लीबियाई तट के पास नौका पलटने से बड़ी संख्या में प्रवासियों की मौत
संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी ने सोमवार को बताया कि लीबिया के तट के पास एक बड़ी नौका के पलटने से 2 शिशुओं समेत 53 प्रवासियों की मौत हो गई है या वे लापता हैं.
अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के अनुसार, यह नौका पिछले शुक्रवार को तटीय शहर, ज़ुवारा के उत्तर में, केन्द्रीय भूमध्य सागर के बेहद ठंडे पानी में पलट गई थी.
यह हादसा, सम्वेदनशील स्थितियों से जूझ रहे उन लोगों के साथ हुई जानलेवा घटनाओं की श्रृंखला में एक और कड़ी है, जो बेहतर जीवन की तलाश में सफ़र के दौरान मानव तस्करों और तस्करी गिरोहों के शिकार बनते रहे हैं.
ये गिरोह, 2011 में राष्ट्रपति मुआम्मर ग़द्दाफ़ी को सत्ता से बेदख़ल किए जाने के बाद लीबिया में तेज़ी से फलते-फूलते रहे हैं.
IOM ने बताया कि लीबियाई अधिकारियों ने शुक्रवार की इस नौका दुर्घटना के बाद 2 नाइजीरियाई महिलाओं को बचाया है.
इनमें से एक महिला ने बताया कि उसके पति की डूबने से मौत हो गई, जबकि दूसरी महिला ने कहा कि उसके दोनों शिशुओं की जान चली गई.
इस घटना में बचे हुए लोगों ने बताया कि इस नाव में कई अफ़्रीकी देशों के प्रवासी और शरणार्थी सवार थे. यह नाव गुरुवार रात लगभग 11 बजे ज़ाविया से रवाना हुई थी और करीब 6 घंटे बाद उसमें पानी भरने लगा, जिसके बाद वह पलट गई.
हालाँकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ये लोग किस गन्तव्य की ओर जा रहे थे, लेकिन लीबिया से रवाना होने वाली अधिकांश प्रवासी नौकाएँ इटली के लैम्पेडूसा द्वीप की ओर जाती हैं, जो ज़ाविया से लगभग 350 किलोमीटर दूर है.
लम्बे और ख़तरनाक सफ़र...
संयुक्त राष्ट्र की सहायता टीमों ने बार-बार चेतावनी दी है कि रबर की बनी ये खुली नौकाएँ, जिनमें अक्सर प्रवासी यात्रा करते हैं, इतने लम्बे और ख़तरनाक सफ़र के लिए बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं हैं.
IOM के अनुसार, इस वर्ष केवल जनवरी महीने में ही केन्द्रीय भूमध्य सागर में कम से कम 375 लोगों के मारे जाने या लापता होने की सूचना है. यह आँकड़े IOM के ‘लापता प्रवासी’ डेटाबेस पर आधारित हैं.
यूएन एजेंसी ने चेतावनी दी कि कड़ाके की सर्दी के मौसम के बीच हुआ यह नाव हादसा, ऐसी कई त्रासदियों में से केवल एक है, जबकि आशंका है कि अनेक त्रासदीपूर्ण घटनाएँ दर्ज ही नहीं हो पाई हैं.
IOM ने कहा कि तस्करी और मानव-तस्करी के नैटवर्क, हताश लोगों को समुद्र में सफ़र के लायक़ न होने वाली नौकाओं में भेजकर अब भी मुनाफ़ा कमा रहे हैं. यूएन एजेंसी ने इस पर गम्भीर चिन्ता जताते हुए अन्तरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने और सुरक्षित व क़ानूनी प्रवासन मार्ग उपलब्ध कराने की अपील दोहराई है.
संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी ने बताया है कि इस वर्ष अब तक 781 प्रवासियों को समुद्री मार्गों पर रोके जाने के बाद लीबिया वापिस भेज दिया गया है, जिनमें से 244 लोगों को केवल पिछले सप्ताह ही वापिस पहुँचाया गया.
एजेंसी के अनुसार, पिछले वर्ष इस तरह से रोके गए लोगों की संख्या 27 हज़ार से अधिक थी, जबकि उसी अवधि में 1,314 प्रवासियों के मारे जाने या लापता होने की सूचना दर्ज की गई थी.
भूमिगत हिरासत स्थल ...
IOM ने दोहराया कि वह लीबिया को प्रवासियों के लिए सुरक्षित बन्दरगाह नहीं मानती है.
एजेंसी ने कहा कि देश के पूर्वी हिस्से में सामूहिक क़ब्रों के मिलने और अवैध हिरासत स्थलों के नए मामले सामने आने के बाद, प्रवासियों के सामने मौजूद ख़तरे और अधिक उजागर हुए हैं.
IOM ने बताया कि अजदाबिया में एक अवैध हिरासत स्थल पर अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई के बाद की गई जाँच से संकेत मिला है कि पीड़ितों को बन्धक बनाकर रखा गया था और उनके परिवारों से फ़िरौती वसूलने के लिए उन्हें यातनाएँ दी गई थीं.
लीबिया के कुफ़रा शहर में अधिकारियों ने ज़मीन से लगभग तीन मीटर नीचे बने एक भूमिगत हिरासत स्थल का पता लगाया है, जहाँ से कुल 221 प्रवासियों और शरणार्थियों को मुक्त कराया गया. इनमें महिलाएँ, बच्चे और एक महीने का नवजात शिशु भी शामिल है.
IOM के मुताबिक़, प्रारम्भिक जानकारी से संकेत मिलता है कि इन लोगों को बेहद अमानवीय परिस्थितियों में लम्बे समय तक बन्धक बनाकर रखा गया था.
असुरक्षित हालात में फँसे लोगों की सहायता के लिए, यूएन एजेंसी स्वैच्छिक वापसी उड़ानों के माध्यम से विदेशी नागरिकों को उनके देश लौटने में भी मदद कर रही है.
इसी क्रम में, पिछले सप्ताह त्रिपोली पहुँचे पाकिस्तानी नागरिकों के लिए एक विशेष उड़ान का प्रबन्ध किया गया, जबकि जनवरी के अन्त में 177 नाइजीरियाई प्रवासियों को मानवीय उड़ान के ज़रिये स्वदेश भेजा गया था.
मानव तस्करी के नैटवर्क को ध्वस्त करने और पीड़ितों को सहायता पहुँचाने के उद्देश्य से, IOM देशीय और क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ मिलकर सीमा-पार सहयोग को मज़बूत करने पर भी कार्य कर रही है.