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'एशिया-प्रशान्त में 2030 तक एसडीजी का 88% हिस्सा रह जाएगा पीछे

एक युवती खुले में लगे नल से नीली बाल्टी में पानी भर रही है।
UNICEF Tajikistan एशिया-प्रशान्त क्षेत्र में, सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति की रफ़्तार बहुत धीमी रही है, हालाँकि उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढाँचा क्षेत्र (SDG-9) में अच्छी प्रगति दर्ज की गई है.

'एशिया-प्रशान्त में 2030 तक एसडीजी का 88% हिस्सा रह जाएगा पीछे

एसडीजी

एशिया और प्रशान्त में सतत विकास लक्ष्यों (SDG) पर प्रगति की अगर मौजूदा गति ही जारी रही, तो वर्ष 2030 तक इन लक्ष्यों का 88 प्रतिशत हिस्सा प्राप्ति नहीं हो सकेगा. एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि यह क्षेत्र, टिकाऊ विकास के मापने योग्य 117 में से 103 लक्ष्यों को हासिल करने से पीछे रह जाएगा. 

एशिया-प्रशान्त के लिए यूएन आर्थिक व सामाजिक आयोग (ESCAP) की, एसडीजी प्रगति रिपोर्ट 2026 में, इस क्षेत्र में विकास में गहरे असन्तुलन की तस्वीर भी पेश की गई है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि बीते दशकों के दौरान स्वास्थ्य और बेहतर रहन-सहन व ग़रीबी को कम करने के क्षेत्रों में जो प्रगति हासिल की गई थी, उसे पर्यावरण क्षेत्र में गम्भीर गिरावट और विषमताओं के बढ़ते दायरे ने पीछे छोड़ दिया है.

सबूतों से, शिक्षा तक सभी को समान पहुँच के लक्ष्य – 4.5 और श्रम अधिकारों के लक्ष्य - 8.8 पर अमल सम्बन्धी प्रगति को बड़े झटके लगे हैं.

ESCAP की वर्ष 2025 की रिपोर्ट पर एक नज़र

इसके अलावा लैंगिक समानता और शान्ति, न्याय व मज़बूत संस्थानों (एसडीजी16) के बारे में पर्याप्त आँकड़ों की कमी के कारण, नीति-निर्माताओं को यह समझने में कठिनाई हो रही है कि बेहद कमज़ोर हालात वाले लोगों तक कितनी पहुँच और किस तरह बनाई जा रही है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु कार्रवाई, समुद्री संरक्षण और जैव विविधता जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में, प्रगति ना केवल रुक गई है, बल्कि तेज़ी से बदतर हो रही है.

नगरों और समुदायों के लिए, महत्वपूर्ण ढाँचे को हानि पहुँचाए जाने सहित स्थिति या चीज़ों पर विकास को पीछे धकेलने से, धरातल पर नियोजन और सहनक्षमता के बीच ख़तराक अन्तर नज़र आता है. 

आयोग (ESCAP) की कार्यकारी सचिव अरमीडा सलसियाह अलीस्जाहबाना का कहना है, “यह रिपोर्ट एक दुखद स्थिति को सामने लाती है. विकास के जिन इंजनों ने कभी करोड़ों लोगों को निर्धनता से बाहर निकाला और त्वरित औद्योगीकरण को ऊर्जा दी, वही अब हमारे भविष्य को कमज़ोर कर रहे हैं.” 

उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “हमारी सबसे बड़ी सामूहिक चुनौती, एक महान अवसर भी है: एक ऐसे क्षेत्र का निर्माण करने के लिए, जो ना केवल अधिक समृद्ध हो, बल्कि कहीं अधिक स्मार्ट, स्वस्थ और न्यायसंगत हो.”

दो इंडोनेशियाई महिलाएं हार्ड हैट और सुरक्षा उपकरण पहने सौर ऊर्जा संयंत्र में एक विद्युत पैनल की जांच कर रही हैं।
© ADB एशिया-प्रशान्त के देशों में, उद्योग, नवाचार व बुनियादी ढाँचा क्षेत्र में अच्छी प्रगति होने के सबूत भी हैं.

कुछ अच्छी ख़बर भी

रिपोर्ट के अनुसार, हालाँकि कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं जिनमें बहुत अच्छी प्रगति हुई है. एशिया-प्रशान्त में उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढाँचा क्षेत्र (SDG-9) में अच्छी प्रगति दर्ज की गई है. 

साथ ही अच्छे स्वास्थ्य और बेहतर रहन-सहन (SDG-3) क्षेत्र में भी, जच्चा-बच्चा की मृत्यु संख्या में ठोस कमी की बदौलत, ठोस प्रगति प्रगति दर्ज की गई है.

रिपोर्ट के अनुसार आय निर्धनता को कम करने और बिजली तक पहुँच का दायरा बढ़ाने के क्षेत्रो में भी अच्छी प्रगति हुई है.

डेटा उपलब्धता बेहतर हो रह है. इस समय टिकाऊ विकास लक्ष्यों (SDG) के 55 प्रतिशत संकेतकों के मामले में प्रगति का आकलन करने के लिए पर्याप्त डेटा उपलब्ध है, जिससे एशिया और प्रशान्त, इस मामले में दुनिया में सबसे आगे है.

एशिया और प्रशान्त में टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के बारे में प्रगति पर इस वार्षिक रिपोर्ट में यह भी बताया जाता है कि क्षेत्र में कहाँ-कहाँ अतिरिक्त प्रयासों की आवश्यकता है और क