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विज्ञान जगत में महिलाएँ व लड़कियाँ: बराबरी की ओर बढ़ते मज़बूत क़दम

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© UNICEF/Arun Roisri
यूनीसेफ़, ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित की शिक्षा का विस्तार करने के लिए काम कर रहा है.

विज्ञान जगत में महिलाएँ व लड़कियाँ: बराबरी की ओर बढ़ते मज़बूत क़दम

महिलाएँ

युवा पुरुषों की तुलना में महिलाओं व लड़कियों द्वारा उच्च शिक्षा प्राप्त करने की सम्भावना अधिक होती है, लेकिन विज्ञान के स्नातकों में उनकी हिस्सेदारी केवल 35 प्रतिशत ही है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, विज्ञान, टैक्नॉलॉजी, इंजीनियरिंग व गणित (STEM) विषयों में लैंगिक खाई को दूर करके, समावेशी व सतत विकास में तेज़ी लाई जा सकती है.

दुनिया भर में, STEM क्षेत्रों में आज भी महिलाओं और पुरुषों के बीच स्पष्ट अन्तर दिखाई देता है. इसके पीछे शोध के लिए सीमित संसाधन, सामाजिक रूढ़ियाँ और कार्यस्थलों पर भेदभाव जैसे कारण हैं.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि यह असमानता तकनीकी क्षेत्र में और अधिक गहरी है. डेटा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े कार्यों में महिलाएँ केवल 26 प्रतिशत हैं, जबकि 'क्लाउड कम्प्यूटिंग' में उनकी भागेदारी महज़ 12 प्रतिशत है.

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि महिलाओं को विज्ञान से दूर रखा जाएगा, तो जलवायु परिवर्तन, सार्वजनिक स्वास्थ्य और अन्तरिक्ष सुरक्षा जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने की हमारी सामूहिक क्षमता कमज़ोर पड़ जाएगी.

बेहतर समावेशन

संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि बढ़ती असमानताओं के दौर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सामाजिक विज्ञान, विज्ञान-प्रौद्योगिकी और वित्तीय क्षेत्र को एक साथ जोड़कर, समावेशी एवं सतत विकास में तेज़ी लाई जा सकती है.

बुधवार को विज्ञान में महिलाओं व लड़कियों के लिए अन्तरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर इस दृष्टिकोण पर ध्यान केन्द्रित किया गया है.

इन क्षेत्रों में सहयोग से डिजिटल कौशल में लैंगिक अन्तर कम किया जा सकता है, महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को प्रोत्साहन मिल सकता है, एआई सम्बन्धी नीतियों को अधिक सम्वेदनशील बनाया जा सकता है और ऐसे निवेश को बढ़ावा दिया जा सकता है जो सामाजिक समावेशन को प्राथमिकता दे.

यूएन महासचिव ने कहा, “नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने से लेकर अगली महामारी को रोकने तक, हमारा भविष्य इस पर निर्भर है कि हम कितनी अधिक मानव प्रतिभा को अवसर दे पाते हैं.”

उन्होंने आग्रह किया, “आज और हर दिन हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि महिलाएँ और लड़कियाँ अपने वैज्ञानिक सपनों को साकार कर सकें – अपने अधिकारों के लिए और सबकी भलाई के लिए.”

वैज्ञानिक, उद्यमी, पैरोकार

किर्गिस्तान की रसायन वैज्ञानिक और उद्यमी, असेल सार्तबाएवा इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल हैं.

वह ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ़ बाथ में रसायन विज्ञान की सहायक प्रोफ़ेसर हैं. साथ ही, वह जैव-प्रौद्योगिकी कम्पनी एंसिलीटेक (EnsiliTech) की सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी हैं.

उनका शोध वैश्विक स्वास्थ्य की एक अहम समस्या पर केन्द्रित है. वे ऐसे समाधान विकसित कर रही हैं, जिनसे ऊँचे तापमान में भी टीके सुरक्षित और प्रभावी रह सकें, ताकि उन्हें जटिल कोल्ड चेन व्यवस्था के बिना दूर-दराज़ के समुदायों तक आसानी से पहुँचाया जा सके.

STEM में लड़कियों का समर्थन

अपने शोध कार्य के अलावा, असेल सार्तबाएवा किर्गिस्तान में ‘विज्ञान में लड़कियाँ’ पहल के लिए, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की पैरोकार भी हैं. वह लड़कियों को उच्च शिक्षा हासिल करने और विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित के क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं.

उन्होंने यूएन न्यूज़ को बताया कि कई समुदायों में लड़कियों के भविष्य से जुड़े निर्णय परिवार, विशेषकर पिता, प्रभावित करते हैं.

उन्होंने कहा, “अक्सर पिताओं की चिन्ता होती है कि अगर उनकी बेटियाँ विज्ञान चुनेंगी, तो वे परिवार नहीं बना पाएँगी.”

असेल सार्तबाएवा के अनुसार, “सबसे पहले यह समझाना ज़रूरी है कि यह धारणा सही नहीं है. लड़कियाँ करियर और परिवार दोनों को साथ लेकर चल सकती हैं. ये एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं.”

‘हमें आपकी ज़रूरत है’

यूनीसेफ़ का यह कार्यक्रम विज्ञान की पढ़ाई के साथ मार्गदर्शन, संचार कौशल और आत्मविश्वास बढ़ाने पर भी ज़ोर देता है. हज़ारों लड़कियाँ इससे जुड़ चुकी हैं, और कई आगे चलकर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित में उच्च शिक्षा ले रही हैं.

असेल सार्तबाएवा का मानना है कि विज्ञान में महिलाओं के लिए हालात पहले से बेहतर हुए हैं. जब वह छात्रा थीं, तब महिला प्रोफ़ेसर बहुत कम थीं. आज वह अधिक सन्तुलन व समावेशन को बढ़ावा देने वाली मज़बूत नीतियाँ देखती हैं.

फिर भी, और अधिक प्रतिभा की ज़रूरत है. इन क्षेत्रों में आने का सोच रही लड़कियों के लिए उनका सीधा सन्देश है: “हमें आपकी ज़रूरत है.”