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सूडान: ड्रोन हमलों में आम लोगों की मौतें, सुरक्षा पुख़्ता किए जाने की अपील

सूडान के कोर्डोफान क्षेत्र में यूनिसेफ द्वारा समर्थित स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सा देखभाल प्राप्त करते समय एक महिला अपने बच्चे को हाथ में लेती है, जहां परिवार हिंसा से भाग गए हैं।
© UNICEF सूडान के कोर्दोफ़ान क्षेत्र में हिंसा से प्रभावित एक महिला को संयुक्त राष्ट्र समर्थित क्लिनिक में इलाज मिल रहा है.

सूडान: ड्रोन हमलों में आम लोगों की मौतें, सुरक्षा पुख़्ता किए जाने की अपील

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने, सूडान में हुए हालिया ड्रोन हमलों में आम नागरिकों की मौत पर गम्भीर चिन्ता व्यक्त करते हुए वहाँ युद्धरत पक्षों से आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए तत्काल क़दम उठाने की अपील की है.

ख़बरों के अनुसार, इस सप्ताह दो दिनों के दौरान अलग-अलग ड्रोन हमलों में कम से कम 57 लोगों की मौत हुई है, जिनमें कम से कम 15 बच्चे भी हैं.

मानवाधिकार उच्चायुक्त के अनुसार, सूडान में ड्रोन युद्ध के बढ़ते इस्तेमाल का सबसे ज़्यादा और विनाशकारी असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है, और हालिया मौतें, इसी सच्चाई को एक बार फिर याद दिलाती हैं. 

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ये हमले 15 और 16 फ़रवरी के बीच सूडान के चार प्रान्तों में हुए हैं. 

ग़ौरतलब है कि सूडान की सशस्त्र सेना और RSF के बीच अप्रैल 2023 में, देश पर नियंत्रण के मुद्दे पर मतभेदों के बीच हिंसक टकराव भड़क उठा था. 

नागरिक ढाँचों पर हमले

मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने कहा है कि सूडान की सशस्त्र सेना (SAF) और RSF की ओर से नागरिक ठिकानों पर हो रहे हमले तत्काल रोके जाने होंगे.

उनके अनुसार, 15 फ़रवरी को, उत्तरी कोर्दोफ़ान प्रान्त के सुदारी इलाक़े में अल-सफ़िया बाज़ार पर SAF ड्रोन हमले में 28 लोगों की मौत हुई और 13 अन्य घायल हो गए.

अगले दिन, पश्चिमी कोर्दोफ़ान के अल-सुनूत में आन्तरिक रूप से विस्थापित लोगों के एक आश्रय स्थल पर हुए ड्रोन हमले में 26 नागरिकों की जान गई, जिनमें 15 बच्चे थे, जबकि 15 अन्य लोग घायल हुए.

इसी दिन, दक्षिणी कोर्दोफ़ान के डिलिंग में RSF ड्रोन हमलों में दो प्राथमिक स्कूलों को निशाना बनाया गया, हालांकि अभी हताहतों की संख्या की पुष्टि नहीं हो सकी है.

वोल्कर टर्क ने ज़ोर देकर कहा कि सभी पक्षों को नागरिकों और नागरिक ढाँचों की सुरक्षा के लिए तत्काल क़दम उठाने होंगे और नागरिक ठिकानों के सैन्य इस्तेमाल से बचना होगा.

लाखों लोगों तक यूएन सहायता

संयुक्त राष्ट्र के बहु-एजेंसी क़ाफ़िले ने, दक्षिण कोर्दोफ़ान के डिलिंग और नज़दीकी काडुगली शहरों में अहम मानवीय राहत सामग्री पहुँचाई है. ये क्षेत्र पिछले दो साल से सहायता से लगभग पूरी तरह कटे हुए थे.

साथ ही, कुल 26 ट्रकों में, 1 लाख 30 हज़ार से अधिक लोगों के लिए चिकित्सा, भोजन, पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छ पानी और साफ़-सफ़ाई, तथा शिक्षा से जुड़ी सामग्री भेजी गई है.

इनमें लगभग 70 हज़ार लोगों के लिए खाद्य सामग्री शामिल है, जिनमें 21 हज़ार माताएँ और बच्चे भी शामिल हैं.

साथ ही, कुपोषण रोकने के लिए विशेष पोषण आहार, एचआईवी, टीबी और मलेरिया की पाँच महीने की दवाएँ और अन्य जीवनरक्षक दवाएँ भी भेजी गईं.

इस क़ाफ़िले का नेतृत्व विश्व खाद्य कार्यक्रम, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ने किया.

सहायता बढ़ाने की ज़रूरत

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के सूडान प्रतिनिधि शेल्डन येट ने कहा, “इस क़ाफ़िले का आगमन उन बच्चों के लिए जीवनरेखा है जो बहुत लम्बे समय से सहायता से वंचित रहे हैं.”

जबकि, अल ओबेद से मुख्य मार्ग में हुई हिंसा और असुरक्षा के कारण, क़ाफ़िले को 40 दिनों से अधिक रुकना पड़ा. इसके कारण मिशन में देरी हुई और स्थानीय समुदायों को अतिरिक्त जोखिम का सामना करना पड़ा.

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के सूडान के कार्यवाहक देश निदेशक मकेना वॉकर ने बताया कि ट्रक को अन्ततः डिलिंग तक पहुँचने के लिए लम्बा और कठिन मार्ग अपनाना पड़ा, जो यह दर्शाता है कि मानवीय क़ाफ़िले अत्यन्त चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी आगे बढ़ते हैं.

सूडानी शरणार्थी महिलाओं और बच्चों का एक समूह, रंगीन हेडशेव पहने हुए, चाड में एक शरणार्थी शिविर में एक साथ बैठे हैं, सूडान में चल रहे युद्ध के कारण मानवीय संकट पर प्रकाश डालते हुए।
© UNHCR/Ala Kheir

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने ज़ोर देकर कहा कि दक्षिण कोर्दोफ़ान में मानवीय स्थिति के और बदतर होने से रोकने के लिए स्थाई, सुरक्षित और अनुमानित पहुँच सुनिश्चित करना बेहद ज़रूरी है.

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के सूडान रैज़िडैंट प्रतिनिधि लुका रेंडा ने कहा, “दक्षिण कोर्दोफ़ान में जीवनरक्षक दवाओं के आगमन ने उन मरीज़ों के लिए राहत प्रदान की है, जिन्होंने युद्ध के दौरान दवाओं की कमी का सामना किया, लेकिन अब समय फिर से महत्वपूर्ण हो गया है.”

उन्होंने कहा कि, “मरीज़ों को जीवित रखने के लिए हमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों का समर्थन बढ़ाना होगा, ताकि पूरे सूडान में नियमित आपूर्ति जारी रखी जा सके, चाहे युद्ध जारी ही क्यों न रहे.”