार-पिटाई की गई ताकि परिवारजन मजबूरी में फ़िरौती की रक़म दें.

यूएन मानवाधिकार उच्चायुकत कार्यालय द्वारा जुटाई गई जानकारी के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को उतना वेतन नहीं दिया गया, जिसका वादा उनसे किया गया था. धोखाधड़ी से मोटी उगाही करने में नाकाम होने पर कुछ लोगों पर जुर्माना लगाया गया, उन्हें पीटा गया या फिर उससे भी बुरी परिस्थितियों वाले किसी दूसरे केन्द्र में बेच दिया गया. 

एक सफेद पोशाक में एक युवा लड़की एक दीवार के सामने खड़ी है जो ग्राफिटी से ढकी हुई है, जिसमें हरे रंग में लिखा हुआ संदेश 'I LOVE YOU' भी शामिल है।
© UNICEF/Ron Haviv

कारगर उपायों पर बल

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने पीड़ितों के साथ हुए दुर्व्यवहार पर गहरा क्षोभ प्रकट करते हुए कहा कि जब उन्हें न्याय, संरक्षण, देखभाल व पुनर्वास की आवश्यकता है, तो अक्सर उनकी बातों पर भरोसा नहीं किया जाता है, कलंकित किया जाता है और दंडित भी.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि कारगर जवाबी प्रतिक्रिया के लिए यह ज़रूरी है कि मानवाधिकार क़ानूनों व मानकों का ख़याल रखा जाए, तस्करी विरोधी क़ानूनों व नियमों में जबरन अपराधों में धकेले जाने के मामलों को मान्यता दी जानी होगी. साथ ही, तस्करी के शिकार लोगों को दंडित नहीं करने के सिद्धान्त की गारंटी दिया जाना अहम है.

वोल्कर टर्क ने देशों व अन्य हितधारकों से अपील की है कि भरोसेमन्द, समुदाय आधारित समूहों और भुक्तभोगियों की अगुवाई वाले समूहों के साथ सम्पर्क व बातचीत ज़रूरी है. तस्करी की चपेट में आने का जोखिम झेल रहे लोगों में जागरूकता का प्रसार करना होगा और इसके लिए मीडिया की अहम भूमिका है. 

साथ ही, घोटालों व धोखाधड़ी की गतिविधियों पर लगाम कसने और भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सदस्य देशों व क्षेत्रीय संगठनों को एक साथ मिलकर क़दम उठाने होंगे, जिसमें मानवाधिकार कार्यकर्ताओं व नागरिक समाज संगठनों को भी योगदान देना होगा. 

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