विश्व भर में, 20 फ़ीसदी मछली कारोबार, धोखाधड़ी की चपेट में होने की आशंका
दुनिया भर में बाज़ारों, किराना दुकानों और रेस्तराँ में मछली से जुड़ी धोखाधड़ी व्यापक रूप से फैली हुई है, लेकिन अब कई नवाचारी उपायों के ज़रिए इस प्रवृत्ति पर लगाम लगाने में मदद मिल रही है. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने मंगलवार को जारी अपनी एक नई रिपोर्ट में यह जानकारी दी है.
यूएन विशेषज्ञों के अनुसार, मत्स्य धोखाधड़ी (Fish Fraud) का अर्थ है: जानबूझकर लोगों को गुमराह करने वाला काम.
यूएन एजेंसी ने बताया कि 195 अरब डॉलर के वैश्विक मत्स्य (fisheries) और जलीय-कृषि (aquaculture) सैक्टर में धोखाधड़ी की व्यापकता का कोई आधिकारिक अनुमान नहीं है, लेकिन विभिन्न अध्ययनों से संकेत मिलता है कि कुल कारोबार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा किसी न किसी प्रकार की धोखाधड़ी से प्रभावित हो सकता है.
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि कुछ अध्ययनों के अनुसार, रेस्तराँ में परोसे जाने वाले समुद्री भोजन (seafood) में से लगभग 30 प्रतिशत का लेबल सही नहीं होता है.
इसमें दुनिया भर के उदाहरण शामिल हैं, जैसेकि लातिन अमेरिका के सेविचे परोसने वाले स्टॉल (ceviche stands), चीन के समुद्री भोजन वाले रेस्तराँ और योरोपीय संघ में डिब्बाबन्द टूना उत्पाद.
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका में बिकने वाले जलीय उत्पादों में से लगभग एक-तिहाई पैकेज, उन पर नज़र आने वाले विवरण के अनुरूप नहीं होते हैं, जबकि कुल आयात के केवल 1 फ़ीसदी का ही परीक्षण किया जाता है.
मुनाफ़ा कमाने की होड़
मछलियों से जुड़ी धोखाधड़ी के पीछे सबसे आम वजह आर्थिक मुनाफ़ा है. उदाहरण के लिए, अटलांटिक सैलमन (जो ज़्यादातर पाली जाती हैं) को प्रशान्त सैलमन (जिसे समुद्र में पकड़ा जाए) के नाम से बेचना…यह प्रति किलोग्राम पर क़रीब 10 डॉलर अधिक कमाई देता है.
कुछ धोखाधड़ी इस लिए भी होती है ताकि उत्पाद की भौगोलिक उत्पत्ति छिपाई जा सके या निर्धारित सीमा से अधिक मछली पकड़ने के सबूतों को दबाया जा सके, क्योंकि इससे मछली की प्रजातियों की स्थिरता पर जोखिम उत्पन्न हो सकता है.
मत्स्य धोखाधड़ी क्या है?
मछलियों की धोखाधड़ी, जैवविविधता, मानव स्वास्थ्य और आर्थिक प्रणाली के लिए जोखिम उत्पन्न कर सकती है. कुछ मत्स्य धोखाधड़ी सीधे स्वास्थ्य के लिए ख़तरनाक भी है, जैसे कच्ची मछली खाने पर या बार-बार फ़्रीज़ करने से बैक्टीरिया बढ़ सकते हैं.
मुख्य प्रकार की मछली धोखाधड़ी हैं:
- मछली में पानी मिलाना ताकि वजन और क़ीमत बढ़ सके.
- मिलावट, जैसे टूना को ताज़ा दिखाने के लिए रंग डालना.
- स्टार्च के प्रयोग से नक़ली मछली या झींगा बनाना.
- पैकेजिंग बदलकर मछली को दूसरे रूप में दिखाना, जैसेकि केकड़े की तरह दिखाना.
- सही उत्पादों को उनके लिए निर्धारित बाज़ारों के बाहर बेचना.
- ग़लत लेबलिंग (सतत उत्पादन या अन्य झूठे दावे)
- आवश्यकता से अधिक मछली पकड़ना
- प्रजाति बदलना, जैसे तिलापिया को रेड स्नैपर के नाम से बेचना.
- उत्पत्ति और ख़राब होने की तिथि बदलना.
- चोरी
कुछ तरीक़े...
दुनिया भर में मछली की खपत बहुत बड़ी है. यह 12 हज़ार से अधिक समुद्री जीवों की प्रजातियों तक फैली हुई है. धोखाधड़ी के अनेक प्रकार हैं और नियम या क़ानून में एक समान परिभाषा नहीं है, इसलिए वैश्विक अनुमान लगाना मुश्किल है.
इस समस्या को कम करने में नए तरीके़ मदद कर सकते हैं, जैसे:
- मछली में मिलावट पहचानने में उन्नत लैब परीक्षण कारगर हैं, लेकिन इन तक पहुँच सीमित है.
- रिपोर्ट बताती है कि पोर्टेबल एक्स-रे फ़्लोरोसेंस और मशीन-लर्निंग मॉडल जैसी तकनीकें धोखाधड़ी रोकने और नियम लागू करने में मदद कर सकती हैं.
सिफ़ारिशें...
मछली धोखाधड़ी को रोकने के लिए रिपोर्ट की सिफ़रिशों में शामिल है:
- लेबलिंग के नियमों को सभी जगह समान बनाना होगा.
- हर सम्भव स्थान पर वैज्ञानिक नाम का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करना.
- बेहतर निगरानी और पहचान प्रणाली लागू करना
पहचान करना आसान नहीं
इसकी जटिलता के कारण, इस अपराध की पहचान करना आसान नहीं है. लेकिन रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि विज्ञान में प्रगति, इस धोखाधड़ी से निपटने में किस तरह से मदद कर सकती है:
- यह पता लगाने का कोई मानक तरीक़ा अभी तक विकसित नहीं हो पाया है कि किसी समुद्री उत्पाद को कितनी बार फ़्रीज़ करने के बाद बेचा गया, लेकिन जंगली और पाली गई मछलियों में मौजूद फ़ैटी-ऐसिड संरचना के अन्तर का उपयोग धोखाधड़ी की पहचान के लिए किया जा सकता है.
- प्रमुख व्यावसायिक मछली प्रजातियों की भौगोलिक उत्पत्ति निर्धारित करने के लिए कार्बन और नाइट्रोजन अनुपात का प्रयोग किया जा सकता है.
संयुक्त प्रयास
रिपोर्ट के अनुसार, मछली और अन्य खाद्य पदार्थों में धोखाधड़ी को कम करने और अन्ततः उसे समाप्त करने के लिए रोकथाम और कड़ाई से प्रवर्तन बेहद महत्वपूर्ण हैं.
रिपोर्ट में अर्जेन्टीना, इटली और अमेरिका में किए गए प्रयासों का भी उल्लेख किया गया है. कैलिफ़ोर्निया के लॉस एंजेलिस में किए गए एक डीएनए-बारकोडिंग परीक्षण से पता चला कि प्रसंस्करण संयंत्रों (processing plants) में मछली की ग़लत लेबलिंग बहुत कम है, लेकिन किराने की दुकानों में यह मध्यम स्तर पर है और सुशी रेस्तराँ में विशेष रूप से प्रचलित है.
स्थानीय विश्वविद्यालयों, उद्योग और सरकारी हिस्सेदारों द्वारा चलाए गए एक संयुक्त प्रयास और शिक्षा अभियान, समेत नियमित रूप से आयोजित परीक्षणों के परिणामस्वरूप, लक्षित क्षेत्र में मछली की ग़लत लेबलिंग में 10 वर्षों में दो-तिहाई तक की कमी आई है.