भारत में युवजन के रोज़गार-उन्मुख कौशल प्रशिक्षण को विश्व बैंक का समर्थन
विश्व बैंक ने भारत के कौशल प्रशिक्षण संस्थानों को मज़बूत करने के लिए वित्तीय सहायता को मंज़ूरी दी है, जिसका उद्देश्य प्रशिक्षण को रोज़गार-बाज़ार की ज़रूरतों से जोड़ना है. साथ ही, कामकाजी जीवन में प्रवेश कर रहे युवाओं के लिए अधिक रोज़गार अवसर पैदा करना है.
भारत में देश के कुल बेरोज़गारों में युवाओं की हिस्सेदारी लगभग 72 प्रतिशत है. प्रशिक्षण और उद्योग की ज़रूरतों के बीच बना अन्तर अब भी उत्पादकता, कम्पनियों की प्रगति और आय को प्रभावित कर रहा है.
युवाओं को कौशल देने में अहम भूमिका निभाने वाले औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, यानि आईटीआई, आज कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं.
इनमें अपर्याप्त सुविधाएँ, योग्य प्रशिक्षकों की कमी और उद्योग मानकों को पूरा करने के लिए सीमित संसाधन शामिल हैं. इसी वजह से, आईटीआई से प्रशिक्षण लेने वाले, आधे से भी कम युवाओं को ही रोज़गार मिल पाता है.
उन्नत आईटीआई के तहत प्रधानमंत्री कौशल और रोज़गार परिवर्तन कार्यक्रम के माध्यम से, आईटीआई प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए 83 करोड़ डॉलर का ऋण दिया गया है.
इस पहल से हर साल दस लाख से अधिक, बेहतर प्रशिक्षित कामगार तैयार होने की उम्मीद है. इससे अधिक युवाओं को रोज़गार से जोड़ने में मदद मिलेगी.
यह कार्यक्रम एशियाई विकास बैंक के साथ मिलकर तैयार किया गया है. इसके तहत कौशल प्रशिक्षण में निजी क्षेत्र की भागेदारी बढ़ाने के लिए कम से कम 68 करोड़ डॉलर की निजी पूंजी भी जुटाई जाएगी.
नया मॉडल
भारत में विश्व बैंक के कार्यवाहक देश निदेशक पॉल प्रोसी ने कहा, “हर साल 1 करोड़ 20 लाख से अधिक लोग श्रम बाज़ार में प्रवेश करते हैं. इसलिए भारत के लिए रोज़गार सृजन एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है."
उन्होंने कहा, "निजी क्षेत्र के नेतृत्व में रोज़गार पैदा करना, भारत के लिए विश्व बैंक समूह की नई देशीय साझेदारी फ़्रेमवर्क का अहम हिस्सा है. यह कार्यक्रम, आईटीआई को बेहतर बनाने के लिए भारत के 4 अरब डॉलर के निवेश को समर्थन देकर, उद्योग की ज़रूरतों के अनुसार, प्रशिक्षण को मज़बूत करेगा, ताकि अधिक युवाओं को रोज़गार मिल सके.”
आईटीआई में पढ़ाए और सिखाए जाने वाले इलैक्ट्रीशियन, मैकेनिक और वेल्डर जैसे अनेक कौशल, अब तक ज़्यादातर पुरुषों तक सीमित रहे हैं.
अगले पाँच वर्षों में, यह कार्यक्रम पाठ्यक्रमों को नवीन बनाएगा और यह लक्ष्य रखेगा कि आईटीआई के कम से कम 25 प्रतिशत छात्र, महिलाएँ हों. इससे महिलाओं को बेहतर वेतन वाले रोज़गारों तक पहुँच मिल सकेगी.
यह कार्यक्रम आईटीआई को केवल प्रशिक्षण संस्थान ही नहीं, बल्कि बहु-भूमिका वाले संस्थान बनाने में भी मदद करेगा.
कार्यक्रम की टास्क टीम लीडर मार्गरेट क्लार्क और टोबी लिंडन ने कहा कि यह पहल आईटीआई को प्रशिक्षण, परामर्श और उत्पादन गतिविधियों का संतुलित संयोजन अपनाने में सक्षम बनाएगी.
इससे आईटीआई संस्थान, अपनी ख़ुद की आय उत्पन्न कर सकेंगे और प्रशिक्षण की गुणवत्ता व पहुँच को बेहतर कर पाएंगे.
ये संस्थान, विस्तारित केन्द्रों के साथ 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल के ज़रिये, विशेष और संसाधन-कुशल उत्कृष्टता केन्द्र बनेंगे.
83 करोड़ डॉलर के इस क़र्ज़ की वापसी की कुल अवधि 19.5 वर्ष है, जिसमें चार वर्ष की अतिरिक्त अवधि शामिल है.