सीरिया: कुर्द प्रशासन के साथ समझौता प्रगति का संकेत, मगर स्थिति अब भी नाज़ुक
सीरियाई सरकार और पूर्वोत्तर क्षेत्र में कुर्द प्रशासन के बीच एक अहम समझौते से प्रगति हुई है, मगर देश के दक्षिणी इलाक़े में नए सिरे से भड़की हिंसा, इसराइली कार्रवाइयों और गहरी मानवीय आवश्यकताओं के कारण स्थिरता फ़िलहाल नाज़ुक है. सीरिया के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष उप दूत क्लॉडियो कोर्डोन ने शुक्रवार को सुरक्षा परिषद में अपने सम्बोधन में यह जानकारी दी है.
उन्होंने सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को बताया कि 30 जनवरी को हुए युद्धविराम और सीरियाई सरकार व सीरयाई डेमोक्रेटिक फ़ोर्सज़ नामक कुर्द मिलिशिया के बीच एकीकरण पर हुआ समझौता एक बड़ा क़दम है.
इस समझौते से, पूर्वोत्तर सीरिया के चरणबद्ध ढंग से सैन्य व प्रशासनिक एकीकरण का मार्ग खुला है. साथ ही, इसमें विस्थापितों की वापसी और कुर्द आबादी के नागरिक व शैक्षिक अधिकारों के संरक्षण का भी प्रावधान है.
उप दूत क्लॉडियो कोर्डोन ने बताया कि टकराव का अन्त हो गया है और एक सकारात्मक ढंग से इस समझौते को लागू करने के लिए प्रयास हो रहे हैं.
इससे पहले, गुरूवार को सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों ने अपने एक वक्तव्य में इस व्यापक समझौते का स्वागत करते हुए सचेत किया था कि आम नागरिकों की पीड़ा में कमी लाने और आतंकी गुट आइसिल (दाएश) के हिरासत केन्द्रों के इर्दगिर्द सुरक्षा का ख़याल रखा जाना होगा.
सम्वेदनशील स्थिति
यूएन के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सीरियाई और ग़ैर-सीरियाई मूल के दाएश संदिग्धों को इराक़ में हस्तांतरित किए जाने की प्रक्रिया पर नज़र रखी जा रही है, जहाँ उन पर न्यायोचित ढंग से मुक़दमे की कार्रवाई होगी.
उन्होंने सदस्य देशों से आग्रह किया है कि अपने देश के नागरिकों को जल्द से जल्द वापिस लिया जाना होगा.
पूर्वोत्तर सीरिया में अब हालात स्थिरता की ओर लौटते नज़र आ रहे हैं, लेकिन अन्य हिस्सों में तनाव अब भी व्याप्त है. सुवैदा में सरकारी सुरक्षा बलों और स्थानीय हथियारबन्द गुटों के बीच झड़पों की ख़बरें हैं.
स्व-निर्णय की मांग के साथ फिर से प्रदर्शन हुए हैं. यूएन ने कहा है कि सीरिया की सम्प्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता का पूर्ण सम्मान करते हुए भरोसा बढ़ाने वाले क़दम उठाने होंगे.
दक्षिणी सीरिया में इसराइली गतिविधियों और तलाशी अभियान अब भी जारी हैं. इसके अलावा, रासायनिक सामग्री (herbicide) का छिड़काव किए जाने की भी जानकारी है, जिससे फ़सलों को नुक़सान पहुँचा है.
विशेष उप दूत ने अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का सम्मान करने के लिए इसराइल से आग्रह किया और उन इलाक़ों से वापिस जाने के लिए कहा है, जोकि 1974 में हुए समझौते के अनुरूप नहीं हैं.
मानवीय चुनौतियाँ बरक़रार
सीरिया में ज़रूरतमन्दों की विशाल आबादी है और मानवीय स्थिति में फ़िलहाल आंशिक सुधार के ही संकेत हैं.
यूएन मानवतावादी कार्यालय में वित्त पोषण विभाग की निदेशक लीसा डॉटेन के अनुसार, पिछले कुछ समय में हुई झड़पों से हज़ारों लोग विस्थापित हुए हैं, जिनमें से बड़ी संख्या में लोग वापिस भी लौटे हैं.
1.3 लाख लोग अब भी अल-हसाकेह, अल-राक़्क़ा और अलेप्पो गवर्नरेट में अब भी विस्थापित हैं, जिनमें 90 फ़ीसदी से अधिक महिलाएँ व लड़कियाँ हैं, जिन्होंने भीड़भाड़ भरे शिविरों में शरण ली हुई है.
इस सप्ताह, इदलिब और उत्तरी लताकिया में भीषण बाढ़ की वजह से दो बच्चों की जान गई है और कम से कम 2 हज़ार टैंट को क्षति पहुँची है. कुल 5 हज़ार विस्थापित लोग प्रभावित हुए हैं.
उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में मानवीय सहायता सेवाओं तक पहुँच अब बेहतर हो रही है. यूएन टीमों ने 2 लाख लोगों तक राहत पहुँचाई है और मरम्मत के बाद बिजली आपूर्ति भी बहाल हुई है.