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पश्चिमी तट में इसराइल द्वारा 'भूमि पंजीकरण' फिर शुरू किए जाने की निन्दा

इसराइल द्वारा क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े - पश्चिमी तट के एक ध्वस्त गाँव में खेलते कुछ बच्चे.
© UNOCHA
इसराइल द्वारा क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े - पश्चिमी तट के एक ध्वस्त गाँव में खेलते कुछ बच्चे. ग़ाज़ा में इसराइली बमबारी में अधिकतर हिस्सा बुरी तरह तबाह हो गया है.

पश्चिमी तट में इसराइल द्वारा 'भूमि पंजीकरण' फिर शुरू किए जाने की निन्दा

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने, इसराइल द्वारा क़ाबिज़ फ़लस्तीनी क्षेत्र - पश्चिमी तट के एक बड़े हिस्से में, भूमि के सरकारी सम्पत्ति के रूप में पंजीकरण की प्रक्रिया, फिर शुरू किए जाने के निर्णय की निन्दा की है.

यह घटनाक्रम मई 2025 में, इसराइली मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए एक निर्णय पर अमल किए जाने से उत्पन्न हुआ है, जो पश्चिमी तट के क्षेत्र-C पर लागू होता है. इसमें पश्चिमी तट का लगभग 60 प्रतिशत इलाक़ा शामिल है.

यूएन महासचिव के प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने, सोमवार को न्यूयॉर्क में नियमित प्रैस वार्ता में बताया कि रविवार को इसराइली कैबिनेट ने मई 2025 के निर्णय पर अमल किए जाने को स्वीकृत किया है. 

अगर इस निर्णय पर अलम जारी रखा गया तो, 1967 में पश्चिमी तट पर इसराइल द्वारा क़ब्ज़ा किए जाने के बाद यह पहली बार होगा जब इसराइल वहाँ ज़मीन को सरकारी सम्पत्ति के रूप में पंजीकृत करने लगेगा.

फ़लस्तीनियों की बेदख़ली का जोखिम

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने पत्रकारों को बताया कि इसराइली निर्णय से, फ़लस्तीनियों को उनकी सम्पत्ति से बेदख़ल किए जाने का रास्ता खुल सकता है, और इससे पश्चिमी तट के उस इलाक़े में, इसराइली नियंत्रण का विस्तार होने का भी जोखिम है.

प्रवक्ता ने कहा, “इस तरह के उपाय, और क़ाबिज़ फ़लस्तीनी क्षेत्र में इसराइल की लगातार मौजूदगी, ना केवल अस्थिरता पैदा करने वाले कारक हैं, बल्कि, जैसाकि अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय ने निर्धारित किया है, ग़ैरक़ानूनी भी हैं.”

एक आदमी गाजा में मलबे और मलबे के बड़े पैमाने पर ढेरों से लंबित एक सड़क से गुजरता है, पृष्ठभूमि में कई सफेद एसयूवी और लोग हैं, जो विनाश और चल रहे राहत प्रयासों को उजागर करते हैं।
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स्तेफ़ान दुजैरिक ने कहा कि महासचिव ने इसराइल सरकार से, उन उपायों को तुरन्त पलट देने का आहवान किया है. 

उन्होंने साथ ही आगाह भी किया है कि धरातल पर मौजूदा गतिविधियाँ, इसराइलियों और फ़लस्तीनियों के दरम्यान दो राष्ट्र की स्थापना के समाधन की सम्भावनाओं को धूमिल कर रही हैं.

यहूदी बस्तियों का विस्तार अवैध

पिछले सप्ताह इसराइली कैबिनेट ने ऐसे उपायों को स्वीकृत किया था जो, पश्चिमी तट के ए और बी इलाक़ों में, इसराइल के सिविल प्राधिकारों में वृद्धि करेंगे. ये दोनों इलाक़े मिलकर, पश्चिमी तट का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा हैं.

प्रवक्ता ने कहा, “महासचिव ने दोहराया है कि क़ाबिज़ पश्चिमी तट में तमाम यहूदी बस्तियाँ और उनसे सम्बन्धित गतिविधियों और प्रक्रियाओं का कोई क़ानूनी आधार नहीं है, और ये अन्तरराष्ट्रीय क़ानून व संयुक्त राष्ट्र के सम्बन्धित प्रस्तावों का खुला उल्लंघन करती हैं.”

यूएन प्रमुख ने सभी पक्षों से, बातचीत के ज़रिए, दो राष्ट्र की स्थापना के समाधान का रास्ता सुरक्षित रखने का आग्रह किया है, “जोकि दीर्घकालीन शान्ति के लिए एक मात्र मार्ग है.”

सुरक्षा वेस्ट पहने एक श्रमिक एक पीले रंग के खुदाई मशीन को यूएनडीपी-ब्रांडेड डंप ट्रक में कचरा लोड करते हुए देखता है, जो गाजा शहर में फ़िरस मार्केट कचरा स्थल पर है।
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ग़ाज़ा में सहायता पर प्रतिबन्ध जारी

इस बीच ग़ाज़ा में मानवीय सहायता एजेंसियों ने, खाद्य और आश्रय सामग्री, स्वास्थ्य, पानी व स्वच्छता सामान के 1,900 विशाल पैकेट, सीमा चौकियों से, ग़ाज़ा पट्टी में पहुँचाने में मदद की है.

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय राहत समन्वय कार्यालय – OCHA ने बताया है कि इसके बावजूद, सहायता अभियानों को अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ा है.

जॉर्डन से आने वाले सहायता क़ाफ़िलों को ऐसे मार्गों के लिए सीमित रखा गया है जहाँ पर सामान को वाहनों से कई बार उतारना और फिर चढ़ाना पड़ता है.

मिस्र की तरफ़ से आने वाले जो सहायता क़ाफ़िले कैरेम शेलॉम/कैरेम अबू सलेम सीमा चौकियों से दाख़िल होते हैं, उन्हें बड़ी संख्या में वापिस लौटाया जा रहा है. 4 से 10 फ़रवरी की अवधि में ऐसे 60 प्रतिशत सहायता क़ाफ़िलों का सामान वाहनों से उतरवा दिया गया था.

ग़ौरतलब है कि ग़ाज़ा के भीतर जिन मानवीय सहायता गतिविधियों के लिए, इसराइली अधिकारियों के साथ सामंजस्य की आवश्यकता होती है, उनमें भी अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है.