AI Impact Summit 2026: WFP प्रदर्शनी में अत्याधुनिक समाधान
नई दिल्ली में जारी 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रभाव सम्मेलन' (AI Impact Summit 2026) में विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) की प्रदर्शनी की शुरुआत ऐसे नवाचारी तकनीकी समाधानों के प्रदर्शन से हुई, जो लोगों तक खाद्य सहायता पहुँचाने की प्रक्रिया का कुशल एवं बेहतर स्वरूप दर्शाती है.
बायोमीट्रिक अनाज वितरण मशीनों और स्मार्ट भंडारण प्रणालियों से लेकर, संकट मानचित्रण उपकरणों एवं मानवीय सूचना अवतारों तक, प्रदर्शनी ने स्पष्ट किया कि आँकड़ों व उन्नत तकनीकी प्रणालियों के सहारे, बड़े स्तर पर खाद्य एवं पोषण सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुदृढ़ बनाया जा रहा है.
सबसे प्रमुख नवाचारों में से एक अन्नपूर्ति प्रणाली थी, जिसे “अनाज ATM” कहा जाता है. यह सार्वजनिक खाद्य योजनाओं के लाभार्थियों को बायोमीट्रिक पहचान के माध्यम से, तेज़ और सटीक तरीक़े से भोजन सामग्री प्राप्त करने की सुविधा देती है.
भारत में विश्व खाद्य कार्यक्रम की स्थानीय प्रतिनिधि एलिज़ाबेथ फॉर ने इसकी प्रभावशीलता का उल्लेख करते हुए कहा, “लाभार्थी अपने अंगूठे का निशान लगाते हैं और बहुत तेज़ तथा सम्मानजनक तरीक़े से तुरन्त अनाज प्राप्त कर लेते हैं. यह सटीक है और चौबीसों घंटे उपलब्ध है.”
इस प्रणाली से परिवारों को अब खाद्य सामग्री प्राप्त करने के लिए अपनी दैनिक श्रमिक आय नहीं छोड़नी पड़ती. इसे राष्ट्रीय स्तर पर तेज़ी से लागू किया जा रहा है और इसका इस्तेमाल इतना प्रभावी रहा है कि अब इसका प्रयोग नेपाल में भी किया जा रहा है.
एक अन्य समाधान स्मार्ट भंडारण प्रणालियों पर केन्द्रित था, जहाँ सैंसर वास्तविक समय में नमी, कीट और भंडार स्तर की निगरानी करते हैं. इससे अनाज ख़राब होने से बचता है और आपूर्ति श्रृँखला से जुड़े निर्णय बेहतर बनते हैं.
मार्ग अनुकूलन उपकरण भी प्रदर्शित किए गए, जो भारत की विशाल सार्वजनिक वितरण व्यवस्था का समर्थन करते हैं. यह व्यवस्था हर महीने 80 करोड़ से अधिक लोगों तक 6 लाख से ज़्यादा दुकानों के माध्यम से खाद्यान्न पहुँचाती है, जिससे वितरण का समय घटता है और कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है.
भारत में विश्व खाद्य कार्यक्रम के संचार एवं मीडिया प्रमुख परविंदर सिंह कहते हैं कि इस सम्मेलन का महत्व उसके स्थान और उद्देश्य दोनों में है. “यह कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वैश्विक दक्षिण में और भारत में हो रहा है.”
उनके अनुसार, प्रदर्शनी यह दिखाती है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग किस तरह मानवीय सहायता और विकास कार्यों में, ख़ासतौर पर खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए किया जा सकता है.
प्रदर्शनी में ऐसे वैश्विक उपकरण भी दिखाए गए जो एजेंसियों को संकट की स्थिति का तेज़ी से आकलन करने, ज़रूरी सामग्री तय करने और उसे सबसे तेज़ मार्ग से पहुँचाने में मदद करते हैं.
इन प्रणालियों से स्पष्ट है कि विश्व खाद्य कार्यक्रम के काम में आँकड़ों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग लगातार बढ़ा रहा है.
विश्व खाद्य कार्यक्रम के मुख्य डेटा अधिकारी मगन नायडू ने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता आँकड़ों को एक रणनैतिक सम्पत्ति में बदल सकती है, जिससे कार्यकुशलता बढ़ती है, आपातकालीन प्रतिक्रिया तेज़ होती है और वैश्विक खाद्य प्रणालियाँ मज़बूत होती हैं.”
संगठन का अनुमान है कि पूर्वानुमान विश्लेषण, प्रारम्भिक चेतावनी प्रणालियों और बेहतर संचालन योजना के ज़रिए, ऐसी तकनीकें कार्यकुशलता एवं पूर्वानुमान की सटीकता को लगभग 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ा सकती हैं.
अन्तिम छोर तक पोषण
एक तरफ़ जहाँ प्रदर्शनी में वैश्विक तकनीकों का प्रदर्शन किया गया, वहीं साथ ही आयोजित एक हैकाथॉन का ध्यान, समुदाय स्तर पर पोषण अन्तर कम करने के स्थानीय समाधानों पर था.
“कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रेरक उपाय: प्रभावी स्थानीय समाधान” शीर्षक वाली इस चुनौती में नवोन्मेषकों को ऐसे उपकरण बनाने के लिए आमंत्रित किया गया जो स्कूली भोजन, सामुदायिक पोषण सेवाओं और आपूर्ति श्रृँखला जैसी मौजूदा सरकारी योजनाओं से जुड़ सकें.
तीन विजेता विचारों को सम्मानित किया गया. एक समाधान ने स्कूली भोजन को सामुदायिक पोषण बागानों से जोड़ा.
दूसरे ने पोषण सम्बन्धी जानकारी देने वाला मोबाइल अनुप्रयोग सुझाया.
तीसरे ने ऐसा तंत्र विकसित किया जो बच्चों में कुपोषण के जोखिम की पहचान और पूर्वानुमान कर सकता है.
परविंदर सिंह ने कहा कि ऐसे ज़मीनी स्तर के नवाचार बेहद जरूरी हैं, क्योंकि मजबूत सुरक्षा जाल कार्यक्रमों के बावजूद अन्तिम छोर की चुनौतियाँ अब भी बनी हुई हैं.
स्थानीय समाधान, वैश्विक विस्तार
भारत में संयुक्त राष्ट्र के रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर स्टेफ़ान प्रीज़नर ने इस पहल के व्यापक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, “हम नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग लोगों के हित में, समावेशी तरीक़े से कर रहे हैं, ताकि इन विशाल खाद्य वितरण प्रणालियों की कार्यकुशलता बढ़ सके.”
उन्होंने कहा कि डिजिटल नवाचार में भारत की अग्रणी भूमिका के कारण, यहाँ विकसित समाधान दक्षिण-दक्षिण सहयोग के माध्यम से अन्य देशों में भी अपनाए और बढ़ाए जा सकते हैं.
विश्व खाद्य कार्यक्रम के लिए इस प्रदर्शनी का सन्देश स्पष्ट था. केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता से भूख समाप्त नहीं होगी. लेकिन जब इसे साझेदारी, नीतिगत सहयोग और स्थानीय नवाचार के साथ जोड़ा जाता है, तो यह मानवीय सहायता की पहुँच और प्रभाव को काफ़ी बढ़ा सकती है.