सूडान: अकाल और गहराती हिंसा के बीच, कोई कोना सुरक्षित नहीं
सूडान में युद्ध को लगभग 3 साल होने जा रहे हैं, मगर हिंसा रुकने के बजाय बढ़ती जा रही है. देश के कुछ हिस्सों में अकाल के हालात हैं, और नागरिक लगातार बदलती मोर्चाबन्दी के बीच फँसे हुए हैं. यूएन अधिकारियों ने आगाह किया है कि आगे और बड़े पैमाने पर अत्याचार होने का बेहद उच्च जोखिम बना हुआ है.
संयुक्त राष्ट्र की राजनैतिक मामलों की प्रभारी और उप महासचिव रोज़मैरी डीकार्लो ने गुरूवार को सुरक्षा परिषद की एक बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा, “सिर्फ़ एक महीने पहले, सूडान ने एक भयानक मील का पत्थर पार किया: अफ़्रीका के इस तीसरे सबसे बड़े देश को लगभग नष्ट करने वाले क्रूर युद्ध के 1000 दिन पूरे हो गए.”
उन्होंने कहा, “ये 1000 दिन भयंकर हिंसा और अविश्वसनीय दुख के रहे हैं…1000 दिन उन अपराधियों के लिए पूरी तरह से दंडमुक्त रहे हैं, जिन्होंने बड़ी संख्या में अत्याचार और युद्ध अपराध किए है.”
अप्रैल में युद्ध के तीसरे वर्ष में प्रवेश के बीच लड़ाई अब भी देश के अन्य हिस्सों में फैल रही है.
उप महासचिव रोज़मैरी डीकार्लो ने कहा कि उत्तर दारफ़ूर, उत्तर कोर्दोफ़ान, दक्षिण कोर्दोफ़ान और ब्लू नाइल प्रान्तों में मोर्चाबन्दी लगातार बदलती रही है.
साथ ही, सूडानी सशस्त्र बल (SAF) और त्वरित समर्थन बल (RSF) द्वारा किए जा रहे ड्रोन हमले और हवाई हमले इस युद्ध की मुख्य मुसीबतें बन गए हैं.
कोई कोना सुरक्षित नहीं
रोज़मैरी डीकार्लो ने चेतावनी दी, “नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढाँचे पर (युद्ध का) प्रभाव गम्भीर हैं. सूडान का कोई भी कोना हमले के ख़तरे से सुरक्षित नहीं है.”
उत्तर कोर्दोफ़ान की राजधानी अल ओबेद पर RSF ने तीनों ओर से घेराबन्दी कर रखी है, जबकि SAF ने शहर और उसके आसपास अपनी मौजूदगी दोबारा स्थापित करने का प्रयास किया है.
संयुक्त राष्ट्र के राजनैतिक मामलों की प्रभारी रोज़मैरी डीकार्लो ने कहा, “अल ओबेद के भीतर ज़मीन पर होने वाली लड़ाई के भयंकर परिणाम होंगे और यह युद्धविराम समझौते की सम्भावनाओं के लिए बड़ा झटका साबित होगा.”
दक्षिण कोर्दोफ़ान में भी कडुगली और डिलिंग के आसपास लड़ाई तेज़ हुई है.
10 लाख से अधिक लोग विस्थापित
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) में संकट प्रतिक्रिया विभाग की निदेशक ऐडेम वोसोर्नू ने कहा कि कोर्दोफ़ान और दारफू़र के अधिकांश हिस्सों में हालात, वर्ष की शुरुआत से ही बिगड़ गए हैं.
उन्होंने बताया कि हाल के सप्ताहों में कोर्दोफ़ान में ड्रोन हमलों में तेज़ी देखी गई है, जिससे नागरिकों की मौतें और घायल होने की घटनाएँ बढ़ी हैं.
साथ ही, हज़ारों परिवारों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है. वर्तमान में इस क्षेत्र में 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हैं.
इस क्षेत्र में खाद्य असुरक्षा भी बढ़ रही है. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य सुरक्षा विश्लेषण के अनुसार कडुगली और डिलिंग में अकाल के हालात उत्पन्न हो सकते हैं.
जबकि उत्तर दारफू़र के उम बारु और केरनोई में दिसम्बर में तीव्र कुपोषण दरें अकाल की सीमा को पार कर गई थीं.
राहतकर्मी भी असुरक्षित
सूडान में युद्ध के दौरान राहत कार्यकर्ताओं और नागरिक बुनियादी ढाँचे पर गम्भीर संकट बढ़ रहा है. अब तक लगभग 130 मानवतावादी कार्यकर्ता मारे गए हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बताया कि इस महीने के एक सप्ताह में, दक्षिण कोर्दोफ़ान में तीन स्वास्थ्य केन्द्रों पर हमले हुए, जिनमें 31 लोग मारे गए, जिनमें बच्चे और स्वास्थ्यकर्मी थे.
उधर, महिलाओं और लड़कियों के विरुद्ध हिंसा “भयंकर स्तर” तक पहुँच गई है. युद्ध की शुरुआत के बाद रोकथाम और प्रतिक्रिया सेवाओं की मांग में 350 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
साथ ही, यौन हिंसा के दर्ज मामलों की संख्या लगभग तीन गुना बढ़ गई है.
रोज़मैरी डीकार्लो ने, सूडान में जनसंहार से जुड़ी यूएन रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि ये घटनाएँ रोकने योग्य थीं, क्योंकि शहर पर एक वर्ष से अधिक समय तक घेराबन्दी थी, और यूएन अधिकारियों ने बार-बार बड़े पैमाने पर अत्याचार के जोखिम के बारे में चेतावनी दी, लेकिन उन्हें नज़रअन्दाज कर दिया गया.
अन्तरराष्ट्रीय एकजुटता की अपील
मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने चेतावनी दी है कि कोर्दोफ़ान में, आम नागरिकों को मौत की सज़ा, यौन हिंसा, मनमानी हिरासत और परिवारों के अलग होने जैसी घटनाएँ होने का ख़तरा है.
रोज़मेरी डीकार्लो ने अन्तरराष्ट्रीय एकजुटता और कड़ा रुख़ अपनाने की अपील करते हुए कहा कि “सुरक्षा परिषद द्वारा एकसमान सन्देश और ठोस कार्रवाई, पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है. सभी पक्षों और उनके समर्थकों पर दबाव डालकर युद्ध को तुरन्त समाप्त किया जाना चाहिए.”
ऐडेम वोसोर्नू ने भी इसी अपील को दोहराते हुए, स्थाई और समावेशी शान्ति लाने के लिए मिलकर काम करने की पुकार लगाई है.