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पश्चिमी तट: नए इसराइली क़दमों से कमज़ोर होंगी, 'दो-राष्ट्र समाधान की सम्भावनाएँ'

पूर्वी यरूशलेम में सिलवान पड़ोस का एक पैनोरमा दृश्य, जिसमें एक स्पष्ट नीले आकाश के नीचे एक पहाड़ी किनारे पर घनी भीड़ वाली इमारतें दिखाई देती हैं। कुछ संरचनाएं क्षतिग्रस्त या निर्माणाधीन दिखाई देती हैं, जो निरंतर विस्थापन और बस्तियों के विस्तार को दर्शाता है।
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पूर्वी येरूशलम के सिलवान इलाक़े से फ़लस्तीनी परिवारों को बाहर निकाला जा रहा है.

पश्चिमी तट: नए इसराइली क़दमों से कमज़ोर होंगी, 'दो-राष्ट्र समाधान की सम्भावनाएँ'

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने क़ाबिज़ पश्चिमी तट के कुछ इलाक़ों में इसराइल द्वारा ऐसे प्रशासनिक क़दम उठाए जाने की योजना पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है, जिनसे यहूदी बस्तियों के निवासियों के लिए फ़लस्तीनी भूमि को क़ब्ज़े में लेना आसान होने और वहाँ इसराइली उपस्थिति का विस्तार होने की आशंका व्यक्त की गई है.

क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े के ‘एरिया ए’ और ‘एरिया बी’ में निर्णय लागू किए जाने की योजना बताई गई है. महासचिव गुटेरेश ने चेतावनी दी है कि ज़मीनी स्तर पर जिस तरह से क़दम उठाए जा रहे हैं, उससे मध्य पूर्व विवाद के लिए दो-राष्ट्र समाधान की सम्भावनाएँ धूमिल हो रही हैं.

उन्होंने दोहराया कि पूर्वी येरूशलम समेत क़ाबिज़ पश्चिमी तट में सभी इसराइली बस्तियों, और उनसे सम्बन्धित शासन व्यवस्था व बुनियादी ढाँचे, को कोई क़ानूनी मान्यता नहीं है और यह अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का खुला उल्लंघन है. 

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यूएन प्रमुख के अनुसार, ऐसा कोई भी क़दम, क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े में इसराइल की उपस्थिति न केवल अस्थिरता की वजह है बल्कि यह अवैध भी है.

इसके मद्देनज़र, उन्होंने इसराइल से ये क़दम वापिस लेने का आग्रह किया है. साथ ही, उन्होंने सभी पक्षों से बातचीत के आधार पर दो-राष्ट्र समाधान की दिशा में लौटने की अपील की है, जोकि उनके अनुसार, स्थाई शान्ति की ओर जाने वाला एकमात्र मार्ग है.

यूएन प्रवस्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने न्यूयॉर्क में सोमवार को नियमित पत्रकार वार्ता के दौरान इस वक्तव्य पर किए गए एक सवाल के जवाब में कहा कि ये निर्णय हमें सही दिशा में लेकर नहीं जा रहे हैं. 

“ये हमें दो-राष्ट्र समाधान से दूर, और दूर करते जा रहे हैं और अपने भाग्य को तय करने के लिए फ़लस्तीनी लोगों व फ़लस्तीनी प्राधिकरण की सामर्थ्य को भी.”

ग़ाज़ा में सहायता प्रयास

इस बीच, ग़ाज़ा पट्टी में मानवीय सहायताकर्मी स्थानीय आबादी की विशाल आवश्यकताओं को एक बेहद चुनौतीपूर्ण माहौल में पूरा करने में जुटे हैं. 

संयुक्त राष्ट्र अपने साझेदार संगठनों के साथ मिलकर, ज़रूरतमन्द आबादी तक लाखों भोजन पैकेट वितरित कर रहा है, और उन्हें डिजिटल नक़दी व मासिक राशन भी प्रदान किया जा रहा है.

यूएन मानवतावादी टीम ने बताया है कि ग़ाज़ा सिटी में पेयजल और घरेलू कामकाज के लिए पानी की क़िल्लत बरक़रार है, और ताज़े जल की आपूर्ति के लिए इसराइल को ग़ाज़ा से जोड़ने वाली एक अन्य सप्लाई लाईन के खुलने के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं आया है. 

फ़िलहाल, ग़ाज़ा सिटी में हर दिन आम लोगों तक 6 हज़ार क्यूबिक मीटर ही पहुँच पा रहा है और दुर्गम इलाक़ों में जल की बर्बादी हो रही है. इस कमी की वजह से, जल उत्पादन को बढ़ाया गया है और ट्रक के ज़रिए आपूर्ति की जा रही है.

सहायता संगठनों ने अब तक जल भरने के लिए 1 लाख बड़े डिब्बे, 7 लाख से अधिक साबुन, 25 हज़ार से अधिक स्वच्छता किट समेत अन्य सामान वितरित किए हैं. 

आयुध सामग्री का जोखिम

बारूदी सुरंग व विस्फोटक अवशेषों को हटाने में जुटे सहायताकर्मियों ने बताया है कि मलबे को हटाने के साथ-साथ विस्फोटक सामग्री की समीक्षा के कार्य को भी आगे बढ़ाया जा रहा है. 

इस क्रम में, 10 हज़ार से अधिक बच्चों व वयस्कों को पिछले सप्ताह विस्फोटक सामग्री के जोखिमों के प्रति सचेत किया गया, जोकि ग़ाज़ा में एक बड़ी चिन्ता है.

पिछले वर्ष अक्टूबर में, युद्ध विराम लागू होने के बाद से अब तक आयुध सामग्री के फटने के 33 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें 9 लोगों की जान गई है और 65 अन्य घायल हुए हैं.

इस बीच, यूएन मानवतावादी कार्यालय ने बताया है कि सहायता आपूर्ति के वितरण पर थोपी गई सख़्तियों की वजह से मानवीय राहत अभियान में कठिनाई पेश आ रही हैं. इनमें दोहरे इस्तेमाल के लिए काम में लाई जाने वाली सामग्री के प्रवेश पर की गई सख़्ती भी है.

साथ ही, इसराइल द्वारा कुछ ग़ैर-सरकारी संगठनों के पंजीकरण को रद्द किए जाने के बाद, फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन सहायता एजेंसी (UNRWA) पर लगाई गई पाबन्दियों की वजह से यह कार्य और कठिन हो गया है.