सुरक्षा परिषद: यमन में स्थिरता, व्यापक टकराव से बचाव के लिए उपाय अनिवार्य
यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हैंस ग्रुंडबर्ग ने देश में स्थिरता को बढ़ावा देने और आम नागरिकों के रहन-सहन की परिस्थितियों में बेहतरी के लिए उठाए गए क़दमों का स्वागत किया है. उन्होंने सुरक्षा परिषद में सदस्य देशों को सम्बोधित करते हुए ध्यान दिलाया है कि एक राजनैतिक प्रक्रिया के ज़रिए ही लम्बे समय से जारी हिंसक टकराव का अन्त किया जा सकता है.
विशेष दूत ग्रैंडबुर्ग ने चेतावनी दी है कि क्षेत्रीय तनावों की वजह से यमन एक बार फिर व्यापक स्तर पर टकराव में उलझ सकता है.
उन्होंने सदस्य देशों से आग्रह किया कि राजनैतिक प्रक्रिया की ओर लौटने के लिए एक विश्वसनीय मार्ग को समर्थन देने में एकजुटता दर्शानी होगी. क्षेत्रीय पक्षों को भी इसके अनुरूप आगे बढ़ने की आवश्यकता है और यमनी नागरिकों को आपसी बातचीत के लिए प्रोत्साहित करने में अपने प्रभाव का उपयोग करना होगा.
वर्ष 2014 के बाद से ही, यमनी सरकारी बल और हूथी लड़ाकों के बीच देश पर नियंत्रण के लिए टकराव जारी है. अन्तरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमनी सरकार को सऊदी अरब के नेतृत्व में गठबंधन का समर्थन प्राप्त है, और यह दक्षिणी क्षेत्र में स्थित शहर अदन में स्थित है.
वहीं हूथी लड़ाकों (अंसार अल्लाह गुट) का राजधानी सना समेत देश के उत्तरी व पश्चिमी हिस्से पर क़ब्ज़ा है. पिछले कुछ महीनों में, दक्षिणी हिस्से में एक अन्य अलगाववादी गुट ने इलाक़े को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिशें की हैं.
यमन की कुल आबादी का क़रीब 50 फ़ीसदी, 2.2 करोड़ लोगों को इस वर्ष मानवीय सहायता की आवश्यकता होगी, जोकि दर्शाता है कि 2025 की तुलना में ज़रूरतमन्दों की संख्या 30 लाख बढ़ी है. 1.8 करोड़ लोग खाद्य असुरक्षा का शिकार हैं, और यमन मध्य पूर्व क्षेत्र में एक गम्भीर भूख संकट है.
प्रगति, मगर नाज़ुक स्थिति
विशेष दूत ग्रैंडबुर्ग ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद से सुरक्षा परिषद को जानकारी देते हुए कहा कि सरकार के नियंत्रण वाले इलाक़ों में स्थिति में सुधार आया है. बिजली आपूर्ति बेहतर हुई है और सार्वजनिक सैक्टर में वेतन का भुगतान हुआ है. तीन महिलाओं को कैबिनेट मंत्री के तौर पर नियुक्त किया गया है.
यूएन के वरिष्ठ अधिकारी हैंस ग्रुंडबर्ग ने रियाद में यमन के नवनियुक्त प्रधानमंत्री शाया अल-ज़िन्दानी और राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के सदस्यों से मुलाक़ात की है.
उन्होंने सचेत किया कि यमन में तनाव अब भी व्याप्त है, हाल के दिनों में सुरक्षा से जुड़ी घटनाएँ हुई हैं, और हिंसा में कुछ लोगों को हताहत होने की ख़बरें हैं. यह दर्शाता है कि स्थिति अब भी कितनी नाज़ुक है.
हैंस ग्रुंडबर्ग के अनुसार, देश के किसी भी हिस्से में स्थिरता तब तक स्थाई नहीं होगी, जब तक व्यापक टकराव के कारणों को दूर नहीं किया जाता है.
इसके मद्देनज़र, विशेष दूत युद्धरत पक्षों, क्षेत्रीय शक्तियों और अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के साथ बातचीत व सम्पर्क में जुटे हैं, ताकि देश में एक समावेशी राजनैतिक प्रक्रिया को फिर से शुरू करने के रास्तों की तलाश की जा सके.
कर्मचारियों की रिहाई
यूएन दूत ने अपने सम्बोधन में संयुक्त राष्ट्र के उन कर्मचारियों की बिना शर्त रिहाई की मांग की है, जिन्हें हूथी लड़ाकों ने लम्बे समय से मनमाने ढंग से हिरासत में रखा हुआ है.
फ़िलहाल, 73 लोग उनकी हिरासत में हैं, जिनमें यूएन कर्मचारियों समेत नागरिक समाज और कूटनैतिक मिशन के प्रतिनिधि भी हैं.
उन्होंने बताया कि अनेक के साथ कोई सम्पर्क नहीं हो पा रहा है और उनकी स्थिति व कुशलता के बारे में गहरी चिन्ता है. कुछ कर्मचारियों को अंसार अल्लाह की विशेष आपराधिक अदालत में भी भेजा गया है, जहाँ मुक़दमे की कार्रवाई निष्पक्ष सुनवाई से दूर है.